डोंगरगांव :धूल से बेहाल राहगीर, जांच के आदेश के बाद भी निर्माण कार्य में सुधार नहीं

  • अंतरराज्यीय मार्ग के चौड़ीकरण में लापरवाही पर उठ रहे सवाल, रोज सफर करने वाले कर्मचारी रास्ता बदलने को मजबूर

घनश्याम साव ,डोंगरगांव ।अंतरराज्यीय मार्ग के चौड़ीकरण का काम इन दिनों राहगीरों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बना हुआ है। अर्जुनी के आसपास, बगदई से अमलीडीह-टोलागांव और मोहड़ से गुंडरदेही के बीच चल रहे निर्माण कार्य में धूल, अधूरी सड़क और सुरक्षा व्यवस्था की कमी को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। इन दिनों अखबारों में भी निर्माण की खामियों को लेकर समाचार प्रकाशित होते रहे हैं, लेकिन मौके की स्थिति में अपेक्षित सुधार नजर नहीं आ रहा है। सबसे अधिक परेशानी दोपहिया वाहन चालकों को उठानी पड़ रही है, जिन्हें रोज धूल के गुबार के बीच सफर करना पड़ रहा है।

सड़क पर उड़ती धूल अब राहगीरों की रोजमर्रा की परेशानी बन गई है। टोपी, गमछा और हेलमेट का सहारा लेने के बावजूद धूल से बचना मुश्किल हो रहा है। पीछे से आने वाले वाहनों के कारण धूल का गुबार और बढ़ जाता है। नियमित रूप से दोपहिया वाहन से सफर करने वाले कई लोग कपड़ों का अतिरिक्त जोड़ा साथ लेकर चलने को मजबूर हैं। शिक्षक और अन्य विभागों के कर्मचारी, जिन्हें रोज इसी मार्ग से आना-जाना पड़ता है, धूल से बचने के लिए वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल कर रहे हैं। यह रास्ता मुख्य मार्ग की तुलना में लगभग 15 किलोमीटर अधिक पड़ता है। इससे समय और ईंधन, दोनों की बर्बादी हो रही है।

मौसम के अनुरूप पानी का छिड़काव जरूरी..

निर्माणाधीन सड़क पर धूल नियंत्रण के लिए नियमित और प्रभावी पानी का छिड़काव जरूरी है। मौसम और वाहनों की आवाजाही को देखते हुए जरूरत पड़ने पर हर घंटे पानी डालने की व्यवस्था की जानी चाहिए। लेकिन सड़क पर धूल का गुबार लगातार दिखाई देना बताता है कि मौजूदा इंतजाम पर्याप्त नहीं हैं। भारी वाहनों की आवाजाही के बीच उड़ती धूल दोपहिया चालकों के लिए परेशानी के साथ दृश्यता और सड़क सुरक्षा का भी सवाल खड़ा करती है।

सड़क निर्माण जरूरी है, लेकिन विकास कार्य के दौरान राहगीरों को इस हद तक परेशान होना पड़े कि वे अपना नियमित रास्ता छोड़कर लंबा चक्कर लगाने लगें, तो निर्माण एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है। सूट-बूट में वाहनों से चलने वाले जिम्मेदार अधिकारी यदि कभी इसी मार्ग पर दोपहिया वाहन से सफर करें, तो शायद राहगीरों की परेशानी का वास्तविक अंदाजा लगा सकें।

सत्ता पक्ष के नेता की शिकायत पर जांच, नतीजा कहां?

सड़क की गुणवत्ता को लेकर मामला केवल धूल और अधूरे निर्माण तक सीमित नहीं है। राजनांदगांव जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के उपाध्यक्ष एवं भाजपा नेता भरत लाल वर्मा ने राजनांदगांव-खैरागढ़ मुख्य मार्ग के नवीनीकरण एवं उन्नयन तथा राजनांदगांव-मोहला-मानपुर सड़क परियोजनाओं में कथित गंभीर अनियमितता, भ्रष्टाचार और गुणवत्ताहीन निर्माण की शिकायत की थी। शिकायत के आधार पर लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता ने चार सदस्यीय जांच समिति गठित कर तीन दिवस के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था।

वर्तमान में प्रदेश में भाजपा की सरकार है और सड़क परियोजना के लिए केंद्र सरकार से राशि उपलब्ध होने के बाद काम शुरू हुआ है। ऐसे में सत्ता पक्ष के एक जिम्मेदार नेता द्वारा निर्माण की गुणवत्ता पर शिकायत किया जाना अपने आप में गंभीर सवाल खड़ा करता है। कांग्रेस के कुछ नेता भी निर्माण कार्य की खामियों को लेकर आवाज उठा रहे हैं। लेकिन सवाल यह है कि शिकायत किसी भी दल या व्यक्ति की ओर से हो, क्या उसका परिणाम सामने आएगा?

जांच की समय-सीमा पूरी, कार्रवाई का इंतजार..

जांच के लिए निर्धारित तीन दिन की समय-सीमा बीत चुकी है, लेकिन निर्माण कार्य में अपेक्षित सुधार नजर नहीं आने की शिकायतें सामने आ रही हैं। ऐसे में जांच समिति की रिपोर्ट और उस पर की गई कार्रवाई को सार्वजनिक किए जाने की मांग महत्वपूर्ण हो जाती है। क्या तकनीकी मानकों के अनुसार सड़क की परतों, मोटाई, घनत्व और डामरीकरण की जांच पूरी हुई? क्या निर्माण एजेंसी और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका का आकलन किया गया? यदि खामियां मिलीं, तो क्या सुधारात्मक या दंडात्मक कार्रवाई की गई?

जांच समिति में शामिल अधिकारियों की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करने के बजाय जरूरी है कि विभाग जांच की प्रक्रिया, तकनीकी परीक्षण और निष्कर्षों को पारदर्शी तरीके से सामने रखे। यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई होनी चाहिए; और यदि आरोप प्रमाणित नहीं होते, तो यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए।

सड़क चौड़ीकरण का उद्देश्य आवागमन को सुगम और सुरक्षित बनाना है, न कि राहगीरों को धूल, लंबा चक्कर और दुर्घटना की आशंका के बीच छोड़ देना। अंतरराज्यीय राज्य मार्ग होने के कारण 10 चक्के या उससे अधिक चक्कों की गाड़ियों का भी आना-जाना बदस्तूर जारी है।जिसका भी खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।

अब देखना यह है कि जांच समिति की रिपोर्ट केवल कागजों तक सीमित रहती है या निर्माण की गुणवत्ता और राहगीरों की परेशानी में वास्तव में सुधार भी दिखाई देता है।निर्धारित समय-सीमा बीतने के बावजूद रिपोर्ट और कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट नहीं है”

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