रवान बैरियर पर आंदोलन, मांगें पूरी होने तक धरना जारी रखने का ऐलान
बलौदाबाजार। छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर बारनवापारा वनांचल क्षेत्र की 21 ग्राम पंचायतों के ग्रामीणों ने अपनी मूलभूत समस्याओं को लेकर आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। सड़क, बिजली, जमीन का पट्टा सहित अन्य बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर ग्रामीणों ने रविवार से रवान बैरियर में अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है।
आंदोलन में 21 ग्राम पंचायतों के सरपंचों सहित बड़ी संख्या में महिला, पुरुष, युवा और बुजुर्ग शामिल हुए। आंदोलन की व्यापकता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई ग्रामीण अपने घरों में ताला लगाकर धरना स्थल पर पहुंचे। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा, बल्कि उनकी समस्याओं के समाधान के लिए शासन-प्रशासन को ठोस कार्ययोजना बनानी होगी।
ग्रामीणों का कहना है कि देश की आजादी के 79 वर्ष और छत्तीसगढ़ राज्य की स्थापना के 26 वर्ष बीतने के बाद भी बारनवापारा वनांचल के कई गांव बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। कहीं आवागमन के लिए सड़क नहीं है तो कहीं बिजली की सुविधा उपलब्ध नहीं है। वहीं, जमीन का पट्टा नहीं मिलने के कारण ग्रामीणों को अपने भूमि अधिकारों को लेकर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
आंदोलन के संचालन के लिए बनाई गई जिम्मेदारी
धरने को व्यवस्थित रूप से संचालित करने के लिए आंदोलनकारियों ने पदाधिकारियों और विभिन्न व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी तय की है। अनिरुद्ध दीवान को अध्यक्ष, राजकुमार दीवान, धरम रात्रे एवं भीष्म ठाकुर को उपाध्यक्ष तथा संतोष कुमार ठाकुर और संजीव ठाकुर को सचिव बनाया गया है। मंच व्यवस्था की जिम्मेदारी दीपक ठाकुर और हेमकुमार दीवान को सौंपी गई है।
दिनेश ठाकुर एवं माधव प्रसाद तिवारी मीडिया प्रभारी, प्रवीण साहू एवं उमाशंकर बरिहा जलपान व्यवस्था संभालेंगे। लक्ष्मीनारायण ठाकुर मार्गदर्शक और कीर्तन दीवान मंच संचालक होंगे। वहीं पुरुषोत्तम, अमरछवि यादव, सम्पत ठाकुर एवं भूपेन्द्र वारिक संरक्षक के रूप में सहयोग करेंगे।
सर्व आदिवासी समाज ने दिया समर्थन
ग्रामीणों के इस आंदोलन को सर्व आदिवासी समाज जिला इकाई बलौदाबाजार का भी समर्थन मिला है। समाज के प्रदेश उपाध्यक्ष कमलेश ध्रुव आंदोलन में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि बारनवापारा वनांचल की 21 ग्राम पंचायतों के लोगों की सड़क, बिजली और जमीन के पट्टे की मांग पूरी तरह जायज है। आजादी के इतने वर्षों बाद भी लोगों को बुनियादी सुविधाओं के लिए आंदोलन करना पड़े, यह चिंता का विषय है। शासन-प्रशासन को ग्रामीणों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र निराकरण करना चाहिए।
इस दौरान प्रदेश उपाध्यक्ष कमलेश ध्रुव, उपाध्यक्ष शिव गोंड, समाजसेवी दयाराम ध्रुव, जिला उपाध्यक्ष दाऊ शिव गोंड, सिद्धू सिंह, कृष्णा ध्रुव सहित समाज के अन्य पदाधिकारी और क्षेत्र के मुखिया उपस्थित रहे।
रविवार से शुरू हुए इस आंदोलन में 21 ग्राम पंचायतों के ग्रामीणों की बड़ी भागीदारी देखने को मिली। महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं ने एकजुट होकर अपनी मांगों को बुलंद किया। ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता और मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में प्रभावी पहल नहीं होती, तब तक उनका अनिश्चितकालीन धरना जारी रहेगा।







