107 पंचायतों के ग्रामीणों की भीड़, लेकिन सुविधाओं के नाम पर सन्नाटा! सरायपाली के एसडीएम-तहसील कार्यालय में मूलभूत सुविधाओं का टोटा

  • शौचालय है, लेकिन सदैव लटका रहता है ताला; पेयजल की व्यवस्था भी नहीं, महिलाओं सहित आगंतुक परेशान

राजकुमार अग्रवाल,सरायपाली। अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) सरायपाली एवं तहसीलदार कार्यालय में विभिन्न राजस्व एवं प्रशासनिक कार्यों के लिए प्रतिदिन बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं आम नागरिक पहुंचते हैं। सरायपाली तहसील क्षेत्र की 107 ग्राम पंचायतों से लोग अपने विभिन्न कार्यों को लेकर इन कार्यालयों में आते-जाते रहते हैं। प्रतिदिन सैकड़ों लोगों की आवाजाही के बावजूद यहां आम नागरिकों के लिए मूलभूत सुविधाओं का अभाव देखने को मिल रहा है।

 

सबसे बड़ी समस्या पेयजल एवं शौचालय की सुविधा को लेकर सामने आ रही है। कार्यालय परिसर में शौचालय उपलब्ध तो है, लेकिन उसमें अधिकांश समय ताला लटका रहने के कारण जरूरतमंद आगंतुक उसका उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

विशेषकर महिलाओं के लिए यह समस्या और गंभीर हो जाती है। ग्रामीण क्षेत्रों से महिलाएं राजस्व, प्रमाण पत्र, जमीन संबंधी दस्तावेज, नामांतरण, सीमांकन सहित विभिन्न कार्यों के लिए तहसील एवं एसडीएम कार्यालय पहुंचती हैं। घंटों कार्यालय में रुकने के दौरान शौचालय की सुविधा उपलब्ध नहीं होने से उन्हें असुविधा झेलनी पड़ती है और कई बार मजबूरी में कार्यालय परिसर से बाहर जाना पड़ता है।

कार्यालय में शौचालय का निर्माण होने के बावजूद यदि उस पर लगातार ताला लटका रहे तो यह सुविधा आम नागरिकों के लिए महज औपचारिकता बनकर रह जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि दूर-दराज से आने वाले लोगों के लिए शौचालय जैसी मूलभूत सुविधा का हर समय उपयोग योग्य होना जरूरी है। सफाई व्यवस्था के अभाव का समाधान ताला लगाना नहीं, बल्कि नियमित सफाई एवं रखरखाव सुनिश्चित करना होना चाहिए।

इसके अलावा कार्यालय परिसर में स्वच्छ पेयजल की समुचित व्यवस्था नहीं होने से भी ग्रामीणों को परेशानी उठानी पड़ रही है। कई लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ता है, ऐसे में पीने के पानी की व्यवस्था नहीं होना प्रशासनिक कार्यालय की सुविधाओं पर सवाल खड़े करता है।

सरायपाली तहसील क्षेत्र में कुल 107 ग्राम पंचायतें हैं। अलग-अलग गांवों से ग्रामीण अपने राजस्व एवं प्रशासनिक कार्यों के लिए एसडीएम और तहसील कार्यालय पहुंचते हैं। किसी को जमीन संबंधी कार्य के लिए आवेदन करना होता है तो कोई आय, जाति, निवास, सीमांकन, नामांतरण, बंटवारा सहित अन्य कार्यों को लेकर कार्यालय पहुंचता है।

दूरस्थ गांवों से आने वाले ग्रामीणों के लिए कार्यालय में घंटों इंतजार करना सामान्य बात है। ऐसे में पेयजल और उपयोग योग्य शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं का उपलब्ध होना बेहद आवश्यक है।

स्थानीय नागरिकों एवं ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि एसडीएम एवं तहसील कार्यालय परिसर में आगंतुकों की संख्या को ध्यान में रखते हुए शौचालय का ताला खुलवाकर उसे नियमित रूप से साफ-सुथरा एवं उपयोग योग्य रखा जाए। साथ ही स्वच्छ पेयजल की स्थायी व्यवस्था की जाए तथा महिलाओं, बुजुर्गों एवं बच्चों की सुविधा का विशेष ध्यान रखा जाए।

सरकारी कार्यालय आम जनता की सुविधा के लिए होते हैं। ऐसे में यहां आने वाले नागरिकों को सम्मानजनक एवं सुविधाजनक वातावरण उपलब्ध कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है। अब देखना होगा कि शौचालय उपलब्ध होने के बावजूद उस पर लगे ताले और पेयजल की समस्या को लेकर प्रशासन कब तक ठोस पहल करता है।

इस संबंध में जब अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) मनोज खांडे से दूरभाष के माध्यम से संपर्क कर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया।


 

कार्यालय परिसर में शौचालय की सुविधा उपलब्ध है, लेकिन सफाई की दिक्कत हैं। पेयजल की व्यवस्था भी जल्द ही कराई जाएगी।”

— श्रीधर पांडा

तहसीलदार, सरायपाली


 

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