रायपुर : छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। छत्तीसगढ़ के गठन के 26 वर्ष पूरे होने पर मुख्यमंत्री ने अपने संदेश की शुरुआत ‘जय जोहार, छत्तीसगढ़ महतारी की जय!’ के उद्घोष के साथ की। उन्होंने इस गौरवपूर्ण अवसर पर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का पुण्य स्मरण करते हुए राज्य स्थापना दिवस को छत्तीसगढ़वासियों के लिए महत्वपूर्ण अवसर बताया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने बधाई संदेश में कहा, “मेरे प्यारे, भाइयों और बहनों आप सभी को छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। साथियों आज हमारा छत्तीसगढ़ अपनी स्थापना के 26 वर्ष पूरे कर रहा है। इस गौरवपूर्ण अवसर पर मैं श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी का पुण्य स्मरण करता हूँ।”
छत्तीसगढ़ के स्थापना दिवस पर मुख्यमंत्री का यह संदेश राज्य के गठन और उससे जुड़े ऐतिहासिक घटनाक्रम की याद दिलाता है। 1 नवंबर 2000 को मध्य प्रदेश से अलग होकर छत्तीसगढ़ भारत के नए राज्य के रूप में अस्तित्व में आया था। उस समय केंद्र में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली सरकार थी। राज्य निर्माण की प्रक्रिया में उनकी सरकार की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। छत्तीसगढ़ राज्य का गठन लंबे समय से चली आ रही अलग राज्य की मांग के बाद हुआ था। क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान, भौगोलिक परिस्थितियों, प्राकृतिक संसाधनों और प्रशासनिक आवश्यकताओं को देखते हुए अलग राज्य की मांग उठती रही। राज्य गठन के साथ ही रायपुर को राजधानी बनाया गया और छत्तीसगढ़ ने एक अलग प्रशासनिक पहचान के साथ अपनी विकास यात्रा शुरू की।
आज राज्य अपनी स्थापना के 26 वर्ष पूरे कर चुका है। इस दौरान छत्तीसगढ़ ने प्रशासनिक व्यवस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, उद्योग, बुनियादी ढांचे और अन्य क्षेत्रों में अनेक बदलाव देखे हैं। राज्य के अलग-अलग हिस्सों की सामाजिक और सांस्कृतिक विविधता उसकी विशेष पहचान रही है। बस्तर की आदिवासी संस्कृति से लेकर सरगुजा की लोकपरंपराओं और मैदानी क्षेत्रों के त्योहारों तक, छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत राज्य स्थापना दिवस को विशेष महत्व देती है। राज्य स्थापना दिवस केवल प्रशासनिक गठन की वर्षगांठ नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की पहचान, इतिहास और सांस्कृतिक परंपराओं को याद करने का अवसर भी है। प्रदेश की लोककला, लोकगीत, लोकनृत्य, पारंपरिक व्यंजन और स्थानीय बोलियां छत्तीसगढ़ की विशिष्ट पहचान को सामने लाती हैं।







