बांस के प्राकृतिक विस्तार को पहुंच रहा नुकसान

बलौदा बाजार भाटापारा,आपूर्ति के बावजूद बाजार में इसकी लगातार मौजूदगी इस बात की तस्दीक करती है कि वनांचलों से चोरी-छिपे इसकी कटाई और परिवहन का अवैध कारोबार धड़ल्ले से जारी है।

बांस के प्राकृतिक विस्तार को पहुंच रहा नुकसान

पर्यावरणविदों के अनुसार, अगस्त के आखिरी हफ्तों तक बांस के झुरमुटों से जो नई कोंपलें निकलती हैं, वे बेहद कोमल होती हैं और आगे चलकर नए बांस के पौधों का रूप लेती हैं। यही कोंपलें बांस वनों के प्राकृतिक विस्तार का मुख्य आधार होती हैं। यदि इन्हें शुरुआती अवस्था में ही काट लिया जाएगा, तो वनों का दायरा और बांस की संख्या प्रभावित होना लाजिमी है। यही वजह है कि इस सीजन में करील की कटाई पर रोक लगाई जाती है।\

वनांचलों से बाजार तक पहुंच रहा माल, खतरा

सूत्रों के अनुसार, बाजारों में बिक रही करील पड़ोसी वनांचलों जैसे गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, कटघोरा और बलौदाबाजार जिले के बारनवापारा अभ्यारण्य से लाई जा रही है। वहीं, इसकी गुणवत्ता को लेकर भी गंभीर सवाल उठे हैं। ताजी करील को लंबे समय तक ताजा और चमकदार बनाए रखने के लिए चूने के घोल या अन्य रासायनिक पदार्थों में डुबोए जाने की बात सामने आ रही है, जो मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। उपभोक्ताओं की सेहत को ध्यान में रखते हुए खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा इसके नमूनों की जांच की मांग उठ रही है।

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