भारत के वे 5 ऐतिहासिक कृष्ण मंदिर, जिनका इतिहास और रहस्य आज भी लोगों को करता है चकित

भारत में भगवान श्रीकृष्ण के भक्तों की संख्या करोड़ों में है। देश के कोने-कोने में कान्हा के कई प्रसिद्ध मंदिर स्थापित हैं, जो न केवल आस्था के केंद्र हैं बल्कि वास्तुकला और इतिहास का बेजोड़ नमूना भी हैं। आइए जानते हैं देश के 5 सबसे मुख्य कृष्ण मंदिरों और उनके गौरवशाली इतिहास के बारे में।

1. द्वारकाधीश मंदिर (द्वारका, गुजरात)इतिहास और मान्यता:

यह मंदिर भगवान कृष्ण की कर्मभूमि द्वारका में स्थित है। माना जाता है कि इसे मूल रूप से श्रीकृष्ण के प्रपौत्र (पोते के बेटे) वज्रनाभ ने बनवाया था। यह मंदिर लगभग 2500 वर्ष से भी अधिक पुराना है और चार धामों में से एक है।खासियत:

यह मंदिर पांच मंजिला है और 72 स्तंभों पर टिका है। इसके शिखर पर लहराने वाली 52 गज की ध्वजा (झंडा) दिन में तीन बार बदली जाती है।

2. बांके बिहारी मंदिर (वृंदावन, उत्तर प्रदेश)इतिहास और मान्यता: वृंदावन का बांके बिहारी मंदिर ब्रज भूमि का दिल माना जाता है। इस मंदिर की स्थापना स्वामी हरिदास जी ने की थी। माना जाता है कि हरिदास जी के भक्ति संगीत से प्रसन्न होकर राधा-कृष्ण ने एक साथ प्रकट होकर एक विग्रह (मूर्ति) का रूप ले लिया था, जिसे बांके बिहारी कहा जाता है।

खासियत: इस मंदिर में भगवान की छवि को लगातार नहीं देखा जा सकता। भक्तों की भारी भीड़ के सामने हर कुछ मिनटों में एक पर्दा डाला जाता है ताकि ठाकुर जी को किसी की नजर न लगे।

3. श्रीनाथजी मंदिर (नाथद्वारा, राजस्थान)इतिहास और मान्यता: यह मंदिर भगवान कृष्ण के 7 वर्षीय बालक रूप (गोवर्धन उठाने वाले रूप) को समर्पित है। मूल रूप से यह मूर्ति गोवर्धन पर्वत (मथुरा) पर स्थापित थी। 17वीं शताब्दी में जब मुगल शासक औरंगजेब ने मंदिरों पर आक्रमण किया, तब इस मूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए राजस्थान लाया गया और नाथद्वारा में स्थापित किया गया।

खासियत: यहाँ भगवान को एक जीवित बालक की तरह रखा जाता है। उनके जागने, स्नान करने, भोजन (छप्पन भोग) और सोने के समय के अनुसार ही दर्शन होते हैं।

4. जगन्नाथ मंदिर (पुरी, ओडिशा)इतिहास और मान्यता: पुरी का जगन्नाथ मंदिर भी चार धामों में शामिल है। इसका निर्माण 12वीं शताब्दी में राजा अनंतवर्मन चोडगंग देव ने शुरू करवाया था। यहाँ भगवान कृष्ण अपने बड़े भाई बलराम और बहन सुभद्रा के साथ विराजमान हैं। यहाँ की मूर्तियां लकड़ी (नीम की लकड़ी) से बनी हैं, जिन्हें हर 12 या 19 साल में बदला जाता है।

खासियत: इस मंदिर की रसोई दुनिया की सबसे बड़ी रसोई मानी जाती है, जहाँ मिट्टी के बर्तनों में आज भी लकड़ी की आग पर महाप्रसाद तैयार किया जाता है।

5. गुरुवायूर मंदिर (गुरुवायूर, केरल)इतिहास और मान्यता: दक्षिण भारत के इस मंदिर को “भूलोक वैकुंठ” (धरती का वैकुंठ) कहा जाता है। मान्यता है कि यहाँ स्थापित मूर्ति स्वयं भगवान विष्णु ने ब्रह्मा जी को दी थी। द्वारका नगरी के डूबने के समय उद्धव जी ने देवगुरु बृहस्पति और वायु देव की मदद से इस मूर्ति को दक्षिण भारत के इस पवित्र स्थान पर स्थापित किया था।

खासियत: इस मंदिर में केवल पारंपरिक हिंदू वेशभूषा (जैसे पुरुषों के लिए मुंडू/धोती और महिलाओं के लिए साड़ी) पहनकर ही प्रवेश की अनुमति है।

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