छत्तीसगढ़/कोरबा:- शहर क्षेत्र में करीब सात करोड़ रुपये की लागत से कराया जा रहा नहर मरम्मत एवं निर्माण कार्य पूरा होने से पहले ही सवालों के घेरे में आ गया है। मानसनगर नहर से सुनालिया पुल तक चल रहे कार्य के दौरान कई स्थानों पर नहर की संरचना क्षतिग्रस्त होने की स्थिति सामने आई है। बरसात के बीच नहर की दीवारों में दरारें पड़ने, कंक्रीट की परत टूटने और कुछ हिस्सों के नीचे की मिट्टी खिसकने से निर्माण की मजबूती को लेकर सवाल उठने लगे हैं।मौके से सामने आई तस्वीरों में नहर की दीवारों और कंक्रीट के विभिन्न हिस्सों में नुकसान दिखाई दे रहा है। कुछ जगह दीवार पर दरारें स्पष्ट नजर आ रही हैं, जबकि कहीं कंक्रीट की परत टूटकर अलग होती दिख रही है। नहर के ऊपरी हिस्से के आसपास मिट्टी का कटाव भी हुआ है। निर्माणाधीन संरचना की यह स्थिति ऐसे समय सामने आई है, जब काम अभी पूरा नहीं हुआ है। इससे यह सवाल महत्वपूर्ण हो गया है कि निर्माण के दौरान नहर के आधार और संरचना को बरसात में पानी के दबाव का सामना करने के लिए किस स्तर तक मजबूत तैयार किया गया है।नहर जैसी जल संरचना की मजबूती में आधार की मिट्टी, भराव, नींव, कंक्रीट की गुणवत्ता और पानी की निकासी की व्यवस्था की अहम भूमिका होती है। ऐसे में क्षतिग्रस्त हिस्सों की तकनीकी जांच के बिना यह तय करना संभव नहीं है कि नुकसान का कारण सामान्य बरसाती कटाव है या निर्माण से जुड़ी कोई कमी। यही वजह है कि पूरे मामले में केवल क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत करने के बजाय उनकी स्थिति का तकनीकी परीक्षण कर वास्तविक कारण सामने लाने की जरूरत बताई जा रही है।
बरसात के दौरान नहर में पानी का बहाव बढ़ने पर कमजोर हिस्सों पर दबाव और बढ़ सकता है। यदि किसी स्थान पर आधार की मिट्टी खिसकी है या संरचना पर्याप्त रूप से मजबूत नहीं है, तो आने वाले दिनों में नुकसान का दायरा बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में समय रहते विभागीय निरीक्षण होने पर संभावित बड़े नुकसान को रोका जा सकता है। जिसमें पहला भाग शून्य से सात किलोमीटर है। जिसमें सुधार के बाद फिर से दरार पड़ी है।स्थानीय स्तर पर मांग उठ रही है कि जल संसाधन विभाग के अधिकारी मौके का निरीक्षण कर निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच करें। नहर के क्षतिग्रस्त हिस्सों के साथ उन स्थानों की भी जांच की जाए, जहां फिलहाल नुकसान दिखाई नहीं दे रहा है। निर्माण में इस्तेमाल सामग्री की गुणवत्ता, कंक्रीट की मजबूती, आधार की स्थिति, मिट्टी के भराव और जल निकासी की व्यवस्था की जांच होने से कार्य की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
ठेकेदार की भूमिका भी जांच के दायरे में
जिस कंपनी को ठेका दिया गया है उसने अपना काम पेटी ठकेदारों को दे रखा है। नौसीखिए ठेकेदारों से काम कराने का परिणाम सामने आ रहा है। हालांकि, निर्माण की जिम्मेदारी किस स्तर पर तय है और कार्य के दौरान गुणवत्ता की निगरानी किस तरह की जा रही है, इस संबंध में विभाग की ओर से अभी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। इसलिए नहर के क्षतिग्रस्त हिस्सों की तकनीकी जांच के बाद ही निर्माण कार्य में किसी तरह की कमी और उसकी जिम्मेदारी की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
सुनालिया स्टेशन मार्ग तक बढ़ा मिट्टी का कटाव
करोड़ों रुपये की लागत से तैयार हो रही यह नहर शहर की जल व्यवस्था से जुड़ा महत्वपूर्ण निर्माण है। इसलिए निर्माण पूरा होने के बाद खामियां सामने आने का इंतजार करने के बजाय अभी तकनीकी परीक्षण और आवश्यक सुधार कराना जरूरी है।। फिलहाल नहर में दिखाई दे रही दरार और धंसाव मानस नगर तक ही सीमित नहीं है बल्कि सुनालिया पुल से रेलवे स्टेशन तक नहर का मिट्टी कटाव जारी है। नहर मार्ग का उपयोग रेलवे स्टेशन पहुंचने के लिए किया जाता है। मिट्टी कटाव की वजह पुल के रेलिंग वाल टूट कर गिर गए हैं। पाथ वे मेंं कई जगह से दरार पड़ गई है।
नहर के मरम्मत का कार्य अभी ठेकेदार के अधीनस्थ है। वर्षा की वजह से जिन स्थानों का स्लैब टूटा है उसे फिर सुधार कराया जाएगा। गुणवत्ता की भी जांच की जाएगी। सुनालिया आगे जर्जर नहर के लिए दो भाग में निविदा किया गया है। मानसून के बाद इसका भी कार्य शुरू किया जाएगा।
एसएन साय, मुख्य कार्यपालन अभियंता, जल संसाधन








