जियाउल खान ,लखनपुर सरगुजा
- खबर प्रकाशित होने के बाद खाद्य निरीक्षक पहुंचे गांव, 20-20 किलो राशन उपलब्ध कराया; जनपद सीईओ और खाद्य निरीक्षक के बयानों में विरोधाभास
लखनपुर। सरगुजा जिले के लखनपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत चांदो के आश्रित ग्राम घंटा डुग्गू में पहाड़ी कोरवा परिवारों को राशन कार्ड के अभाव में खाद्यान्न नहीं मिलने का मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक महकमे में हलचल मच गई। खबर प्रकाशित होने के बाद खाद्य विभाग हरकत में आया और खाद्य निरीक्षक सतपाल सिंह गांव पहुंचे। उन्होंने प्रभावित परिवारों को तत्काल 20-20 किलो राशन उपलब्ध कराने की व्यवस्था की।
- पीड़ित परिवारों का पक्ष: पहाड़ी कोरवा परिवारों की शिकायत है कि राशन कार्ड नहीं होने के कारण उन्हें सरकारी खाद्यान्न का लाभ नहीं मिल पा रहा है। परिवारों को बाजार से खाद्यान्न खरीदकर जीवनयापन करना पड़ रहा है। ऐसे में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के सामने भोजन की व्यवस्था करना भी चुनौती बना हुआ है।
- खाद्य निरीक्षक सतपाल सिंह का पक्ष: खाद्य निरीक्षक सतपाल सिंह के नेतृत्व में विभागीय टीम मौके पर पहुंची। जांच के दौरान प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत देने के लिए 20-20 किलो राशन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।
- जनपद सीईओ खुशबू शास्त्री का पक्ष: जनपद पंचायत सीईओ खुशबू शास्त्री की ओर से बताया गया कि विशेष पिछड़ी जनजाति के परिवारों को नियमित रूप से राशन मिल रहा है। जांच में सभी के पास राशन कार्ड होने की बात भी सामने रखी गई। उनके अनुसार शिकायत में लगाए गए आरोप सही नहीं हैं।
- बयानों में विरोधाभास, आखिर सच्चाई क्या?
एक तरफ पहाड़ी कोरवा परिवार राशन कार्ड नहीं होने और खाद्यान्न नहीं मिलने की परेशानी बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक पक्ष नियमित राशन वितरण और सभी के पास राशन कार्ड होने का दावा कर रहा है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि सभी पात्र परिवारों को नियमित राशन मिल रहा था, तो शिकायत और खबर प्रकाशित होने के बाद खाद्य निरीक्षक को मौके पर जाकर 20-20 किलो राशन उपलब्ध कराने की आवश्यकता क्यों पड़ी?
- स्थायी समाधान जरूरी
विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा परिवारों को केवल तत्काल राहत देना पर्याप्त नहीं है। प्रशासन को पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि प्रत्येक पात्र परिवार को नियमित रूप से खाद्यान्न मिले। साथ ही राशन कार्ड से संबंधित किसी भी प्रकार की समस्या का स्थायी निराकरण किया जाए, ताकि भविष्य में किसी परिवार को भोजन जैसी बुनियादी जरूरत के लिए परेशान न होना पड़े।
अब देखने वाली बात होगी कि प्रशासन इस मामले में केवल 20 किलो राशन देकर अपनी जिम्मेदारी पूरी मानता है या फिर पहाड़ी कोरवा परिवारों को नियमित खाद्यान्न उपलब्ध कराने की स्थायी व्यवस्था भी सुनिश्चित करता है।







