महासमुंद जिले के निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल सरायपाली के ओम अस्पताल में मेडिकल वेस्ट के निपटान और राम अवतार अस्पताल में आयुष्मान योजना के पालन को लेकर जांच की मांग

  • सरायपाली के ओम अस्पताल में मेडिकल वेस्ट के निपटान और राम अवतार अस्पताल में आयुष्मान योजना के पालन को लेकर जांच की माँग

राजकुमार अग्रवाल ,सरायपाली, महासमुंद। महासमुंद जिले के सरायपाली क्षेत्र में निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली और स्वास्थ्य संबंधी नियमों के पालन को लेकर सवाल उठ रहे हैं। क्षेत्र के दो निजी अस्पतालों—ओम अस्पताल और राम अवतार अस्पताल—को लेकर सामने आए आरोपों ने स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं।

ओम अस्पताल में मेडिकल वेस्ट के निपटान पर सवाल

जानकारी के अनुसार, ओम अस्पताल में मरीजों के इलाज के बाद उपयोग में लाई गई इंजेक्शन सामग्री, कॉटन, सुई और खाली बोतलों जैसे मेडिकल कचरे के निपटान को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि अस्पताल का वाहन एक मिनी ट्रक के माध्यम से इस कचरे को अस्पताल से दूर ले जाकर फेंक आता है।

यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं, तो मामला गंभीर है। उपयोग किए गए इंजेक्शन, सुई और अन्य जैव-चिकित्सीय कचरे का निपटान निर्धारित नियमों के अनुसार होना आवश्यक है। ऐसे कचरे को खुले स्थान पर फेंकना आम लोगों, सफाई कर्मचारियों और पर्यावरण के लिए जोखिम पैदा कर सकता है। स्वास्थ्य विभाग और संबंधित प्रदूषण नियंत्रण अधिकारियों को इस मामले की जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

राम अवतार अस्पताल में आयुष्मान योजना के पालन पर सवाल

वहीं, राम अवतार अस्पताल में आयुष्मान भारत योजना के नियमों के पालन को लेकर भी आरोप लगाए जा रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित दस्तावेजों की जांच आवश्यक है। स्वास्थ्य विभाग को अस्पताल में योजना के तहत मरीजों को दी जाने वाली सुविधाओं, उपचार प्रक्रिया, पात्रता और संबंधित रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच करनी चाहिए।

क्या जांच से पहले अस्पतालों को मिल जाती है सूचना?

इन मामलों के बीच स्वास्थ्य विभाग की निरीक्षण प्रक्रिया पर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि कुछ अस्पतालों में जांच की कार्रवाई से पहले ही सूचना पहुंच जाती है, जिसके कारण निरीक्षण केवल औपचारिकता बनकर रह जाता है।

यदि ऐसा हो रहा है, तो यह निगरानी व्यवस्था की गंभीर कमजोरी हो सकती है। हालांकि, जांच से पहले सूचना दिए जाने के आरोपों की पुष्टि होना अभी बाकी है। इसलिए विभाग को औचक निरीक्षण, दस्तावेजों की जांच और मौके पर उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष कार्रवाई करनी चाहिए।

  1. स्वास्थ्य विभाग से उठे ये सवाल

– क्या ओम अस्पताल में जैव-चिकित्सीय कचरे का निपटान निर्धारित नियमों के अनुसार किया जा रहा है?
– क्या राम अवतार अस्पताल में आयुष्मान योजना के सभी नियमों का पालन हो रहा है?
– क्या संबंधित अस्पतालों का नियमित और औचक निरीक्षण किया जा रहा है?
– यदि अनियमितताएं मिलती हैं, तो जिम्मेदारों के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी?

अब देखना यह है कि स्वास्थ्य विभाग इन आरोपों को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या दोनों अस्पतालों की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति जनता के सामने लाता है। मरीजों की सुरक्षा और सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं की पारदर्शिता सुनिश्चित करना विभाग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

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