अर्जुनी /अंचल में नशे का अवैध करोबार गंभीर सामाजिक संकट बनता जा रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार गांजे की बिक्री और खपत कई स्थानों पर बढ़ रही है, जिसकी जद में युवा वर्ग के साथ स्कूली बच्चे भी आते जा रहे हैं। बाहर से गांजा लाकर क्षेत्र में खपाए जाने की चर्चाओं के बीच प्रशासन और संबंधित विभाग की कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि जिन हाथों में किताबें और कलम होनी चाहिए, उन्हीं हाथों में नशे की पुड़िया पहुंच रही है । यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगी तो इसका असर केवल कुछ परिवारों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाली पीढ़ी के भविष्य पर पड़ सकता है। स्थानीय स्तर पर गांजे की आसान उपलब्धता की शिकायतें यदि सही हैं, तो यह प्रशासन के लिए बेहद गंभीर विषय है।
स्थानीय लोगों के बीच यह सवाल चर्चा में है कि यदि अंचल में बाहर से गांजा पहुंच रहा है तो आपूर्ति की पूरी श्रृंखला आखिर कहां से संचालित हो रही है? कौन लोग इसे क्षेत्र में ला रहे हैं और किन माध्यमों से युवाओं तक पहुंचाया जा रहा है? छोटे स्तर पर नशा करने वालों या कथित विक्रेताओं पर कार्रवाई करने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा।
जरूरत है कि प्रशासन सप्लाई चैन की तह तक पहुंचे और बड़े तस्करों तक कार्रवाई करे। सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि अवैध कारोबार लंबे समय से चलने की शिकायतें सामने आ रही हैं तो संबंधित जिम्मेदारों को इसकी भनक क्यों नहीं लगती। क्या निगरानी तंत्र कमजोर है? क्या मुखबिर तंत्र निष्क्रिय है? या फिर नशे के कारोबारियों को स्थानीय स्तर पर किसी तरह का संरक्षण मिल रहा है। यदि ऐसी शिकायतें हैं तो उनकी स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होना जरूरी है। नशे के खिलाफ अभियान छिटपुट कार्रवाई और प्रेस विज्ञप्तियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए।
अर्जुनी अंचल में यदि गांजे की उपलब्धता बढ़ रही है तो यह महज कानून का उल्लंघन नहीं, बल्कि समाज के भविष्य के सामने बड़ा खतरा है। आज यदि स्कूली बच्चे और युवा इसकी चपेट में आ रहे हैं तो कल इसका खामियाजा पूरे समाज को भुगतना पड़ सकता है। अंचल के लोग चाहते हैं कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेकर गांजा बिक्री के संभावित ठिकानों की जांच करे, तस्करी के स्रोत का पता लगाए और दोषियों के खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई करे।








