धमतरी।छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में स्थित गंगरेल बांध (रविशंकर जलाशय) के डूब प्रभावित ग्रामीणों द्वारा अपनी मांगों को लेकर किया जा रहा जल सत्याग्रह अब गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। बांध के निर्माण के दौरान विस्थापित हुए 52 गांवों के लगभग 100 ग्रामीण अपनी जमीन और अधिकारों के लिए पानी में उतरकर प्रदर्शन कर रहे थे। लगातार कई घंटों तक कमर तक पानी में खड़े रहने के कारण आंदोलनकारियों के स्वास्थ्य पर इसका बेहद बुरा असर पड़ा है। अत्यधिक कमजोरी, ठंड और पानी के कारण पैरों में संक्रमण होने की वजह से 9 सत्याग्रहियों की तबीयत अचानक बिगड़ गई। स्थिति को बिगड़ता देख मौके पर मौजूद अन्य ग्रामीणों और प्रशासन ने तुरंत 108 एम्बुलेंस बुलाई, जिसके बाद इन सभी 9 प्रभावितों को इलाज के लिए धमतरी जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ डॉक्टरों की देखरेख में उनका उपचार चल रहा है।
इस पूरे आंदोलन की शुरुआत प्रशासन की लंबे समय से चली आ रही अनदेखी के विरोध में हुई है। विस्थापित परिवारों का कहना है कि बिलासपुर हाईकोर्ट ने 16 दिसंबर 2020 को ही उनके पक्ष में फैसला सुनाते हुए आवश्यक जांच और भूमि आवंटन करने के आदेश जारी किए थे, लेकिन करीब 6 साल बीत जाने के बाद भी प्रशासन ने इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया। इसी वादे को पूरा कराने और सरकारी नौकरी की मांग को लेकर ग्रामीण 12 अक्टूबर 2026 से गंगरेल बांध के बोटिंग पॉइंट के पास अनिश्चितकालीन जल सत्याग्रह पर बैठ गए।आंदोलनकारियों की तबीयत बिगड़ने और प्रदर्शन के उग्र होने के बाद जिला प्रशासनिक अमला भी तुरंत हरकत में आया है। बिगड़ते हालात को देखते हुए प्रशासनिक अधिकारियों की टीम ने प्रदर्शन स्थल का दौरा किया और ग्रामीणों से आंदोलन समाप्त करने की समझाइश दी। नायब तहसीलदार के अनुसार, जिला कलेक्टर के विशेष निर्देश पर अब एक उच्च स्तरीय जांच कमेटी का गठन कर दिया गया है। यह कमेटी डूब प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करके और राजस्व रिकॉर्ड का मिलान करके इस बात की गहनता से पुष्टि करेगी कि पट्टे और मुआवजे के हकदार असली विस्थापित परिवार कौन हैं। प्रशासन का कहना है कि इस जांच रिपोर्ट के आधार पर हाई कोर्ट के आदेशानुसार पात्र परिवारों को भूमि आवंटन और पुनर्वास की आगे की प्रक्रिया को पूरी पारदर्शिता के साथ जल्द से जल्द पूरा किया जाएगा, ताकि ग्रामीणों की समस्याओं का स्थायी समाधान हो सके।






