खैरागढ़। राजनांदगांव जिला अस्पताल में प्रसव के दौरान 27 वर्षीय महिला और उसके नवजात बच्चे की मौत का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। खैरागढ़ ब्लॉक के जालबांधा निवासी परिवार ने अस्पताल के चिकित्सकों और स्टाफ पर इलाज में लापरवाही का गंभीर आरोप लगाया है।परिजनों का कहना है कि सोनोग्राफी में बच्चे की स्थिति सामान्य नहीं होने की जानकारी सामने आने के बाद भी समय रहते जरूरी चिकित्सकीय निर्णय नहीं लिया गया। प्रसव पीड़ा बढ़ने के बाद भी डॉक्टर को बुलाने और जरूरत पड़ने पर ऑपरेशन कराने की गुहार लगाई गई, लेकिन कथित तौर पर समय पर उपचार नहीं मिला। मृतका के ससुर रामबिलास सिन्हा ने इस संबंध में खैरागढ़ और राजनांदगांव के कलेक्टर-एसपी को शिकायत देकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। वहीं, जिला पंचायत सदस्य शताक्षी सिंह ने भी मामले को गंभीर बताते हुए अधिकारियों को पत्र लिखा है।परिजनों के मुताबिक 27 वर्षीय माधुरी सिन्हा को प्रसव की तारीख नजदीक आने के कारण 31 अगस्त को राजनांदगांव जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिवार का दावा है कि भर्ती के समय उसकी हालत सामान्य थी। 1 सितंबर की सुबह करीब 11 बजे माधुरी सोनोग्राफी कराने गई थी। जांच के बाद वापस लौटने पर परिजनों को अस्पताल के स्टाफ से बच्चे की स्थिति को लेकर जानकारी मिली। परिजनों का आरोप है कि सोनोग्राफी में बच्चे की स्थिति उल्टी होने और गर्भ में गंदा पानी जाने की बात बताई गई थी। इसके कुछ देर बाद करीब दोपहर 1 बजे माधुरी को तेज प्रसव पीड़ा शुरू हो गई।परिजनों का आरोप है कि प्रसव पीड़ा शुरू होने के बाद उन्होंने नर्सिंग स्टाफ से तत्काल डॉक्टर को बुलाने की मांग की। परिवार का कहना है कि उन्होंने डॉक्टर से जांच कराने के साथ ही स्थिति गंभीर होने पर ऑपरेशन करने का भी अनुरोध किया था। आरोप है कि काफी देर तक डॉक्टर मौके पर नहीं पहुंचे। इसी दौरान माधुरी की हालत बिगड़ती गई।
परिजनों के मुताबिक, एक नर्स ने उसे इंजेक्शन लगाया, जिसके बाद वह बेहोश हो गई। उस समय उसका पति अजय सिन्हा और सास देवली सिन्हा भी अस्पताल में मौजूद थे। परिजनों का यह भी आरोप है कि माधुरी की हालत बिगड़ने के बाद उन्होंने उसे दूसरे अस्पताल ले जाने के लिए रेफर करने की मांग की, लेकिन इस दिशा में भी तत्काल कार्रवाई नहीं हुई।रामबिलास सिन्हा के अनुसार शाम करीब 5 बजे अस्पताल का स्टाफ माधुरी को ऑपरेशन थिएटर लेकर गया। परिवार को उम्मीद थी कि अब चिकित्सकीय हस्तक्षेप के बाद उसकी और बच्चे की जान बचाई जा सकेगी। लेकिन करीब आधे घंटे बाद अस्पताल के स्टाफ ने बाहर आकर जच्चा और बच्चा दोनों की मौत होने की जानकारी दी।
इसके बाद परिवार में हड़कंप मच गया। परिजनों का आरोप है कि अगर समय रहते स्थिति को गंभीरता से लिया जाता और जरूरी उपचार किया जाता, तो शायद दोनों की जान बचाई जा सकती थी।मामले में पोस्टमार्टम को लेकर भी परिवार ने गंभीर सवाल उठाए हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि मौत का वास्तविक कारण जानने के लिए उन्होंने पोस्टमार्टम की मांग की थी। आरोप है कि उन्हें पोस्टमार्टम की प्रक्रिया को लेकर डराया गया और रात में ही शव को जालबांधा ले जाने की तैयारी की गई।
परिजनों ने रात में शव ले जाने से इनकार कर दिया। इसके बाद अगले दिन शव को जालबांधा ले जाया गया। परिवार ने अब अधिकारियों से पोस्टमार्टम और मौत के वास्तविक कारण की भी जांच कराने की मांग की है।मामले की जानकारी सामने आने के बाद जिला पंचायत सदस्य राजकुमारी शताक्षी सिंह ने भी कलेक्टर और एसपी को पत्र लिखकर जांच की मांग की है। उन्होंने सोनोग्राफी के बाद बच्चे की स्थिति की जानकारी होने, प्रसव पीड़ा शुरू होने के बाद डॉक्टर को समय पर बुलाने, ऑपरेशन को लेकर निर्णय लेने में कथित देरी और जच्चा-बच्चा की मौत की वास्तविक वजह जैसे बिंदुओं की जांच की मांग की है। उन्होंने पोस्टमार्टम को लेकर परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों की भी जांच की आवश्यकता बताई है।








