पाँच महीने से राशन नहीं मिलने पर भड़के ग्रामीण, दुकान में जड़ा ताला

जियाउल खान ,लखनपुर सरगुजा ।


  • गोरता में राशन वितरण में अनियमितता का आरोप, सैकड़ों ग्रामीणों ने तहसील पहुंचकर सौंपा ज्ञापन

  • करीब 400 हितग्राहियों को महीनों से राशन नहीं मिलने का दावा, 25 लाख रुपये के राशन की हेराफेरी का आरोप

  • पीओएस मशीन लेकर दुकान से अलग राशन तौलते दिखा युवक, कैमरा देखते ही भागा

लखनपुर। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत गरीब परिवारों को मिलने वाला सरकारी राशन उनके भरण-पोषण का प्रमुख सहारा है। लेकिन जब इसी राशन के लिए हितग्राहियों को महीनों तक इंतजार करना पड़े और वितरण में अनियमितता के आरोप सामने आएं, तो ग्रामीणों का आक्रोशित होना स्वाभाविक है। ऐसा ही मामला सरगुजा जिले के लखनपुर जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत गोरता में सामने आया है। यहां पांच महीने से राशन नहीं मिलने और वितरण में कथित गड़बड़ी से नाराज ग्रामीणों ने राशन दुकान में ताला जड़ दिया। दुकान के सामने जमकर विरोध प्रदर्शन करने के बाद सैकड़ों ग्रामीण तहसील कार्यालय पहुंचे और तहसीलदार को ज्ञापन सौंपकर जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

राशन नहीं मिलने से बढ़ा आक्रोश, दुकान के सामने किया प्रदर्शन

ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत गोरता में संचालित राशन दुकान में वितरण व्यवस्था लंबे समय से मनमाने तरीके से चल रही है। हितग्राहियों को समय पर राशन नहीं दिया जा रहा है, जबकि कई लोगों को महीनों से खाद्यान्न के लिए भटकना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने राशन दुकान संचालक पर गंभीर लापरवाही और वितरण में अनियमितता के आरोप लगाते हुए विरोध जताया।

विरोध प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण राशन दुकान के सामने एकत्रित हो गए। आक्रोशित ग्रामीणों ने दुकान में ताला लगा दिया, जिसके बाद स्थिति को देखते हुए दुकान संचालक को दुकान बंद करनी पड़ी। ग्रामीणों का कहना था कि बार-बार मांग करने के बावजूद उन्हें राशन नहीं मिल रहा है। इससे गरीब परिवारों के सामने भोजन की व्यवस्था करना मुश्किल हो रहा है।

900 राशन कार्डधारी, 400 हितग्राहियों को राशन नहीं मिलने का आरोप

ग्रामीणों के मुताबिक, ग्राम पंचायत गोरता में लगभग 900 राशन कार्डधारी हितग्राही हैं। इनमें से करीब 400 हितग्राहियों को कई महीनों से राशन नहीं मिलने का आरोप लगाया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि राशन देने के नाम पर कई बार उनसे अंगूठा लगवा लिया जाता है, लेकिन जब खाद्यान्न मांगने पहुंचते हैं तो राशन खत्म होने की बात कहकर वापस भेज दिया जाता है।

ग्रामीणों ने राशन दुकान संचालक पर करीब 25 लाख रुपये के राशन की कथित हेराफेरी का भी आरोप लगाया है। हालांकि, इस राशि और खाद्यान्न की कथित हेराफेरी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। मामले की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

बताया जा रहा है कि ग्राम पंचायत गोरता की राशन दुकान का संचालन महामाया स्वयं सहायता समूह के नाम से किया जाता है। ग्रामीणों का आरोप है कि दुकान नियमित रूप से नहीं खोली जाती और महीने के अंतिम दिनों में राशन वितरण किए जाने से कई हितग्राही समय पर खाद्यान्न प्राप्त नहीं कर पाते। ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर राशन वितरण व्यवस्था दुरुस्त करने की मांग की है।

वाहनों में सवार होकर तहसील पहुंचे ग्रामीण, कार्रवाई की मांग

राशन दुकान के सामने विरोध प्रदर्शन के बाद ग्रामीणों का आक्रोश और बढ़ गया। बड़ी संख्या में ग्रामीण पिकअप सहित अन्य वाहनों से तहसील कार्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने तहसीलदार लखनपुर अमन चतुर्वेदी के समक्ष आवेदन सौंपकर मामले में उचित कार्रवाई की मांग की।

तहसीलदार अमन चतुर्वेदी ने मामले को संज्ञान में लेते हुए इस संबंध में अनुविभागीय अधिकारी राजस्व से चर्चा करने की बात कही। अब आगे की कार्रवाई और जांच को लेकर प्रशासन के स्तर पर क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर ग्रामीणों की नजरें टिकी हुई हैं।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि मामले में उचित कार्रवाई नहीं होती और हितग्राहियों को नियमित रूप से राशन मिलना शुरू नहीं होता, तो वे कलेक्टर के समक्ष भी शिकायत लेकर पहुंचेंगे।

दुकान से अलग राशन तौलते दिखा युवक, कैमरा देखते ही भागा

मामले के दौरान एक और घटनाक्रम सामने आया, जिसने राशन वितरण की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए। जब राशन दुकान के सामने ग्रामीणों का विरोध प्रदर्शन जारी था, उसी दौरान एक युवक पीओएस मशीन लेकर दुकान से अलग स्थान पर राशन तौलता दिखाई दिया।

बताया गया कि युवक से इस संबंध में जानकारी लेने की कोशिश की गई, लेकिन कैमरा देखते ही वह बिना कुछ बताए वहां से भाग गया। इस घटनाक्रम के बाद यह सवाल उठने लगा कि दुकान से अलग स्थान पर राशन तौलने की व्यवस्था किसके निर्देश पर और किस उद्देश्य से की जा रही थी। हालांकि, इस गतिविधि के पीछे का वास्तविक कारण अभी स्पष्ट नहीं है। इसकी भी जांच किए जाने की जरूरत है।

खाद्य विभाग के अधिकारी का पक्ष नहीं मिल सका

मामले में खाद्य निरीक्षक सतपाल सिंह से संपर्क कर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन संपर्क नहीं हो पाने के कारण उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो सका। राशन वितरण में अनियमितता, हितग्राहियों को खाद्यान्न नहीं मिलने और कथित हेराफेरी के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।

अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर गोरता के गरीब हितग्राहियों को उनके हक का राशन कब मिलेगा? ग्रामीणों के विरोध प्रदर्शन और तहसील कार्यालय में शिकायत के बाद अब प्रशासनिक जांच तथा कार्रवाई का इंतजार है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई के साथ हितग्राहियों को लंबित राशन उपलब्ध कराना भी प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए।

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