कृष्ण जन्म से लेकर महाभारत तक: कान्हा के जीवन की वे 5 अलौकिक घटनाएं जिन्होंने बदल दिया सृष्टि का नियम

सनातन धर्म में भगवान श्रीकृष्ण को विष्णु जी का पूर्ण अवतार माना गया है। उनके जीवन की कई ऐसी घटनाएं हैं जो पूरी तरह दिव्य और अलौकिक हैं। आज हम आपको कान्हा के जीवन से जुड़े उन 5 चमत्कारों के बारे में बताने जा रहे हैं, जो विज्ञान की सोच से भी परे हैं।

1. कारागार के ताले टूटना और यमुना का रास्ता देना

श्रीकृष्ण का जन्म मथुरा के राजा कंस के कारागार (जेल) में हुआ था। उनके जन्म लेते ही जेल के पहरेदार गहरी नींद में सो गए। भारी लोहे के दरवाजे और जंजीरें अपने आप खुल गईं। जब वासुदेव जी नवजात कृष्ण को टोकरी में रखकर उफनती हुई यमुना नदी पार कर रहे थे, तब कृष्ण के चरणों को स्पर्श करने के लिए यमुना का जलस्तर बढ़ने लगा। जैसे ही प्रभु के पैर छुए, नदी ने गोकुल जाने का सुरक्षित रास्ता दे दिया।

2. पूतना वध और मिट्टी में ब्रह्मांड के दर्शन

कंस द्वारा भेजी गई राक्षसी पूतना जब विषैला दूध पिलाकर बाल कृष्ण को मारना चाहती थी, तब प्रभु ने दूध के साथ-साथ उसके प्राण भी सोख लिए। इसी तरह गोकुल में जब कृष्ण ने मिट्टी खाई और माता यशोदा ने उनका मुंह खुलवाया, तो उन्हें बाल कन्हैया के छोटे से मुख के भीतर पूरे ब्रह्मांड, ग्रहों, नक्षत्रों और नदियों के दर्शन हो गए।

3. उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाना

इंद्र देव के अहंकार को तोड़ने और ब्रजवासियों को मूसलाधार बारिश से बचाने के लिए सात वर्ष के बालक कृष्ण ने विशाल गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली (कनिष्ठिका) पर उठा लिया था। उन्होंने लगातार सात दिनों तक पूरे ब्रज की रक्षा उस पर्वत की छत्रछाया में की थी।

4. कालिया नाग मर्दन

यमुना नदी के भीतर रहने वाले अत्यंत विषैले कालिया नाग के कारण नदी का पानी जहरीला हो चुका था। भगवान कृष्ण ने यमुना में छलांग लगाकर न केवल कालिया नाग का घमंड चूर किया, बल्कि उसके फन पर खड़े होकर अलौकिक नृत्य भी किया। बाद में उन्होंने कालिया नाग को यमुना छोड़कर जाने पर विवश कर दिया।

5. कुरुक्षेत्र में विराट रूप और गीता ज्ञान

महाभारत युद्ध की शुरुआत में जब अर्जुन अपनों के खिलाफ शस्त्र उठाने से हिचकिचा रहे थे, तब भगवान कृष्ण ने उन्हें काल का चक्र दिखाया। उन्होंने अर्जुन को अपने ‘विराट रूप’ के दर्शन कराए, जिसमें पूरी सृष्टि, सभी देवी-देवता और अनंत ब्रह्मांड समाया हुआ था। इसी अलौकिक रूप के सामने उन्होंने श्रीमद्भगवद्गीता का अमर संदेश दिया।

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