- केंद्रीय एजेंसियों की रडार पर रवि उप्पल और शुभम सोनी
नई दिल्ली/रायपुर।महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप मामले के मुख्य प्रमोटर सौरभ चंद्राकर की गिरफ्तारी के बाद अब केंद्रीय जांच एजेंसियां (ED और CBI) सह-आरोपी रवि उप्पल और शुभम सोनी को शिकंजे में लेने के लिए पूरी ताकत लगा रही हैं। रायपुर की विशेष अदालत से आवश्यक कानूनी दस्तावेज और प्रत्यर्पण अनुरोध मिलने के बाद भारतीय अधिकारियों ने विदेशी सरकारों के साथ राजनयिक और कानूनी स्तर पर बातचीत तेज कर दी है। चूंकि यह मामला अंतरराष्ट्रीय संधियों और विदेशी अदालतों की प्रक्रियाओं से जुड़ा हुआ है, इसलिए इनकी रायपुर वापसी की कोई एक निश्चित तारीख तय करना फिलहाल संभव नहीं है, लेकिन एजेंसियां लगातार उनके ठिकानों की निगरानी कर रही हैं।
दुबई और अन्य देशों में चल रही कानूनी प्रक्रिया
जांच रिपोर्टों के अनुसार, रवि उप्पल को पहले दुबई में इंटरपोल के रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर हिरासत में लिया गया था। हालांकि बीच में उसके ठिकाने बदलने की खबरें भी आई थीं, लेकिन भारतीय एजेंसियां संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के अधिकारियों के माध्यम से उसके प्रत्यर्पण की प्रक्रिया को अंतिम रूप देने में जुटी हैं। दूसरी ओर, वीडियो जारी कर तत्कालीन राजनीतिज्ञों पर आरोप लगाने वाला शुभम सोनी भी वर्तमान में दुबई प्राधिकारियों की सख्त निगरानी में है। वहां उसके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग और स्थानीय कानूनों के उल्लंघन की जांच चल रही है, जिसके पूरे होते ही उसे भारत लाने का रास्ता साफ हो जाएगा।
मामले पर राजनीतिक घमासान और कांग्रेस के आरोप
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर छत्तीसगढ़ में राजनीतिक पारा काफी गर्म है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने एक प्रेसवार्ता के दौरान आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी ने महादेव सट्टा ऐप के मुद्दे का इस्तेमाल सिर्फ चुनाव में राजनीतिक लाभ लेने के लिए किया था। उन्होंने दावा किया कि चुनाव के समय मंत्री से लेकर प्रधानमंत्री तक इस मुद्दे पर मुखर थे, लेकिन चुनाव खत्म होते ही कार्रवाई ठप पड़ गई थी। बैज का यह भी कहना है कि महादेव ऐप के खिलाफ असली कार्रवाई कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान ही शुरू की गई थी, जिसके तहत दर्जनों एफआईआर दर्ज की गई थीं।
सरकार और जांच एजेंसियों का रुख
कांग्रेस के इन आरोपों के पलट, वर्तमान भाजपा सरकार और छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री विजय शर्मा ने स्पष्ट किया है कि मुख्य आरोपी सौरभ चंद्राकर को भारत लाना जांच एजेंसियों की एक बहुत बड़ी और ऐतिहासिक सफलता है। सरकार का कहना है कि चुनाव खत्म होने के बाद भी कार्रवाई रुकी नहीं है, बल्कि कानूनी प्रक्रियाएं अपने तय नियमों के अनुसार आगे बढ़ रही हैं। सीबीआई और ईडी की टीमें रायपुर से लेकर दिल्ली तक इस घोटाले से जुड़े हर एक पैसे और व्यक्ति की बारीकी से जांच कर रही हैं, और आने वाले दिनों में उप्पल और सोनी की गिरफ्तारी के साथ इस मामले में कई और बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।









