हर रविवार 42 स्कूलों के लगभग 250 बच्चे ले रहे ऑनलाइन टेस्ट, ऑफलाइन कक्षाओं और ऑफलाइन टेस्ट में भाग; शिक्षकों एवं सहयोगियों की पहल से ग्रामीण बच्चों को मिल रहा बेहतर भविष्य का अवसर
राजकुमार अग्रवाल
भगत देवरी। ग्रामीण अंचल के बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने और उनके उज्ज्वल भविष्य की नींव मजबूत करने के उद्देश्य से ग्राम भगत देवरी में एक सराहनीय शैक्षणिक पहल की जा रही है। यहां प्रत्येक रविवार को लगभग 42 स्कूलों के करीब 250 बच्चे एकत्रित होकर प्रयास विद्यालय प्रवेश परीक्षा और सैनिक स्कूल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। कक्षा आठवीं के विद्यार्थियों को केंद्र में रखकर संचालित इस पहल के अंतर्गत बच्चों को निःशुल्क शिक्षा प्रदान की जा रही है। इस अभियान की विशेष बात यह है कि शिक्षक अपना बहुमूल्य समय और ज्ञान निःस्वार्थ भाव से बच्चों के भविष्य को संवारने में लगा रहे हैं।
इस शैक्षणिक अभियान के माध्यम से बच्चों को ऑनलाइन टेस्ट, ऑफलाइन कक्षाओं तथा ऑफलाइन टेस्ट के जरिए प्रतियोगी परीक्षाओं के अनुरूप तैयारी कराई जा रही है। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के प्रतिभाशाली बच्चों को उचित मार्गदर्शन और अभ्यास का अवसर उपलब्ध कराना है, ताकि वे भी प्रयास विद्यालय और सैनिक स्कूल जैसी संस्थाओं में प्रवेश पाने का सपना साकार कर सकें। आर्थिक या भौगोलिक परिस्थितियों के कारण बच्चों की तैयारी प्रभावित न हो, इसी सोच के साथ भगत देवरी में यह प्रयास आगे बढ़ाया जा रहा है।
गुरुजनों का निःशुल्क ज्ञानदान, बच्चों के भविष्य को संवारने का संकल्प
इस पहल में प्रमुख रूप से शिक्षक विरेन्द्र कुमार चौधरी, एमएस साईं सरायपाली; सेवाशंकर साहू, एमएस कन्या तोषगांव; देवेश कुमार भोई, एमएस बोईरमाल; चन्द्रप्रकाश नायक, एमएस भगत देवरी; विवेक प्रधान, एमएस कन्या तोरेसिंहा तथा जोहित पटेल, शिक्षा मित्र बच्चों को मार्गदर्शन देने में अपनी भूमिका निभा रहे हैं। इन गुरुजनों द्वारा निःशुल्क शिक्षा प्रदान करना समाज के लिए प्रेरणादायी उदाहरण है। शिक्षक केवल पाठ्यक्रम की पढ़ाई ही नहीं, बल्कि बच्चों में आत्मविश्वास, अनुशासन और प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने का भी प्रयास कर रहे हैं।
शिक्षा के क्षेत्र में इस तरह का योगदान यह संदेश देता है कि यदि समाज के शिक्षक और जागरूक नागरिक एकजुट होकर प्रयास करें, तो ग्रामीण प्रतिभाओं को आगे बढ़ने के बेहतर अवसर मिल सकते हैं। गुरुजनों का यह ज्ञानदान बच्चों के सपनों को नई दिशा देने के साथ-साथ शिक्षा के प्रति सामाजिक जिम्मेदारी का भी परिचय देता है।
अनेक गांवों और स्कूलों के बच्चे ले रहे लाभ
