मुंगेली। जिले के सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जिसने पुलिस की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामला आर्म्स एक्ट से जुड़ा है। आरोप है कि पुलिस ने जितेंद्र साहू सहित चार लोगों को घेराबंदी कर थाने लाया। इन पर आर्म्स एक्ट की धारा 25 और 27 के तहत कार्रवाई की बात कही जा रही है।
लेकिन चौंकाने वाली बात ये है कि इन चारों को करीब चार घंटे तक थाने में बैठाने के बाद छोड़ दिया गया। बताया जा रहा है कि अगले दिन इनकी गिरफ्तारी दिखाई गई।
इसी को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं कि अगर कार्रवाई का आधार मौजूद था, तो आरोपियों को थाने से छोड़े जाने का निर्णय किस प्रक्रिया के तहत लिया गया?
थाना प्रभारी के कथित बयान से बढ़ी चर्चा
इस पूरे मामले में थाना प्रभारी कार्तिकेश्वर जांगड़े के एक कथित बयान को लेकर भी चर्चा तेज है। पीड़ित का कहना है कि थाना प्रभारी द्वारा यह बताया गया कि मामला उच्च अधिकारियों के संज्ञान में लाने के बाद आरोपियों को थाने से जाने दिया गया।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या आरोपियों को छोड़ने से पहले वरिष्ठ अधिकारियों से लिखित या मौखिक अनुमति ली गई थी? यदि ली गई थी, तो उसका रिकॉर्ड क्या है? और अगर नहीं ली गई, तो यह किस नियम के तहत हुआ?
SP और रेंज IG की जांच पर टिकी नजरें
फिलहाल पूरे मामले में अब सबकी निगाहें मुंगेली एसपी और बिलासपुर रेंज आईजी की ओर टिकी हैं। लोगों का मानना है कि यदि मामले की निष्पक्ष जांच होती है, तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।
पुलिस रिकॉर्ड, थाना के सीसीटीवी और संबंधित पक्षों के बयान सामने आने के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। फिलहाल आर्म्स एक्ट जैसे गंभीर मामले में आरोपियों को थाने लाकर छोड़ने और अगले दिन गिरफ्तारी की बात सामने आने से पुलिस की कार्यप्रणाली कटघरे में है।








