मरीजों की जान से खिलवाड़… बिलासपुर जिले में धड़ल्ले से सक्रिय हैं 550 से ज्यादा झोलाछाप, एंटी क्वेकरी टीम की कार्रवाई

कमलकांत पाटनवार 

बिलासपुर 

जिले में झोलाछाप के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन का शिकंजा कसते जा रहा है। इसी कड़ी में सिरगिट्टी क्षेत्र के बन्नाक चौक में शनिवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए दो ऐसे फर्जी क्लीनिकों पर ताला जड़ दिया गया, जो बिना किसी वैध चिकित्सीय डिग्री के उपचार कर मरीजों की जान से खिलवाड़ कर रहे थे।

स्वास्थ्य विभाग की एंटी क्वेकरी टीम और नर्सिंग होम एक्ट के प्रविधानों के तहत यह प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की गई है। अधिकारियों की इस कार्रवाई से अवैध रूप से क्लीनिक चलाने वालों में हड़कंप मच गया है।

जांच टीम के अनुसार, सिरगिट्टी के बन्नाक चौक स्थित अनूप विश्वास बिना किसी वैध चिकित्सीय योग्यता (डिग्री-डिप्लोमा) के लंबे समय से क्लीनिक संचालित कर रहा था और मरीजों का इलाज कर रहा था। इसी प्रकार पास ही स्थित पूर्णिमा मिश्रा क्लीनिक में भी बिना किसी मान्यता प्राप्त मेडिकल डिग्री के चिकित्सा व्यवसाय किया जा रहा था। प्रशासन को लगातार मिल रही शिकायतों के आधार पर दोनों स्थानों पर दबिश दी गई। जांच के दौरान दोनों संचालक अपने पक्ष में कोई भी वैध दस्तावेज या पंजीयन प्रस्तुत नहीं कर सके। इसके बाद एंटी क्वेकरी सेल एवं नर्सिंग होम एक्ट के तहत दोनों क्लीनिकों को सील कर दिया गया।

शहर से लेकर जिले के गांवों तक फिर सक्रिय हुए झोलाछाप

स्वास्थ्य विभाग की हालिया कार्रवाई ने एक बार फिर इस गंभीर सच्चाई को उजागर कर दिया है कि बिलासपुर शहर से लेकर ग्रामीण अंचलों तक झोलाछाप एक बार फिर पूरी तरह सक्रिय हो चुके हैं। डाक्टरों की कमी, प्रशासनिक सुस्ती और आसान कमाई की लालच में ये फर्जी चिकित्सक भोले-भाले ग्रामीणों और शहरी बस्ती के लोगों के स्वास्थ्य के साथ खुलकर खिलवाड़ कर रहे हैं। जानकारों का कहना है कि समय-समय पर होने वाली छिटपुट कार्रवाई के बाद ये लोग कुछ दिनों के लिए शटर गिराकर गायब हो जाते हैं और फिर से अपनी अवैध दुकानें सजा लेते हैं।

जिले में 550 से ज्यादा झोलाछाप सक्रिय

बिलासपुर जिले के शहरी और ग्रामीण इलाकों को मिलाकर वर्तमान में 550 से अधिक झोलाछाप अवैध रूप से प्रैक्टिस कर रहे हैं। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की ओर से निरंतर और कठोर कार्रवाई न होने के कारण इनके हौसले बुलंद हैं। बन्नाक चौक की तरह इक्का-दुक्का कार्रवाई को छोड़कर जिले के दूरदराज के इलाकों में यह नेटवर्क बेधड़क फल-फूल रहा है, जिस पर स्थायी रोक लगाने की मांग लगातार उठ रही है।

 

Hot Topics

Related Articles