इस अभियान में सरायपाली, सांकरा, बसना, पिथौरा तथा आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के विभिन्न स्कूलों के विद्यार्थी शामिल हो रहे हैं। इनमें एमएस कन्या सांकरा, एमएस अंसुला, एमएस आर.बी. चीपमेन, एमएस उमरिया, एमएस कलेण्डा, एमएस कायतपाली, एमएस खुटेरी, एमएस जामजुड़ा, एमएस तिलंजपुर, एमएस कन्या तोरेसिंहा, एमएस कन्या तोषगांव, एमएस दुलारपाली, एमएस पथरला, एमएस पेंड्रावन, एमएस बगारदरहा, एमएस बरेकेल खुर्द, एमएस बिजराभाटा, एमएस बेलमुंडी, एमएस बोईरमाल, एमएस भगत देवरी, एमएस भजपुरी, एमएस भैरोंपुर, एमएस मानदीप, एमएस मोहगांव, एमएस सलडीह, एमएस साईं सरायपाली, एमएस सावित्रीपुर, एमएस सिरको और एमएस हबेकांटा सहित अनेक विद्यालयों के बच्चे शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त SAGES पिरदा, SAGES बसना, SAGES सांकरा, केंद्रीय विद्यालय सरायपाली, एडीएन सांकरा, जीएमएचएसएस बसना, एनसीईएमएस भगत देवरी, एसजीपी स्कूल पिरदा, एसपीवी सांकरा, शिशु मंदिर पैकिन, शिशु मंदिर बसना, शिशु मंदिर भगत देवरी तथा सेंट फ्रांसिस स्कूल पिथौरा के विद्यार्थियों की सहभागिता भी इस अभियान के व्यापक स्वरूप को दर्शाती है।
दूसरे सप्ताह में भी चाय-नाश्ते की व्यवस्था, समाजसेवी निभा रहे सहयोग की भूमिका
बच्चों की पढ़ाई के साथ-साथ उनकी सुविधा का ध्यान रखते हुए इस रविवार को लगातार दूसरे सप्ताह चाय-नाश्ते की व्यवस्था भी की गई। इस व्यवस्था में जनपद सदस्य भारती छोटू अग्रवाल, डॉ. हेमंत कौशिक, हृदय प्रसाद पटेल, संदेश अग्रवाल, अनंत राम चौधरी, शोभाराम पटेल, मुक्ता अग्रवाल, भूपेंद्र पटेल, भोगराज साहू और गोलू बरिहा, आत्माराम पटेल सहित सहयोगियों की सहभागिता रही।
सभी के सामूहिक सहयोग और गुरुजनों के समर्पण से बच्चों को पढ़ाई के लिए सकारात्मक वातावरण उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। इस पहल में आर्थिक सहयोग, समयदान और ज्ञानदान—तीनों का महत्व दिखाई देता है। बच्चों के भविष्य को प्राथमिकता देते हुए प्रत्येक रविवार को व्यवस्था बनाए रखने का संकल्प भी लिया जा रहा है। अगले रविवार को भी विद्यार्थियों के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं करने की तैयारी है।
ग्रामीण प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने की सराहनीय पहल
भगत देवरी में संचालित यह निःशुल्क शैक्षणिक अभियान केवल कोचिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण बच्चों के सपनों को साकार करने की दिशा में सामूहिक प्रयास है। प्रयास विद्यालय और सैनिक स्कूल में प्रवेश की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को नियमित अभ्यास, परीक्षा का अनुभव और शिक्षकों का मार्गदर्शन मिल रहा है।
समाज में अक्सर शिक्षा के अवसरों को लेकर ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच अंतर की चर्चा होती है। ऐसे में गांव में ही बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार करने की पहल उम्मीद जगाती है। यदि इस तरह के प्रयास निरंतर जारी रहते हैं, तो अनेक विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा पहचानने और आगे बढ़ने का अवसर मिल सकता है।
निःशुल्क शिक्षा प्रदान करने वाले सभी गुरुजनों को सलाम। उनका समर्पण यह साबित करता है कि सच्चा शिक्षक केवल कक्षा में पढ़ाने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि बच्चों के सपनों को अपना लक्ष्य मानकर उनके उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में योगदान देता है। भगत देवरी में शुरू हुआ यह सामूहिक प्रयास शिक्षा, सेवा और सामाजिक सहभागिता की एक प्रेरणादायी मिसाल बन रहा है।






