रायपुर।छत्तीसगढ़ के लगभग 85,000 सेवारत शिक्षकों के लिए राज्य सरकार द्वारा विभागीय TET (Departmental TET) का रास्ता साफ किए जाने के बाद से ही इसके परीक्षा पैटर्न और पासिंग मार्क्स को लेकर चर्चाएं गर्म हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद प्रमोशन और वेतन वृद्धि के लिए आवश्यक की गई इस परीक्षा में पासिंग मार्क्स को 33 प्रतिशत (यानी 100 में से 33 नंबर) करने की मांग शिक्षक संगठनों ने उठाई है। हालांकि, शासन स्तर पर अभी इस पर कोई मुहर नहीं लगी है।
आइए जानते हैं कि शिक्षकों की इस मांग का आधार क्या है और अन्य राज्यों में इस प्रकार की पात्रता या विभागीय परीक्षाओं के क्या नियम हैं।अन्य राज्यों के अनुभव: पात्रता और विभागीय परीक्षाओं का आधारयदि हम देश के अन्य राज्यों के पात्रता मानकों और सीमित परीक्षाओं को देखें, तो नियमों में विविधता दिखाई देती है:
- बिहार (सक्षमता परीक्षा का मॉडल): बिहार में नियोजित शिक्षकों को ‘राज्य कर्मी’ का दर्जा देने के लिए ली गई “सक्षमता परीक्षा” में सरकार ने अंकों में काफी छूट दी थी। वहां सामान्य वर्ग के लिए 40%, पिछड़ा वर्ग के लिए 36.5% और अत्यंत पिछड़ा वर्ग के लिए 34% तथा SC/ST व महिलाओं के लिए न्यूनतम 32% अंक पासिंग मार्क्स तय किए गए थे। इस आधार पर छत्तीसगढ़ के शिक्षक भी राहत की उम्मीद कर रहे हैं।
- उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश (सामान्य TET): UPTET और MP TET जैसी सीधी परीक्षाओं में केंद्र के CTET नियमों का कड़ाई से पालन किया जाता है, जहां न्यूनतम अंक 60% (सामान्य) और 55% (आरक्षित वर्ग) होते हैं। हालांकि, मध्य प्रदेश में कुछ विशेष प्राथमिक शिक्षक परीक्षाओं में आरक्षित वर्गों को 50% (75 अंक) तक की छूट मिलती है।
- सीमित विभागीय प्रतियोगी परीक्षाएं (LDCE): देश के कई राज्यों में जब प्रशासनिक या शैक्षणिक विभागों में प्रमोशन के लिए विभागीय सीमित परीक्षा (LDCE) होती है, तो वहां क्वालीफाइंग मार्क्स आमतौर पर 33% से 40% के बीच ही रखे जाते हैं, ताकि अनुभवी कर्मचारियों को पदोन्नति का अवसर मिल सके
- शिक्षकों की मांग: छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन का कहना है कि यह परीक्षा सीधे तौर पर भर्ती के लिए नहीं, बल्कि उन शिक्षकों के लिए है जो पहले से सेवा में हैं और वर्षों का अनुभव रखते हैं। सामान्य TET का स्तर किताबी और अत्यधिक कठिन होता है, जबकि विभागीय परीक्षा शिक्षकों के व्यावहारिक अनुभव पर आधारित होनी चाहिए। चूंकि 100 अंकों के ऑब्जेक्टिव प्रश्न पूछे जाने का प्रस्ताव है, इसलिए सेवारत शिक्षकों की उम्र और कार्यदबाव को देखते हुए न्यूनतम पात्रता अंक 33% रखने का प्रस्ताव संघों द्वारा भेजा गया था।
- क्या 33 नंबर का नियम लागू होना संभव है?
- विशेषज्ञों के अनुसार, चूंकि यह परीक्षा स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा सेवारत शिक्षकों के सेवा-मूल्यांकन और सुप्रीम कोर्ट के नियमों की औपचारिकता पूरी करने के लिए ली जा रही है, इसलिए सरकार नियमों में ढील दे सकती है। लेकिन, शिक्षा का अधिकार (RTE) कानून और NCTE (राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद) के कड़े नियमों के कारण पासिंग मार्क्स को सीधे तौर पर 33% कर देना कानूनी रूप से पेचीदा हो सकता है, क्योंकि NCTE शिक्षक पात्रता के लिए न्यूनतम 50-60% अंकों की वकालत करता है।
- आधिकारिक गाइडलाइन का इंतजार
- छत्तीसगढ़ सरकार ने साल में तीन बार विभागीय TET आयोजित करने पर सैद्धांतिक सहमति तो दे दी है, लेकिन इसके अंकों के वर्गीकरण और सटीक कट-ऑफ को लेकर अभी आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी होना बाकी है। जब तक विभाग विस्तृत दिशा-निर्देश जारी नहीं करता, तब तक 33 नंबर पर पास होने का दावा केवल एक प्रस्ताव और मांग के रूप में ही देखा जाएगा।








