- गजेन्द्र साहू।
और बताइए फ़िल्म कैसी लगी ?? बेहतरीन न !! क्यों ?? एक्टर की एक्टिंग के कारण या डायरेक्टर के डायरेक्शन के कारण या सिंगर के सिंगिंग के कारण या फिर राइटर के स्टोरी के कारण ?? कहा जाए तो सही जवाब सभी की जुगलबंदी के कारण !! पर फ़िल्म का एक महत्वपूर्ण हिस्सा जिसे अक्सर हम नज़रअंदाज़ कर देते हैं बल्कि जिसके बिना कोई फ़िल्म अच्छी नहीं लगेगी या ये कहें की उसके बिना फ़िल्म अधूरी है। मैं बात कर रहा हूँ वॉइस डबिंग आर्टिस्ट की, हाँ वही जो एक्टर को अपनी मनमोहक आवाज देते हैं।
जो व्यक्ति बोल नहीं सकते वे अपनी भावनाएं कितनी मुश्किल से आप तक पहुँचा पाते है। ठीक उसी तरह साउंड और वॉइस के बिना फ़िल्म दर्शकों का कितना मनोरंजन कर पाएँगी कभी सोचा है आपने ?? हाँ कुछ प्रयोग हुए हैं और वे हिट भी हुए पर क्या सभी फ़िल्म हिट हो सकती है ?? क्या आप बिना वॉइस के समझ पाएंगे ?? क्या आप जान पाएंगे कि आख़िर फ़िल्म की कहानी क्या है ??
वॉइस आर्टिस्ट पर्दे के पीछे के वे सितारे हैं जिनके बिना फ़िल्म इंडस्ट्री में कोई एक्टर चमकता सितारा नहीं बन सकता। वॉइस आर्टिस्ट की मेहनत का नतीजा ही है कि आप एक्टरों के पर्दे पर चल रहे हाव-भाव और भावनात्मक विचार को महसूस कर पाते हैं, उनसे जुड़ाव रख पातें हैं।
चलिए उदाहरण से समझते हैं कि वॉइस आर्टिस्ट्स की अहमियत और उनका होना क्यों आवश्यक है?? अभी हालही में आने वाली फ़िल्म “रामायण” में यश ने रावण का किरदार निभाया है क्यूँकि उनकी भाषायी शैली अलग है इसलिए उनकी आवाज अलग-अलग भाषाओं में अलग-अलग वॉइस आर्टिस्ट द्वारा डब की जा रही है। हिंदी में जब उनके किरदार की आवाज़ सुनी तब सभी ने कहा किरदार के अनुसार वह आवाज दमदार नहीं है। सोचिए हम वॉइस आर्टिस्ट क्या होता है यह नहीं जानते पर हमनें एक्टर के आवाज को लेकर प्रतिक्रिया दी। ठीक उसी तरह बाहुबली का किरदार जो एक दमदार और शानदार छवि छोड़ गया उसका मुख्य कारण है था कि प्रभास की आवाज बनने का काम शरद केलकर ने किया, जो स्वयं एक मंझे हुए कलाकार हैं।
हम एवेंजर के आयरन मैन से प्रेम भाव रखे या थानोस से नफ़रत का भाव रखते हैं इसका मुख्य कारण भी उनके दमदार किरदार, शानदार अभिनय के साथ-साथ उन्हें दी गई जोरदार आवाज भी है। क्या आप लोग जानते हैं सूर्यवंशम फ़िल्म में अमिताभ बच्चन की पत्नी (सास-बहू) दोनों ही अभिंत्रियाँ साउथ से हैं और दोनों की ही आवाज़ रेखा जी ने दी थी? सोचिए एक आवाज़ ने दो किरदार को आवाज़ दी पर आप यह बात नोम टिस नहीं कर पाए। शायद यही उनकी सबसे बड़ी स्किल है कि आप उन्हें जानते हुए भी उन्हें नहीं पहचान सकते।
जितने भी एक्टर है उन्हें भी वॉइस रिकॉर्ड वाली परीक्षाओं से गुज़रना पड़ता है और जिन्हें यह कार्य मुश्किल लगता है या वे अपनी ही आवाज़ देने में असमर्थ होते हैं उन्हें वॉइस आर्टिस्ट का ही सहारा लेना पड़ता है। शुरुआती दौर में श्रीदेवी, हेमा मालनी, कैटरीना, जेनेलिया, असिन और कई अन्य कलाकार अपनी आवाज़ नहीं दूसरों की आवाज से ही पहचानी गई। उस एक्टर की तरह हँसना, रोना, चिल्लाना, गाना, गुनगुना वह भी उसी वक़्त पर जब पर्दे पर सीन चल रहा हो, बेहद कठिन कार्य है। मतलब गलती की कोई गुंजाइश नहीं १ सेकंड का भी नहीं।
एक और स्ट्रगल वॉइस आर्टिस्ट अपने मन का खा-पी भी नहीं सकते। वे आइसक्रीम, चॉकलेट, ठंडी चीजें या किसी भी ऐसी चीज को नहीं खा सकते जिससे उनके गले में भार पड़े या गला ख़राब हो क्यूँकि यदि ऐसा हुआ तो आपका मनोरंजन ख़राब हो जाएगा। सोचिए इतना सोचते हैं वॉइस आर्टिस्ट आपके लिए। तो अगली बार जब भी फ़िल्म देखने जाएँ तो सभी की तारीफ़ करने के साथ-साथ वॉइस आर्टिस्ट को भी धन्यवाद बोलियेगा जिसके कारण आपने फ़िल्म को एंजॉय किया, क्यूँकि हर बार एक धन्यवाद और तारीफ़ करना रह जाता है।
ऊपर जिस शख़्सियत की तस्वीर साझा कर रहा हूँ वह पायल विशाल जी (वॉइस आर्टिस्ट) है। जो छत्तीसगढ़ के छोटे से गाँव से निकलकर आज सपनों के शहर मुंबई में अपनी खूबसूरत आवाज़ से वॉइस इंडस्ट्री में अलग पहचान बना चुकी है।








