रायपुर। छत्तीसगढ़ में शिक्षकों की सेवा सुरक्षा, TET और वेतन विसंगति से जुड़े मुद्दों को अब छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन का भी खुला समर्थन मिल गया है। फेडरेशन ने शिक्षक साझा मंच छत्तीसगढ़ की प्रमुख मांगों का प्रांतीय स्तर पर पूर्ण समर्थन करते हुए राज्य शासन से शिक्षकों के हित में जल्द सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की है।
फेडरेशन के प्रांतीय संयोजक कमल वर्मा की ओर से इस संबंध में विधिवत समर्थन पत्र जारी किया गया है। इसमें शिक्षक साझा मंच की प्रमुख मांगों को सरकार के समक्ष गंभीरता से विचार करने की मांग की गई है।
सेवारत शिक्षकों के लिए विशेष TET की मांग
फेडरेशन ने मांग की है कि अन्य राज्यों की तर्ज पर छत्तीसगढ़ में सेवारत शिक्षकों के लिए विशेष TET परीक्षा आयोजित की जाए। इसके साथ ही शिक्षकों की सेवा सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए वरिष्ठता के आधार पर पूर्व प्रचलित नियमों के अनुसार पदोन्नति प्रक्रिया पूरी करने की मांग की गई है।
फेडरेशन का कहना है कि लंबे समय से शासकीय सेवा में कार्यरत शिक्षकों को अपनी सेवा और पदोन्नति को लेकर अनिश्चितता का सामना नहीं करना चाहिए। सरकार को इस दिशा में स्पष्ट और सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए।
सहायक शिक्षकों की वेतन विसंगति दूर करने की मांग
कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन ने सहायक शिक्षकों की वेतन विसंगति दूर करने की मांग का भी समर्थन किया है। फेडरेशन ने कहा है कि यह मांग ‘मोदी की गारंटी’ में शामिल है, इसलिए सरकार को इस पर जल्द कार्रवाई करनी चाहिए।
इसके अलावा शिक्षक संवर्ग में नियुक्ति तिथि से पहले की सेवा अवधि की गणना करने की मांग भी उठाई गई है। फेडरेशन के अनुसार पूर्व सेवा अवधि को क्रमोन्नति, समयमान वेतनमान, पेंशन सहित अन्य सेवा लाभों में शामिल किया जाना चाहिए।
कमल वर्मा बोले- शिक्षकों के हितों की रक्षा जरूरी
फेडरेशन के प्रांतीय संयोजक कमल वर्मा ने कहा कि वर्षों से शासकीय सेवा में पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ काम कर रहे शिक्षकों के हितों की रक्षा करना जरूरी है। शिक्षकों को उनकी सेवा अवधि और वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति तथा अन्य सेवा लाभ मिलना न्यायसंगत है।
उन्होंने राज्य सरकार से शिक्षक साझा मंच की दोनों प्रमुख मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की।
फेडरेशन के समर्थन से शिक्षकों की मांगों को अब व्यापक कर्मचारी-अधिकारी समर्थन मिलने की स्थिति बन गई है। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार पर इन मुद्दों को लेकर निर्णय लेने का दबाव बढ़ सकता है।














