भाटापारा में स्वाइन फ्लू के बीच सुअरों की मौत से चिंता बढ़ी

अस्पतालों मे सर्दी-खांसी के मरीजों की बढ़ती तादाद, जांच की कोई व्यवस्था नहीं

भाटापारा /स्वाइन फ्लू का पहला बड़ा प्रकोप और संक्रमण सबसे पहले 2009की शुरुवात मे मानी जाती है, यह बीमारी इन्फ्लूएंजा वायरस से होती है, वैज्ञानिक विश्लेषण के अनुसार 2009 का यह वायरस मानव पक्षी और सुअर (स्वाइन) के इन्फ्लूएंजा वायरस का अनोखा संयोजन है, चूंकि इस वायरस मे कई जेनेटिक हिस्से सुअरों में पाए जाने वाले वायरस से मिलते जुलते हैं इसलिए इसे स्वाइन फ्लू का नाम दिया गया। वर्तमान मे स्वाइन फ्लू का प्रकोप छत्तीसगढ के कई हिस्सों मे नजर आ रहा है, राजधानी रायपुर सहित विभिन्न हिस्सों मे मरीजों की संख्या नजर आ रही है, भाटापारा मे भी इससे ग्रसित मरीजों की तादाद बड़ी संख्या मे होने की संभावना व्यक्त की जा रही है।

जांच की समुचित व्यवस्था नहीं

अस्पतालों में सर्दी खांसी के मरीजों की बढ़ती संख्या एवं स्वाइन फ्लू से मिलते जुलते लक्षणों मसलन बुखार ठंड लगना खांसी गले में खराश नाक बहना शरीर मांसपेशियों में दर्द थकान और कमजोरी का प्रकट होना स्वाइन फ्लू का इशारा कर रहें है लेकिन भाटापारा मे जांच की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण पुष्टि नहीं हो पा रही है, जांच के लिए सिविल अस्पताल मे अभी तक कोई व्यवस्था नही होने के बाबत बीएमओ डॉ माहेश्वरी से चर्चा की गयी तो उनके द्वारा जिला से कोई गाइड लाइन नहीं आने का हवाला दिया गया साथ ही साथ जांच की व्यवस्था निर्मित करने बाबत पत्र लिखने की बात भी उनके द्वारा कही गयी।

सुअरों की होती मौत मचा हड़कंप

स्वाइन फ्लू के बढ़ते प्रकोप तथा इससे मिलते जुलते लक्षणों के मरीजों की बढ़ती तादाद तथा जांच की समुचित व्यवस्था नहीं होने की भाटापारा मे परिस्थिति वर्तमान में विकट हालात उत्पन्न करती हुई प्रतीत हो रही है, संदेह और आशंकाओं के इस माहौल के बीच में निकट ग्राम टेहका के एक फार्म हाउस से लगातार सुअरों की होती मौत की खबरें जनमानस को भय एवं चिंता में डालती हुई प्रतीत हो रही हैं, हालांकि पशु चिकित्सा विभाग द्वारा इस दिशा मे सक्रियता बरती जा रही है एवं मौतो की अहम वजह जानने के लिए सैंपल भोपाल भेजा गया है, रिपोर्ट का इंतजार है, चूंकि स्वाइन फ्लू का जेनेटिक संबंध स्वाइन (सुअर) से है लिहाजा जनमानस के बीच इस परिस्थति के मद्देनजर मानव स्वास्थ्य और वातावरण मे प्रभाव की आशंका को लेकर तरह तरह के संदेहों के जन्म लेने का परिदृश्य नजर आ रहा है। चूंकि स्वाइन एवं स्वाइन फ्लू का सतही तौर पर संबंध स्पष्ट रुप से दृष्टिगोचर होता है लिहाजा जनमानस का भय एवं शसंकित होना लाजिमी है कि कहीं इसका विस्तार न हो जाए, लेकिन चिकित्सा विधा के जानकारों का इस मसले पर राय अलग नजर आ रही है, अब यह तो रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि सुअरों को किस प्रकार का संक्रमण हुआ है स्वाइन फीवर जैसी आशंका व्यक्त की जा रही है. साथ ही साथ जानकारों का यह भी कहना है कि इसका मानव जाति या अन्य पशुओं में फैलने की संभावना नहीं है, लेकिन जानकारों का यह भी कहना है कि मांस का सेवन करने वालों को सतर्कता बरतना आवश्यक है क्योकि संक्रमित मांस का सेवन अन्य विभिन्न बीमारियों के जन्म लेने का कारण बन सकती है।

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