- एजी ख़बर निम्स दाई को उनके साहस और जज्बे को सलाम करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित करता है
इस्लामाबाद/काठमांडू: पर्वतारोहण की दुनिया से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। ‘नथिंग इज़ इम्पॉसिबल’ के नारे से दुनिया भर के युवाओं में जोश भरने वाले विश्व प्रसिद्ध पर्वतारोही निर्मल पुर्जा अब हमारे बीच नहीं रहे।
पाकिस्तान के गिलगित-बाल्टिस्तान (PoK) क्षेत्र में स्थित दुनिया की 12वीं सबसे ऊंची चोटी ब्रॉड पीक (Broad Peak) पर आए भयानक हिमस्खलन में उनकी और उनके पूरे दल की मौत हो गई है।
कैसे हुआ यह दर्दनाक हादसा?अचानक आया एवलांच: गुरुवार, 30 जुलाई 2026 को करीब सुबह 9 बजे, जब निर्मल पुर्जा अपने दल के साथ ब्रॉड पीक के शिखर की ओर बढ़ रहे थे, तभी लगभग 7,000 मीटर की ऊंचाई पर एक भीषण हिमस्खलन (एवलांच) हुआ।
पूरे दल से टूटा संपर्क: इस तूफान ने निर्मल पुर्जा समेत 10 सदस्यीय अंतरराष्ट्रीय टीम को अपनी चपेट में ले लिया। इसके बाद पूरी टीम का संपर्क टूट गया था।
सभी सदस्यों की मौत: एल्पाइन क्लब ऑफ पाकिस्तान (ACP) के मुताबिक, इस हादसे में टीम का कोई भी सदस्य जीवित नहीं बचा। इस दल में नेपाल के 6, पाकिस्तान के सोहेल सखी, ओमान की नाथिरा, अमेरिका की मॉलरी गेइस और चीन के मिस्टर वांग शामिल थे।
कंपनी का भावुक संदेश: शनिवार को उनकी कंपनी Elite Exped ने सोशल मीडिया पर लिखा, “अत्यंत दुख और भारी मन के साथ हम पुष्टि करते हैं कि ब्रॉड पीक पर हिमस्खलन के बाद निर्मल ‘निम्सदाई’ पुर्जा ने अपनी जान गंवा दी है। हमारे पास पुष्टि है कि अभियान के अन्य सदस्य भी नहीं बच पाए।”इतिहास रचने के बेहद करीब थे निर्मल (आखिरी इंस्टाग्राम पोस्ट)अपनी मौत से ठीक पहले किए गए अंतिम Instagram पोस्ट में उन्होंने बताया था कि ब्रॉड पीक पर चढ़ना पहले उनके प्लान में नहीं था। लेकिन जब उन्होंने अपनी चढ़ाइयों की गिनती की, तो उन्हें अहसास हुआ कि अगर वह ब्रॉड पीक फतह कर लेते हैं, तो इसके बाद केवल ‘चो ओयू’ (Cho Oyu) चोटी बचेगी। वह इतिहास में पहली बार दुनिया की सभी 14 सबसे ऊंची चोटियों को दो बार फतह करने वाले पहले इंसान बनने के बेहद करीब थे, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।
निर्मल पुर्जा का स्वर्णिम इतिहास और विश्व रिकॉर्ड (History & Legacy)
25 जुलाई 1983 को नेपाल में जन्मे निर्मल पुर्जा ने बाद में ब्रिटेन की नागरिकता ले ली थी। उन्होंने असंभव को संभव बनाने की कला से पर्वतारोहण के इतिहास को हमेशा के लिए बदल दिया।
स्पेशल फोर्सेज के जांबाज सैनिक: पर्वतारोही बनने से पहले निर्मल ने 16 साल तक ब्रिटिश सेना में सेवा दी। वह ब्रिटेन की सबसे खतरनाक और गुप्त नौसेना इकाई स्पेशल बोट सर्विस (SBS) में शामिल होने वाले पहले गोरखा सैनिक थे।’
प्रोजेक्ट पॉसिबल’ का चमत्कार (2019): उन्होंने दुनिया की उन सभी 14 चोटियों (जिनकी ऊंचाई 8,000 मीटर से अधिक है) को महज 6 महीने और 6 दिन में फतह किया था, जिसे करने में आम तौर पर लोगों को 7 से 8 साल लग जाते हैं।
नेटफ्लिक्स की लोकप्रिय फिल्म: उनके इसी ऐतिहासिक सफर पर साल 2021 में Netflix पर “14 Peaks: Nothing Is Impossible” नाम की डॉक्यूमेंट्री रिलीज हुई, जिसने उन्हें दुनिया भर के हर घर में मशहूर कर दिया।
के2 पर ऐतिहासिक शीतकालीन चढ़ाई (2021): जनवरी 2021 में, निर्मल पुर्जा और उनके साथी नेपाली शेरपाओं ने सर्दियों के क्रूर मौसम में दुनिया के सबसे खतरनाक पहाड़ के2 (K2) पर पहली बार तिरंगा और नेपाली झंडा लहराकर इतिहास रचा था।
नेपाल के प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा है, “पर्वतारोहियों की केवल शारीरिक यात्रा रुकी है, लेकिन उनके साहस, समर्पण और योगदान का इतिहास हमेशा जीवित और प्रेरणादायक रहेगा।”






