श्रीराम की शरणागत वत्सलता और अंगद के तर्कों ने दर्शकों को किया भावविभोर
भाटापारा। आदर्श रामलीला नाटक मंडली द्वारा आयोजित रामलीला के सप्तम दिवस पर विभीषण शरणागति और अंगद-रावण संवाद की लीला का भव्य मंचन किया गया। कलाकारों ने दोनों प्रसंगों का सजीव चित्रण कर दर्शकों को भावविभोर कर दिया। रामलीला मैदान में बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने तालियों के साथ कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।
विभीषण ने रावण को दी सद्बुद्धि की सलाह
मंचन के दौरान दिखाया गया कि रावण द्वारा माता सीता का हरण करने और उन्हें वापस लौटाने से इनकार करने पर विभीषण दुखी हो जाते हैं। वह अपने भाई रावण को समझाते हुए माता सीता को सम्मानपूर्वक भगवान श्रीराम के पास लौटाने और अनावश्यक युद्ध से बचने की सलाह देते हैं। लेकिन अहंकार में डूबा रावण विभीषण की बात मानने के बजाय उन्हें अपमानित कर लंका से बाहर निकाल देता है।
इसके बाद विभीषण भगवान श्रीराम की शरण में पहुंचते हैं। प्रभु श्रीराम उन्हें शरण देते हुए गले लगा लेते हैं। इस प्रसंग के माध्यम से कलाकारों ने भगवान श्रीराम की उदारता, करुणा और शरणागत की रक्षा करने के आदर्श को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
अंगद ने रावण को युद्ध के परिणामों से कराया अवगत
इसके पश्चात अंगद-रावण संवाद की लीला का मंचन हुआ। भगवान श्रीराम की ओर से अंगद को शांति दूत बनाकर लंका भेजा जाता है। रावण के दरबार में पहुंचकर अंगद उसे माता सीता को सम्मानपूर्वक लौटाने और युद्ध का मार्ग छोड़ने की सलाह देते हैं। हालांकि, रावण अपने अहंकार के कारण अंगद की बात मानने से इनकार कर देता है।
अंगद अपने तर्कों और वाणी के माध्यम से रावण को भगवान श्रीराम की शक्ति का एहसास कराते हुए युद्ध के विनाशकारी परिणामों के प्रति सचेत करते हैं। अंगद के आत्मविश्वास और रावण के अहंकार के बीच हुए संवाद का कलाकारों ने जीवंत चित्रण किया। इस दौरान दर्शकों ने तालियां बजाकर कलाकारों का उत्साह बढ़ाया।
जनप्रतिनिधियों एवं गणमान्य नागरिकों की रही उपस्थिति
रामलीला के सप्तम दिवस के मंचन के दौरान नगर पालिका अध्यक्ष अश्वनी शर्मा, पुलिस अधीक्षक राय गौरव रामप्रवेश , राम स्वरूप दास जी, पार्षद नंद किशोर वैष्णव, पार्षद मनीष मिश्रा, हरगोपाल शर्मा, अशोक तिवाड़ी, संजय जोशी एवं रुपेश तिवारी सहित अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
रामलीला के इन प्रसंगों ने दर्शकों को सत्य, धर्म, विनम्रता और अहंकार के त्याग का संदेश दिया। आयोजन के दौरान पूरा रामलीला मैदान भक्तिमय वातावरण से सराबोर रहा।






