राजनांदगांव: संस्कारधानी के गणेश मंदिर से जुड़ा अनोखा इतिहास, हाथी की समाधि से शुरू हुई मंदिर की कहानी

विश्वनाथ देवांगन ,राजनांदगांव। संस्कारधानी राजनांदगांव में वैसे तो भगवान गणेश के कई मंदिर हैं, लेकिन शहर के मिथिलाधाम स्थित गणेश मंदिर की कहानी अपने आप में बेहद अनोखी और आस्था से जुड़ी हुई है। करीब चार दशक से यह मंदिर श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है, लेकिन इस मंदिर की स्थापना के पीछे एक ऐसी कहानी है, जिसे जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे।

बताया जाता है कि इस मंदिर की स्थापना वर्ष 1988 में हुई थी, लेकिन इसकी कहानी वर्ष 1985 की एक घटना से शुरू होती है। उस समय साधुओं का एक जत्था यहां आया था और उनके साथ एक हाथी भी था। साधुओं का यह जत्था कुछ समय के लिए इसी स्थान पर ठहरा। इसी दौरान हाथी की मृत्यु हो गई।

इसके बाद साधुओं ने हाथी को सम्मान के साथ उसी स्थान पर दफनाया, जहां आज मिथिलाधाम का यह गणेश मंदिर मौजूद है। कहा जाता है कि हाथी की स्मृति और उसके प्रति सम्मान को बनाए रखने के उद्देश्य से साधुओं ने इसी स्थान पर भगवान गणेश का मंदिर बनाने का विचार रखा। इसके बाद यहां मंदिर निर्माण की प्रक्रिया शुरू हुई और वर्ष 1988 में भगवान गणेश का मंदिर स्थापित किया गया।

आज करीब चार दशक बाद यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि इसके साथ जुड़ा यह इतिहास भी लोगों के लिए कौतूहल और श्रद्धा का विषय बना हुआ है। गणेश उत्सव के दौरान यहां श्रद्धालुओं की विशेष भीड़ देखने को मिलती है और लोग भगवान गणेश के दर्शन के साथ इस स्थान से जुड़ी पुरानी कहानी को भी जानने की कोशिश करते हैं।

संस्कारधानी के इस गणेश मंदिर की खासियत सिर्फ इसकी भव्यता या धार्मिक महत्व नहीं, बल्कि इसके पीछे छिपी वह कहानी है, जो एक हाथी की स्मृति, साधुओं की आस्था और भगवान गणेश के प्रति श्रद्धा से जुड़ी हुई है।

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