आवारा मवेशियों के खूनी खेल से फिर दहला डोंगरगांव

  • नगर पालिका का एक दिनी मवेशी हटाओ ‘नाटक’ फेल

  • राजीव गांधी चौक पर गौमाता की दर्दनाक मौत

डोंगरगांव ,घनश्याम साव: नगर पालिका डोंगरगांव की प्रशासनिक लापरवाही एक बार फिर मासूम बेजुबानों और आम जनता की जिंदगी पर भारी पड़ रही है। आवारा मवेशियों को हटाने का नगर पालिका का अभियान महज एक दिन की नौटंकी और कागजी खानापूर्ति साबित हुआ। हकीकत यह है कि कांजीहाउस को ‘सफेद हाथी’ बनाकर रख दिया गया है और पकड़े गए मवेशियों को शहर से दूर करने के बजाय पालिका कार्यालय के आसपास और खुले मैदानों में छोड़कर औपचारिकता पूरी कर ली गई। नतीजतन, शाम ढलते ही सड़कों पर फिर से मौत का फंदा सज गया।


  • राजीव गांधी चौक पर खूनी मंजर, तड़प-तड़पकर टूटी गौमाता की सांसें

प्रशासनिक नाकामी की कीमत एक बार फिर एक बेजुबान को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। मंगलवार रात करीब 8 बजे राजीव गांधी चौक के पास एक अनियंत्रित आयशर वाहन ने सड़क किनारे पर बैठी गौमाता को बेरहमी से रौंद दिया और चालक वाहन समेत रफूचक्कर हो गया। हादसे में गौमाता का जबड़ा पूरी तरह से चकनाचूर हो गया और उसने मौके पर ही तड़प-तड़पकर दम तोड़ दिया। घटना के बाद आक्रोशित गौसेवक सिद्धम चौपड़ा, अतिशय जैन, अनिल जैन और हर्ष बोहरा सहित अन्य युवा मौके पर पहुंचे, जिन्होंने मृत मवेशी का शव को सुरक्षित कर सुबह विधि-विधान से अंतिम संस्कार कराया।

तीन मौतों के बाद भी कुंभकर्णी नींद में सोया प्रशासन

सवाल यह उठता है कि क्या डोंगरगांव प्रशासन किसी बड़े अधिकारी या रसूखदार के साथ अनहोनी का इंतजार कर रहा है? बीते एक साल में मवेशियों से टकराकर खुज्जी के एक बेकसूर युवक समेत तीन लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, जबकि दर्जनों लोग अपाहिज हो चुके हैं। इसके बावजूद प्रशासनिक कार्रवाई महज हादसों के बाद दो दिन की फोटोबाजी तक सीमित रहती है। छिपी बात नहीं है कि पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र में सख्त नीति और हाईकोर्ट की सीधी चेतावनी—’सड़क पर मवेशी दिखे तो सीधे अधिकारी जिम्मेदार होंगे’—के कारण व्यवस्था दुरुस्त है, लेकिन राजनांदगांव जिले में अधिकारी सिर्फ अपनी पीठ थपथपाने में मस्त हैं।

सिर्फ वाहवाही लूटने में व्यस्त अधिकारी, अब सड़क पर उतरने की तैयारी में जनता

शहरवासी अब अधिकारियों के इस ढुलमुल रवैये से बुरी तरह आक्रोशित हैं। ‘श्रीनंदेश्वर जन जागृति युवा समिति’ के युवाओं को लगातार राजनांदगांव-चौकी अंतरराज्यीय मार्ग पर लहूलुहान मवेशियों को समेटना पड़ रहा है। जनता का सीधा कहना है कि कागजी आंकड़े दिखाकर वाहवाही लूटने वाले अधिकारियों की कारगुजारी अब बर्दाश्त से बाहर है।


  • जब तक एसडीएम खुद संज्ञान लेकर पुलिस, राजस्व और नगर पालिका की संयुक्त टीम नहीं बनाते और ‘छत्तीसगढ़ पशु (नियंत्रण) अधिनियम, 1976’ के तहत छुट्टा मवेशी छोड़ने वाले लापरवाह पशुपालकों पर एफआईआर और भारी जुर्माना ठोकने जैसी सख्त कार्रवाई नहीं करते, तब तक डोंगरगांव की सड़कों पर मंडराता यह मौत का साया खत्म नहीं होगा।

 

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