- राजनीतिक खींचतान के बीच उत्सव की जिम्मेदारी में बदलाव, नगर पालिका अध्यक्ष ने संभाली आयोजन की कमान
घनश्याम साव,डोंगरगांव। नगर में दशहरा उत्सव की परंपरा वर्षों से धार्मिक आस्था, सामाजिक एकता और आपसी सौहार्द का प्रतीक रही है। लेकिन इस वर्ष दशहरा उत्सव के आयोजन को लेकर परिस्थितियां बदली हुई नजर आ रही हैं। वर्षों से दशहरा उत्सव के आयोजन में प्रमुख भूमिका निभाने वाली निशांत दुर्गा उत्सव समिति ने इस बार मुख्य आयोजन से खुद को अलग कर लिया है। इसके बाद नगर पालिका परिषद और नगरवासियों के सहयोग से नई समिति गठित कर दशहरा उत्सव की तैयारी शुरू की गई है। वहीं, निशांत दुर्गा एवं दशहरा उत्सव समिति ने भी अलग से धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करने की घोषणा की है।
नगर में पिछले विधानसभा चुनाव के बाद से राजनीतिक समीकरणों में बदलाव और गुटीय खींचतान की चर्चाएं होती रही हैं। नगर पंचायत चुनाव के बाद यह प्रतिस्पर्धा और अधिक खुलकर सामने आने लगी है। ऐसे माहौल में दशहरा जैसे पारंपरिक और धार्मिक आयोजन को लेकर दो अलग-अलग व्यवस्थाएं सामने आने से नगरवासियों के बीच भी चर्चा शुरू हो गई है।
नगर पालिका अध्यक्ष ने संभाली जिम्मेदारी..
निशांत दुर्गा उत्सव समिति द्वारा मुख्य दशहरा आयोजन से अलग होने की सूचना पत्र के माध्यम से नगर पालिका को दी गई थी। इसके बाद नगर पालिका परिषद ने नगरवासियों के सहयोग से नई समिति का गठन कर उत्सव की तैयारियां शुरू कर दीं। नगर पालिका अध्यक्ष अंजू त्रिपाठी ने आयोजन की जिम्मेदारी संभाली है। उन्हें सांसद संतोष पांडे के करीबी के रूप में भी जाना जाता है।
अध्यक्ष अंजू त्रिपाठी का कहना है कि नगर का दशहरा उत्सव काफी पुराना है। जब लोगों की भावनाएं और जुड़ाव इस आयोजन से जुड़े हैं, तो यह परंपरा कैसे टूट सकती है। उनके अनुसार, नगरवासियों के सहयोग से दशहरा उत्सव की परंपरा को आगे बढ़ाया जाएगा।
निशांत दुर्गा उत्सव समिति का अलग आयोजन..
दूसरी ओर, निशांत दुर्गा एवं दशहरा उत्सव समिति ने 20 अक्टूबर, मंगलवार को रात 8 बजे से आत्मानंद स्कूल मैदान में धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम ,माता का जगराता,आयोजित करने की घोषणा की है। इसमें शिवम यादव म्यूजिकल ग्रुप, करगी रोड, जिला बिलासपुर की प्रस्तुति के साथ माता का जगराता, सांस्कृतिक लोककला मंच की भव्य झांकी तथा एल्बम कलाकार एवं गायक शिवम यादव और स्वाति वैष्णव के कार्यक्रम प्रस्तावित हैं।
जिला पंचायत के पूर्व अध्यक्ष दिनेश गांधी लंबे समय से नगर के सामाजिक और धार्मिक आयोजनों में प्रभावशाली भूमिका निभाते रहे हैं। निशांत दुर्गा उत्सव समिति के दशहरा आयोजन में भी उनकी प्रमुख भूमिका मानी जाती रही है। इस वर्ष समिति के मुख्य आयोजन से अलग होने के बाद दशहरा उत्सव की व्यवस्था में आया बदलाव नगर में चर्चा का विषय बना हुआ है।
1958 से चली आ रही परंपरा का भी उल्लेख..
डोंगरगांव में दुर्गा उत्सव और दशहरा आयोजन का इतिहास पुराना है। बाजार क्षेत्र की श्री नव दुर्गा उत्सव समिति नगर की पुरानी समितियों में गिनी जाती है। बताया जाता है कि इस समिति ने वर्ष 1958 में नवरात्रि के अवसर पर मां दुर्गा की प्रतिमा की स्थापना पहली बार की थी। व्यापारी वर्ग और नगर के प्रतिष्ठित लोगों की सहभागिता से शुरू हुई यह धार्मिक परंपरा आज भी जारी है।
ऐसे में नगरवासियों के बीच यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि वर्षों से चली आ रही धार्मिक परंपराओं को राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और आपसी वर्चस्व की होड़ से अलग क्यों नहीं रखा जा सकता। दशहरा बुराई पर अच्छाई की विजय का पर्व है, जो समाज को एकता, सद्भाव और आपसी भाईचारे का संदेश देता है।
कार्यक्रम में राजनीतिक मतभेद का असर न हो…
नगरवासियों की अपेक्षा है कि धार्मिक आस्था से जुड़े ऐसे आयोजनों में प्रतिस्पर्धा के बजाय सहयोग की भावना को प्राथमिकता मिले। आयोजन कोई भी समिति करे, लेकिन दशहरा उत्सव नगर की साझा विरासत बना रहे और राजनीतिक मतभेदों का असर धार्मिक परंपराओं पर न पड़े। यही इस पर्व की वास्तविक भावना और डोंगरगांव की सामाजिक एकता के लिए जरूरी है।
नगर में एक ही दिन बड़े धार्मिक को लेकर पुलिस सुरक्षा व्यवस्था की मांग भी की गई है, बीस अक्टूबर को होने वाले इस धार्मिक आयोजन की तैयारी जोरो पर है।






