राजनांदगांव।राजनांदगांव रियासत के पूर्व शासक राजा महंत दिग्विजय दास की जयंती के अवसर पर शहर में उन्हें श्रद्धापूर्वक याद किया गया। इस अवसर पर शासकीय दिग्विजय महाविद्यालय में संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों और विद्यार्थियों ने भाग लेकर उनके योगदान को याद किया।
संस्कारधानी राजनांदगांव मे स्व राजा दिग्विजय दास की जयंति आज शासकीय दिग्विजय महाविद्यालय मे एक संगोष्ठी कार्यक्रम आयोजित कर श्रध्दापूर्वक मनाया गया ।संगोष्ठी कार्यक्रम मे महापौर मधुसुदन यादव राजगामी सम्पदा न्यास के नवनियुक्त अध्यक्ष पूर्णिमासाहू कालेज के प्राचार्य सहित बैरांगी वंश के लोग उपस्थित थे।
इस अवसर पर वक्ताओ ने राजा दिग्विजय दास के जीवन, व्यक्तित्व और उनके द्वारा राजनांदगांव के विकास में किए गए ऐतिहासिक कार्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि राजा दिग्विजय दास केवल एक शासक ही नहीं बल्कि दूरदर्शी समाजसेवी भी थे, जिन्होंने शिक्षा और नगर विकास को प्राथमिकता दी। महापौर मधुसुदन यादव ने कहा कि आजादी से पहले उन्होंने शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए अपने ही महल को महाविद्यालय के रूप में समर्पित कर दिया जो कि आज शिक्षा का प्रमुख केंद्र है।
इसके अलावा उनके प्रयासों से उस समय राजनांदगांव में बिजली व्यवस्था, वाटर फिल्टर प्लांट जैसी आधुनिक सुविधाओं की शुरुआत हुई। साथ ही बंगाल नागपुर कॉटन मिल की स्थापना और रेलवे के लिए भूमि उपलब्ध कराना भी उनके महत्वपूर्ण योगदानों में शामिल रहा।
महापौर ने यह भी बताया कि उनकी विशाल संपत्ति के संरक्षण और प्रबंधन के लिए शासन द्वारा राजगामी ट्रस्ट की स्थापना की गई है, जिसके अंतर्गत रियासत कालीन हजारों एकड़ भूमि और अन्य संपत्तियों का रखरखाव किया जा रहा है।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने राजा महंत दिग्विजय दास को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके आदर्शों को अपनाने का संकल्प लिया।





