सरगुजा विश्वविद्यालय की बदहाल व्यवस्था के खिलाफ छात्रों का बिगुल, गांधी चौक में NSUI की क्रमिक भूख हड़ताल शुरू

जियाउल खान (अंबिकापुर /सरगुजा) ।अंबिकापुर। जब शिक्षा व्यवस्था छात्रों की उम्मीदों पर खरी नहीं उतरती, तब विरोध की आवाज़ सड़कों तक पहुंचती है। कुछ ऐसा ही दृश्य रविवार को अंबिकापुर के गांधी चौक में देखने को मिला, जहां राष्ट्रीय छात्र संघ (NSUI) ने “सरगुजा विश्वविद्यालय बचाओ” अभियान के तहत क्रमिक भूख हड़ताल शुरू कर विश्वविद्यालय और राजीव गांधी शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय की अव्यवस्थाओं के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।

सुबह से ही गांधी चौक पर जुटे छात्र-छात्राओं के हाथों में तख्तियां थीं और जुबान पर एक ही मांग—”छात्र हितों से समझौता नहीं चलेगा।” आंदोलन में शामिल छात्र नेताओं ने आरोप लगाया कि वर्षों से विश्वविद्यालय में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी छात्रों की समस्याओं के प्रति गंभीर नहीं हैं।

NSUI के सरगुजा विश्वविद्यालय उपाध्यक्ष ज्ञान तिवारी ने कहा कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि हजारों विद्यार्थियों के भविष्य की रक्षा के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बार-बार ज्ञापन सौंपने और प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने के बावजूद समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, इसलिए अब छात्र शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक आंदोलन के लिए मजबूर हुए हैं।

छात्र संगठन ने विश्वविद्यालय और राजीव गांधी शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय से जुड़ी 12 प्रमुख मांगें शासन और प्रशासन के सामने रखी हैं। इनमें विश्वविद्यालय एवं कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए बस सुविधा शुरू करना, पीएचडी, माइग्रेशन, एटीकेटी और नामांकन की बढ़ी हुई फीस वापस लेना, परिसर में सीसीटीवी कैमरे और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करना, शुद्ध पेयजल एवं नए पानी की टंकियों की स्थापना, छात्राओं के लिए नए छात्रावास का निर्माण, ऑनलाइन डिग्री वितरण प्रणाली लागू करना, विश्वविद्यालय परिसर का सौंदर्यीकरण, रिक्त पदों पर नियुक्तियां, विश्वविद्यालय की अधिग्रहित भूमि से अतिक्रमण हटाना, विश्वविद्यालय के स्थायी भवन का निर्माण तथा राजीव गांधी शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के अनुरूप पर्याप्त पुस्तकें और अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराना प्रमुख हैं।

आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि यह केवल मांगों की सूची नहीं, बल्कि छात्रों के भविष्य से जुड़े ऐसे मुद्दे हैं जिनका समाधान लंबे समय से लंबित है। उनका कहना है कि यदि जल्द ही सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को जिलेभर में व्यापक रूप दिया जाएगा।

गांधी चौक पर शुरू हुई यह क्रमिक भूख हड़ताल अब केवल एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि सरगुजा अंचल के हजारों विद्यार्थियों की आवाज बनती दिखाई दे रही है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विश्वविद्यालय प्रशासन और शासन छात्रों की इन मांगों को कितनी गंभीरता से लेते हैं और समाधान की दिशा में क्या कदम उठाते हैं।

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