छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर का प्रसिद्ध और ऐतिहासिक तेलीबांधा चौक इस समय एक बड़े सामाजिक और राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में इस चौक का नाम बदलकर ‘सेवा ज्योति संकल्प चौक’ के रूप में विकसित करने की घोषणा के बाद से ही पूरे प्रदेश का साहू (तेली) समाज आक्रोशित हो उठा है। समाज का साफ तौर पर कहना है कि तेलीबांधा सिर्फ एक सड़क या चौराहे का नाम नहीं है, बल्कि यह सैकड़ों साल पुराना वह गौरवशाली इतिहास है जो साहू समाज की आस्था, पहचान और उनके पुरखों के स्वाभिमान से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है। समाज के नेताओं और आम लोगों में सरकार के इस फैसले को लेकर भारी गुस्सा देखा जा रहा है और उनका कहना है कि अपने पूर्वजों की अमूल्य विरासत और पहचान के साथ किया जाने वाला कोई भी अन्याय किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
तेलीबांधा का इतिहास
इस चौक और इससे जुड़े तेलीबांधा तालाब का इतिहास बेहद पुराना और छत्तीसगढ़ की सामाजिक समरसता का प्रतीक है। इतिहासकारों और स्थानीय दस्तावेजों के अनुसार, इस विशाल बांध (तालाब) का निर्माण साल 1835 के आसपास साहू समाज के प्रतिष्ठित पूर्वज दीनानाथ साव और उनके सुपुत्र शोभाराम साव (कुछ संदर्भों में श्री जगन्नाथ साव) द्वारा जन-कल्याण के उद्देश्य से कराया गया था। साव परिवार द्वारा बनवाए गए इस ऐतिहासिक बांध और पचरियों के कारण ही इस पूरे क्षेत्र का नाम ‘तेलीबांधा’ पड़ा, जो आज रायपुर की पहचान और शान बन चुका है। साहू समाज के पूर्वजों ने अपनी सैकड़ों एकड़ की निजी और पैतृक भूमि को जनहित में दान कर इस धरोहर को सींचा था, यही वजह है कि समाज के लोग इसे अपनी रगों में बसने वाला स्वाभिमान और पुरखों की सबसे बड़ी निशानी मानते हैं। आधुनिक समय में भले ही इसे मरीन ड्राइव के नाम से पुकारा जाने लगा हो, लेकिन स्थानीय लोग और साहू समाज हमेशा से इसकी मूल पहचान ‘तेलीबांधा’ को अक्षुण्ण रखने के लिए संघर्ष करते रहे हैं।
साहू समाज का तीखा आक्रोश और चेतावनी
इस घोषणा के सामने आते ही छत्तीसगढ़ का सबसे प्रभावशाली साहू समाज लामबंद हो गया. छत्तीसगढ़ प्रदेश साहू संघ और समाज के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने इस फैसले का पुरजोर विरोध करते हुए इसे समाज के इतिहास पर चोट बताया. समाज के नेताओं का कहना है कि तेलीबांधा चौक का इतिहास 100 साल से भी ज्यादा पुराना है और यह सिर्फ एक साधारण चौराहा नहीं है. यह साहू समाज की आस्था, गौरवशाली इतिहास, पहचान और उनके पुरखों के स्वाभिमान का प्रतीक है. मुख्यमंत्री को सीधे शब्दों में चेतावनी देते हुए समाज की ओर से कहा गया कि वे अपने घर की छत पर चाहे जिसका झंडा लगा लें, लेकिन तेलीबांधा की पहचान मिटाने की कोशिश की तो समाज इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगा और समय रहते जनभावनाओं के इस गुस्से को पढ़ लिया जाए।
सियासी घमासान और अपनों के अलग सुर
इस संवेदनशील मुद्दे पर छत्तीसगढ़ में भारी राजनीतिक घमासान मच गया है. पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता धनेंद्र साहू समेत पूरे विपक्ष ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरा और इसे एक बड़े समाज का अपमान बताया. दिलचस्प बात यह है कि इस नामकरण विवाद पर खुद सत्तारूढ़ भाजपा के भीतर से भी अलग-अलग सुर उठने लगे हैं, क्योंकि कोई भी राजनीतिक दल इतने बड़े वोट बैंक वाले समाज की नाराजगी मोल नहीं लेना चाहता।






