लोरमी तहसील में राजस्व कामकाज ठप, स्टाफ की कमी से किसान परेशान, अधिवक्ता संघ ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

संदीप यादव लोरमी / मुंगेली। लोरमी तहसील कार्यालय में स्थायी लिपिक और बाबुओं की कमी के चलते राजस्व न्यायालय का काम पूरी तरह चरमरा गया है। पिछले एक महीने से पेशी नहीं हो रही, फाइलें आगे नहीं बढ़ रही, किसानों को तारीख तक नहीं मिल रही है।

दरअसल तहसील का काम चलाने के लिए शिक्षा विभाग के शिक्षकों और लिपिकों को अटैच किया गया था, लेकिन शिक्षा विभाग के आदेश के बाद सभी संलग्न कर्मचारियों को वापस उनके मूल स्कूलों में भेज दिया गया है। नतीजा यह हुआ कि तहसील में न तो शिक्षक-लिपिक आ रहे हैं और न ही स्कूल में ठीक से ड्यूटी कर रहे हैं। इससे स्कूल की पढ़ाई और तहसील का काम दोनों प्रभावित हो रहा है।

पक्षकारों को लौटाया जा रहा

अधिवक्ता संघ का कहना है कि जो शिक्षक-लिपिक अब भी तहसील आते हैं, वे स्कूल में हाजिरी लगाकर आते हैं और यहां कोई कार्रवाई नहीं करते। न्यायालय में कोई पक्षकार अपने केस की जानकारी लेने आता है तो कह दिया जाता है कि हम कार्य नहीं कर रहे हैं। अगली पेशी की तारीख तक नहीं दी जा रही है। अधिवक्ताओं ने सवाल उठाया कि जब काम ही नहीं करना तो तहसील आने की जरूरत क्या है।

इस गंभीर समस्या को लेकर अधिवक्ता संघ अध्यक्ष संजय त्रिपाठी के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल कलेक्टर मुंगेली से मिला और ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में बताया गया कि लंबे समय से न्यायालयीन प्रकरण लंबित हैं, जिससे अधिवक्ता, पक्षकार और आम जनता सभी परेशान हैं। संघ ने लोरमी में स्थायी रूप से रीडर की व्यवस्था करने और तत्काल नियमित रूप से प्रकरणों की सुनवाई शुरू कराने की मांग की है।

ज्ञापन सौंपने वालों में संजय त्रिपाठी, सुरेश क्षत्रिय, जितेंद्र सिंह, भुवनेश्वर कश्यप, किशन देवांगन, महेंद्र सिंह, अजय तिवारी, रामेश्वर कुलमित्र, लुकचंद्र घृतलहरे सहित अन्य अधिवक्ता शामिल थे।

लोरमी में उपकोषालय और अधिवक्ता भवन की मांग

अधिवक्ता संघ ने कलेक्टर को बताया कि 1982 में तहसील और 1984 में अनुविभाग कार्यालय बना था, उसके बाद 25 साल बाद न्यायालय खुला, लेकिन तब से कोई नया सरकारी कार्यालय नहीं खुला। उपकोषालय नहीं होने से लोगों को टिकट के लिए मुंगेली जाना पड़ता है, जिसमें ज्यादा समय लगता है। इस मांग को लेकर 2018 से आवेदन दिया जा रहा है।

इसके साथ ही अधिवक्ताओं के बैठने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। टीन टपरी और खुले में बैठने को मजबूर हैं। रोजाना 300 से 500 लोगों का आना-जाना होता है। इसलिए संघ ने सामुदायिक भवन निर्माण के लिए 50 लाख रुपये स्वीकृत करने की मांग भी कलेक्टर से की है।

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