श्रमिकों के खाते में पहुंचे 1 लाख, घर पहुंचकर 35 हजार की मांग!

  • मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी में राहत राशि पर कथित दलालों की नजर, राजनांदगांव से जुड़े सिंडिकेट के आरोपों ने खड़े किए गंभीर सवाल

कमल मेश्राम ,राजनांदगांव। मोहला-मानपुर जिले में गरीब निर्माण श्रमिकों और उनके परिवारों को आर्थिक संकट से उबारने के लिए सरकार की ओर से दी जा रही सहायता राशि पर कथित बिचौलियों की नजर लगने का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल की योजनाओं के तहत हितग्राहियों के बैंक खातों में राशि पहुंचते ही कुछ कथित दलाल घर तक पहुंच रहे हैं और सहायता राशि में 30 से 35 प्रतिशत तक हिस्सेदारी मांग रहे हैं। एक लाख रुपए की सहायता मिलने पर 30 से 35 हजार रुपए तक की कथित कमीशन मांगने के आरोपों ने श्रम विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

डीबीटी से खाते में पैसा आते ही घर पहुंचने का आरोप

बताया जा रहा है कि निर्माण श्रमिकों को मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक मृत्यु एवं दिव्यांग सहायता योजना सहित विभिन्न योजनाओं के तहत मिलने वाली राशि सीधे डीबीटी के माध्यम से उनके बैंक खातों में पहुंची है। आरोप है कि राशि खाते में जमा होने के कुछ ही दिन में बिचौलिया हितग्राहियों के घर पहुंचकर अपना हिस्सा मांग रहे हैं।

सावधान!

*1 लाख में से 35,000 मांग रहे दलाल*

*कमीशन मांगा तो डायल करें 112 / 1076*

कथित बिचौलियों द्वारा स्वयं को श्रम विभाग से जुड़ा प्रभावशाली व्यक्ति बताकर हितग्राहियों पर दबाव बनाया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में कई हितग्राही सरकारी प्रक्रिया और नियमों से पूरी तरह परिचित नहीं होने के कारण ऐसे लोगों की बातों में आने को मजबूर हो जाते हैं।

कार्ड बंद करने की धमकी से गरीब परिवारों पर दबाव?

मामले में यह भी आरोप लग रहा है कि कतिपय टेंट व हितग्राही वाले श्रमिकों को उनका लेबर कार्ड बंद करने या कर्ज तथा भविष्य की सरकारी योजनाओं का लाभ बंद कराने की धमकी दी जाती है। यदि वे अपने खाते में राशि पहुंचने के बाद भी हिस्सा न दें तो यह महज अवैध वसूली का मामला नहीं, बल्कि सरकारी योजना के लाभार्थियों को डराकर उनका आर्थिक शोषण करने का गंभीर मामला है।

*राजनांदगांव से मोहला तक नेटवर्क की चर्चा*

स्थानीय स्तर पर इस कथित सिंडिकेट का नेटवर्क राजनांदगांव से जुड़े होने की चर्चा है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। यही वजह है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग उठ रही है। जांच में यह भी स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि हितग्राहियों की जानकारी कथित बिचौलियों तक कैसे पहुंच रही है और डीबीटी से राशि आने के बाद उन्हें इसकी जानकारी कैसे मिल जाती है।

सरकारी मदद पर किसका कब्जा?

सरकार की योजनाओं का उद्देश्य संकटग्रस्त श्रमिक परिवारों को आर्थिक संबल देना है। ऐसे में यदि सहायता राशि में किसी भी स्तर पर कमीशन वसूली हो रही है तो यह योजना के मूल उद्देश्य पर सीधा प्रहार है।

श्रमिकों को जागरूक करने के साथ दोषियों पर कार्रवाई जरूरी

प्रशासन को ऐसे मामलों में केवल अपील जारी करने के बजाय प्रत्येक शिकायत की जांच करनी चाहिए। श्रमिकों से अपील की गई है कि श्रमिकों की राशि प्राप्त करने के लिए किसी भी व्यक्ति को कमीशन या हिस्सा न दें। यदि कोई व्यक्ति राशि में हिस्सेदारी मांगता है या अपना कार्ड बंद करने की धमकी देता है तो उसकी शिकायत पुलिस, श्रम विभाग और प्रशासन के अधिकारियों से की जाए।

अब सवाल यह है कि गरीब श्रमिकों के खाते में पहुंचने वाली सहायता राशि क्या पूरी उनके परिवार तक पहुंच रही है या रास्ते में ही कथित कमीशन का खेल शुरू हो जाता है। इन आरोपों की निष्पक्ष जांच ही इस पूरे मामले की असली तस्वीर सामने ला सकती है।


अवैध ठगी करने वालों से सावधान…


  • ऐसे लोगों पर कानूनी कार्रवाई के लिए बाध्य होगा।
  • सूचना दें: 9993304845

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