- सड़क चौड़ीकरण के बीच संकरा हुआ मार्ग, आमने-सामने आते भारी वाहन से दोपहिया चालकों की बढ़ती मुश्किलें
घनश्याम साव ।डोंगरगांव, 14 सितंबर।डोंगरगांव-अंबागढ़ चौकी मार्ग पर मोहड़ से गुंडरदेही (बांधा बाजार) के बीच चल रहे सड़क चौड़ीकरण कार्य ने वाहन चालकों की परेशानी बढ़ा दी है। सड़क के एक हिस्से में बिछाई गई गिट्टी पुराने सड़क स्तर से करीब एक फुट से अधिक ऊंची होने के कारण मार्ग का स्वरूप असमान हो गया है। वहीं दूसरी ओर का हिस्सा फिलहाल पूरी तरह तैयार नहीं होने से वाहनों के लिए उपलब्ध रास्ता संकरा हो गया है।*यह स्थिति खासकर दोपहिया वाहन चालकों के लिए गंभीर परेशानी और संभावित जोखिम का कारण बन रही है।
अंतरराज्यीय मार्ग होने के कारण इस सड़क पर छोटे वाहनों के साथ चारपहिया और भारी वाहनों का दबाव भी काफी अधिक रहता है। ऐसे में संकरे हिस्से में आमने-सामने वाहन आने पर दोपहिया चालकों को अपनी सुरक्षा को लेकर विशेष सावधानी बरतनी पड़ रही है।
सामने से भारी वाहन आते ही थम जाते हैं दोपहिया चालक
मोहड़ से गुंडरदेही के बीच सड़क की मौजूदा स्थिति में डोंगरगांव-राजनांदगांव की ओर से अंबागढ़ चौकी की तरफ जाने वाले वाहन चालकों को कई स्थानों पर संकरे मार्ग से होकर गुजरना पड़ रहा है।
सबसे ज्यादा परेशानी तब होती है जब सामने से अंबागढ़ चौकी की ओर से कोई चारपहिया या बड़ा वाहन आ जाता है। ऐसी स्थिति में दोपहिया वाहन चालक कई बार सड़क के किनारे सुरक्षित जगह तलाशकर अपना वाहन रोकने को मजबूर हो जाते हैं। सामने से आया वाहन निकल जाने के बाद ही वे दोबारा आगे बढ़ पाते हैं।
सवाल यह है कि जिस मार्ग पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में वाहन गुजरते हैं, वहां निर्माण कार्य के दौरान यातायात को सुरक्षित एवं व्यवस्थित रखने के लिए पर्याप्त व्यवस्था क्यों नहीं की गई है?
एक फुट से अधिक ऊंची गिट्टी, वाहन चालकों के लिए चुनौती
सड़क के एक हिस्से में डाली गई गिट्टी पुराने सड़क स्तर से काफी ऊंची होने के कारण वाहन चालकों को सड़क के दोनों हिस्सों के बीच ऊंचाई के अंतर का सामना करना पड़ रहा है। विशेषकर दोपहिया वाहन के लिए अचानक ऊंचाई या सड़क की सतह में बदलाव संतुलन बिगाड़ने वाला हो सकता है।
निर्माणाधीन सड़क पर इस तरह के ऊंचाई अंतर वाले हिस्से को स्पष्ट रूप से चिह्नित करना और वाहन चालकों को पहले से चेतावनी देना यातायात सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। यदि यह व्यवस्था पर्याप्त नहीं है तो संबंधित निर्माण एजेंसी और निगरानी अधिकारियों की जिम्मेदारी पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
गिट्टी पर भारी वाहनों की आवाजाही, उड़ता धूल का गुबार
मोहड़ से गुंडरदेही के बीच सड़क पर डाली गई बजरी-गिट्टी से वाहन चालकों के सामने एक और बड़ी परेशानी खड़ी हो गई है। इस हिस्से में बड़े वाहनों की लगातार आवाजाही के कारण धूल के गुबार उड़ते हैं, जिसकी सबसे ज्यादा मार दोपहिया वाहन चालकों को झेलनी पड़ रही है।
आगे या सामने से गुजर रहे भारी वाहन के पहियों से उठने वाली धूल कई बार पूरे मार्ग पर फैल जाती है। इससे दोपहिया वाहन चालकों की दृश्यता प्रभावित होने के साथ ही धूल के बारीक कण आंखों में घुसने से परेशानी होती है। हेलमेट अथवा चश्मा पहनने के बावजूद अचानक उठने वाले धूल के गुबार से वाहन चलाना मुश्किल हो जाता है।
विशेषकर जब पीछे से कोई बड़ा वाहन निकलता है तो धूल का गुबार कुछ समय के लिए दोपहिया चालक के सामने की सड़क को ढंक देता है। ऐसे में सड़क पहले से ही संकरी और असमान हो, तो धूल की समस्या यातायात जोखिम को और बढ़ा देती है।
पानी के छिड़काव की व्यवस्था पर सवाल
निर्माणाधीन सड़क पर धूल नियंत्रण के लिए नियमित रूप से पानी का छिड़काव किया जाना आवश्यक है, लेकिन स्थानीय स्तर पर पानी के छिड़काव की व्यवस्था पर्याप्त और नियमित नहीं होने की शिकायत सामने आ रही है।
यदि निर्माण एजेंसी द्वारा निर्धारित अंतराल पर पानी का छिड़काव किया जाए तो गिट्टी और निर्माण कार्य के कारण उड़ने वाली धूल को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। लेकिन मौके पर धूल उड़ने की स्थिति यह सवाल खड़ा करती है कि धूल नियंत्रण के लिए जिम्मेदार व्यवस्था आखिर कितनी प्रभावी है?
