सूरजपुर दोहरा हत्याकांड: फास्ट ट्रैक कोर्ट ने पेश की नजीर, तीन मुख्य दरिंदों को फांसी और चौथे को ताउम्र जेल की सजा

  • अदालत ने इन्हें दोषी करार दिया था, तब भी मुख्य कातिल कुलदीप साहू के चेहरे पर कोई पछतावा नहीं था और वह जेल वैन में बैठते समय मुस्कुरा रहा था

सूरजपुर।छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित और पूरे प्रदेश को हिलाकर रख देने वाले सूरजपुर दोहरे हत्याकांड में विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट ने एक ऐतिहासिक और कड़ा फैसला सुनाया है। अदालत के विशेष न्यायाधीश आनंद प्रकाश वारियाल ने इस मामले को ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ यानी दुर्लभ से दुर्लभतम की श्रेणी में मानते हुए मुख्य साजिशकर्ता कुलदीप साहू, चंद्रकांत चौधरी उर्फ सीके और फूल सिंह उर्फ रिंकू को फांसी यानी मृत्युदंड की सजा से दंडित किया है। वहीं इस घिनौने अपराध में शामिल चौथे दोषी आर्यन विश्वकर्मा उर्फ गोल्डी को उसकी कम उम्र को ध्यान में रखते हुए मरते दम तक आजीवन कारावास भुगतने का आदेश दिया गया है। अदालत ने अपने निर्णय में अपराधियों के क्रूरतम आचरण पर बेहद तल्ख टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया कि कानून का खौफ खत्म करने वाली ऐसी अमानवीय मानसिकता को समाज में कभी भी बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है।

पुलिस से बदले की आग में रची गई थी रूह कंपा देने वाली साजिश

इस रोंगटे खड़े कर देने वाले हत्याकांड की पृष्ठभूमि पुलिस और मुख्य आरोपी के बीच पुराने विवाद और बदले की भावना से जुड़ी हुई थी। दरअसल, कुख्यात अपराधी कुलदीप साहू पर पहले से जिलाबदर की कार्रवाई चल रही थी और घटना वाले दिन उसने ड्यूटी पर तैनात एक अन्य आरक्षक पर खौलता हुआ तेल फेंक दिया था, जिसके बाद पुलिस उसकी सरगर्मी से तलाश कर रही थी। पुलिस की इस घेराबंदी से बौखलाकर और पुलिस विभाग को सबक सिखाने की नीयत से कुलदीप साहू ने अपने साथियों के साथ मिलकर स्थानीय कोतवाली में पदस्थ प्रधान आरक्षक के घर को निशाना बनाया। अपराधियों ने १३ अक्टूबर २०२४ की खौफनाक रात को प्रधान आरक्षक की अनुपस्थिति में उनके सूने घर पर धावा बोल दिया था। दरिंदों ने घर के भीतर घुसकर निर्दोष महिला और उनकी मात्र ११ वर्ष की मासूम नाबालिग बेटी पर तलवार और चाकू से ताबड़तोड़ कई वार किए और उनकी नृशंस हत्या कर दी। हैवानियत की हदें पार करते हुए आरोपी दोनों मां-बेटी के शवों को अपनी कार में लादकर ले गए और घर से करीब पांच किलोमीटर दूर एक खेत में निर्वस्त्र हालत में फेंककर फरार हो गए।

जनाक्रोश के बाद हटाए गए थे एसपी, कोर्ट रूम में भी मुस्कुरा रहा था मुख्य कातिल

अगले दिन सुबह जब मां-बेटी के लहूलुहान शव बरामद हुए, तो पूरा सूरजपुर जिला उबल पड़ा था और आक्रोशित जनता सड़कों पर उतर आई थी। उग्र भीड़ ने मुख्य आरोपी कुलदीप साहू के घर और गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया था, जिसके बाद बिगड़ती कानून-व्यवस्था को देखते हुए राज्य सरकार को तत्काल प्रभाव से तत्कालीन एसपी को पद से हटाना पड़ा था। पुलिस प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए घेराबंदी कर चारों आरोपियों को गिरफ्तार किया था। इस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इसे फास्ट ट्रैक कोर्ट में ट्रांसफर किया गया, जहां महज दो साल के भीतर ३३ से अधिक गवाहों और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर गुनाह साबित हुआ। इस पूरे घटनाक्रम में हैरान करने वाली बात यह भी रही कि जब कुछ दिन पहले अदालत ने इन्हें दोषी करार दिया था, तब भी मुख्य कातिल कुलदीप साहू के चेहरे पर कोई पछतावा नहीं था और वह जेल वैन में बैठते समय मुस्कुरा रहा था।

फैसला सुनकर फफक पड़े प्रधान आरक्षक, परिजनों ने पटाखे फोड़कर मनाया न्याय का जश्न

अदालत द्वारा अपराधियों को फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद दो साल से न्याय की आस में बैठे पीड़ित प्रधान आरक्षक कोर्ट परिसर में ही भावुक होकर रो पड़े। उन्होंने रुंधे गले से न्यायपालिका का आभार जताते हुए कहा कि आज उनकी मृत पत्नी और मासूम बेटी की आत्मा को सच्ची शांति मिली होगी। जैसे ही फांसी की खबर सूरजपुर में रहने वाले उनके घर और गांव तक पहुंची, तो परिजनों और स्थानीय ग्रामीणों की आंखें नम हो गईं और उन्होंने कोर्ट के इस कड़े फैसले की सराहना की। पीड़ित परिवार के घर के बाहर लोगों ने पटाखे फोड़कर और मिठाई बांटकर न्याय का जश्न मनाया। पुलिस प्रशासन और अभियोजन पक्ष ने भी इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे कानून व्यवस्था की बड़ी जीत बताया है, जिससे अपराधियों के बीच एक कड़ा संदेश जाएगा।

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