व्हाट्सएप पर फर्जी बैंकिंग अलर्ट से रहें सावधान, एक जवाब से खाली हो सकता है बैंक खाता
साइबर फ्रॉड से बचने के लिए अपनाएं ‘0-30-60 मिनट’ का गोल्डन आवर नियम, संदिग्ध लिंक और रिमोट एक्सेस ऐप से रहें दूर
बलौदाबाजार। डिजिटल युग में ऑनलाइन बैंकिंग की सुविधा के साथ साइबर ठगी के मामले भी लगातार नए तरीके से सामने आ रहे हैं। अब साइबर ठग व्हाट्सएप पर फर्जी बैंकिंग अलर्ट भेजकर लोगों को अपने जाल में फंसाने की कोशिश कर रहे हैं। ‘Reply NO to cancel’ यानी रद्द करने के लिए NO में जवाब दें, जैसे संदेश भेजकर लोगों में डर पैदा किया जाता है, ताकि वे जल्दबाजी में कोई गलती कर बैठें। ऐसे में जरा-सी लापरवाही बैंक खाते में जमा रकम को खतरे में डाल सकती है।
फर्जी बैंक स्टेटमेंट और पेंडिंग डेबिट के मैसेज से रहें सतर्क
साइबर ठग लोगों को अंग्रेजी और हिंदी में फर्जी बैंक स्टेटमेंट, संदिग्ध ट्रांजैक्शन और पेंडिंग डेबिट से संबंधित मैसेज भेज रहे हैं। इन संदेशों में दावा किया जाता है कि उनके बैंक खाते से कोई राशि कटने वाली है या कोई संदिग्ध लेनदेन हुआ है। इसके बाद ट्रांजैक्शन रद्द करने के नाम पर जवाब देने, लिंक खोलने या किसी नंबर पर संपर्क करने के लिए कहा जाता है।
ठग इस तरह लोगों में घबराहट पैदा कर उनसे निजी बैंकिंग जानकारी हासिल करने की कोशिश करते हैं। हालांकि, केवल ‘NO’ लिखकर जवाब देने से ही बैंक खाता खाली हो जाता है, ऐसा जरूरी नहीं है। असली खतरा तब बढ़ता है, जब व्यक्ति ठगों के निर्देशों का पालन करते हुए ओटीपी, पासवर्ड, यूपीआई पिन या अन्य गोपनीय जानकारी साझा कर देता है अथवा संदिग्ध लिंक पर जाकर अपनी जानकारी दर्ज कर देता है।
बैंकिंग अलर्ट की आधिकारिक पुष्टि जरूर करें
बैंक के नाम से व्हाट्सएप पर आने वाले हर संदेश पर भरोसा नहीं करना चाहिए। किसी भी संदिग्ध ट्रांजैक्शन या बैंकिंग अलर्ट की पुष्टि बैंक के आधिकारिक मोबाइल ऐप, वेबसाइट या कार्ड के पीछे दिए गए आधिकारिक हेल्पलाइन नंबर से करें। अनजान नंबर से आए संदेशों में दिए गए लिंक या संपर्क नंबर का इस्तेमाल करने से बचें।
बैंकिंग से जुड़ी गोपनीय जानकारी, जैसे ओटीपी, एटीएम पिन, यूपीआई पिन और इंटरनेट बैंकिंग पासवर्ड किसी के साथ साझा न करें। किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर मोबाइल में रिमोट एक्सेस ऐप इंस्टॉल न करें, क्योंकि इससे ठग आपके डिवाइस तक पहुंच हासिल करने की कोशिश कर सकते हैं।
साइबर फ्रॉड से बचाव के लिए अपनाएं ‘0-30-60 मिनट’ का नियम
साइबर ठगी से बचने और घटना होने पर नुकसान कम करने के लिए समय पर कार्रवाई करना बेहद जरूरी है। इसके लिए ‘0-30-60 मिनट’ का नियम एक उपयोगी जागरूकता संदेश के रूप में अपनाया जा सकता है।
– पहले 0 मिनट: संदिग्ध मैसेज मिलते ही रुकें। घबराहट में जवाब न दें, किसी लिंक पर क्लिक न करें और अपनी बैंकिंग जानकारी साझा न करें।
– अगले 30 मिनट: यदि कोई संदिग्ध लेनदेन दिखाई दे या बैंकिंग जानकारी साझा हो गई हो, तो तुरंत बैंक के आधिकारिक माध्यम से संपर्क करें। जरूरत पड़ने पर खाते, कार्ड या संबंधित डिजिटल भुगतान सुविधा को सुरक्षित अथवा ब्लॉक करवाएं।
– 60 मिनट के भीतर: यदि आर्थिक साइबर ठगी हो चुकी है, तो तत्काल राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं और आधिकारिक पोर्टल पर भी रिपोर्ट करें। बैंक से संपर्क करने और शिकायत दर्ज कराने में देरी न करें।
जागरूकता ही साइबर ठगी से बचाव का सबसे बड़ा हथियार
व्हाट्सएप पर बैंक के नाम से आने वाला हर संदेश वास्तविक नहीं होता। किसी भी मैसेज में जल्दबाजी करने, लिंक खोलने या गोपनीय जानकारी देने के लिए कहा जाए तो सतर्क हो जाएं। संदिग्ध संदेश को आधिकारिक माध्यम से सत्यापित करें और जरूरत पड़ने पर उसकी रिपोर्ट करें।
याद रखें: बैंक खाते की सुरक्षा के लिए सतर्कता जरूरी है। किसी अनजान संदेश के दबाव में आकर कोई कदम न उठाएं। यदि साइबर ठगी का शिकार हो जाएं, तो तुरंत 1930 पर कॉल करें और “राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल” (https://cybercrime.gov.in/?utm_source=chatgpt.com) पर शिकायत दर्ज कराएं।