सड़क निर्माण के दौरान केवल सड़क तैयार करना ही पर्याप्त नहीं है। निर्माण अवधि में वाहन चालकों की सुरक्षा, धूल नियंत्रण और आसपास के वातावरण को ध्यान में रखना भी आवश्यक है।
सड़क पर गिट्टी डालकर विकास का रास्ता तो बनाया जा रहा है, लेकिन उड़ती धूल में वाहन चालकों को रास्ता दिखाई दे, इसकी चिंता कौन करेगा?
रात में बढ़ जाता है खतरा
दिन में वाहन चालक किसी तरह सड़क की स्थिति देखकर अपना रास्ता निकाल लेते हैं, लेकिन रात के समय यही स्थिति अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाती है।
कम रोशनी में सड़क की वास्तविक चौड़ाई, गिट्टी की ऊंचाई और सामने से आने वाले वाहन की स्थिति का अनुमान लगाना मुश्किल हो सकता है। यदि ऐसे स्थान पर पर्याप्त चेतावनी संकेत, रिफ्लेक्टर, बैरिकेड अथवा अन्य दृश्य सुरक्षा व्यवस्था नहीं हो तो दुर्घटना की आशंका बढ़ सकती है।
दोपहिया वाहन चालकों के लिए समस्या और गंभीर इसलिए है क्योंकि भारी वाहन के सामने आने पर उनके पास सुरक्षित रूप से निकलने की जगह सीमित हो जाती है।
दूसरी ओर डाली गई गिट्टी भी बदहाल..
मोहड़ से गुंडरदेही के बीच सड़क के दूसरे हिस्से में डाली गई गिट्टी भी लगातार बरसात और वाहनों की आवाजाही के कारण कई जगह उखड़ गई है। इससे जगह-जगह गड्ढे और असमान सतह दिखाई देने की स्थिति बन गई है।
एक ओर ऊंचाई का अंतर और दूसरी ओर उखड़ी हुई गिट्टी—इन दोनों के बीच वाहन चालकों को मार्ग तलाशना पड़ रहा है। भारी वाहनों के लिए भी यह परेशानी का कारण है, जबकि दोपहिया वाहन चालकों के लिए संतुलन बनाए रखना और भी कठिन हो जाता है।
विकास कार्य जरूरी, लेकिन सुरक्षा से समझौता क्यों?
सड़क चौड़ीकरण का कार्य क्षेत्र के विकास और बेहतर आवागमन के लिए जरूरी है। निर्माण कार्य के दौरान अस्थायी परेशानी होना भी स्वाभाविक है। लेकिन सवाल यह है कि निर्माण के दौरान नागरिकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है?
करोड़ों रुपये की लागत से बनने वाले मार्ग पर निर्माण एजेंसी को कार्य की सुविधा के साथ-साथ यातायात सुरक्षा का भी ध्यान रखना होगा। वाहन चालकों को यह स्पष्ट होना चाहिए कि कहां सड़क का स्तर बदला है, कहां मार्ग संकरा है और कहां उन्हें सावधानी से गुजरना है।
अधिकारी गुजरते हैं, फिर समस्या दिखाई क्यों नहीं देती?
इस मार्ग पर विभागीय और प्रशासनिक अधिकारियों का भी नियमित आवागमन रहता है। इसके बावजूद यदि सड़क के इस हिस्से में वाहन चालकों की परेशानी बनी हुई है तो यह स्थल निरीक्षण और निर्माण कार्य की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है।
क्या संबंधित अधिकारियों ने मौके पर जाकर सड़क की ऊंचाई, मार्ग की उपलब्ध चौड़ाई और भारी वाहनों के आवागमन की वास्तविक स्थिति का परीक्षण किया है? यदि किया है तो दोपहिया वाहन चालकों की सुरक्षा के लिए क्या तत्काल उपाय किए गए?
हादसे के बाद जागेगा विभाग या पहले होगी व्यवस्था?
मोहड़-गुंडरदेही के बीच मौजूदा स्थिति में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रशासन किसी दुर्घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था सुधारने का इंतजार कर रहा है?
निर्माणाधीन सड़क पर वाहन चालकों को असुरक्षित स्थिति में डालकर विकास कार्य को आगे बढ़ाना उचित नहीं माना जा सकता। संबंधित विभाग और निर्माण एजेंसी को तत्काल मौके का निरीक्षण कर सड़क के ऊंचाई वाले हिस्से को सुरक्षित रूप से व्यवस्थित करने, मार्ग को यथासंभव सुगम बनाने तथा पर्याप्त चेतावनी संकेतक, रिफ्लेक्टर, बैरिकेडिंग और रात्रिकालीन सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए।
728.65 करोड़ रुपये की सड़क परियोजना का उद्देश्य बेहतर और सुरक्षित आवागमन है। यदि निर्माण के दौरान ही वाहन चालक सुरक्षित रास्ते के लिए सड़क किनारे रुकने को मजबूर हों और धूल के गुबार के बीच सफर करना पड़े, तो यह सवाल उठना लाजिमी है कि निर्माण की गति के साथ-साथ यातायात सुरक्षा की निगरानी आखिर किस स्तर पर हो रही है?








