जियाउल खान ,लखनपुर सरगुजा ।
कोयला माफिया सक्रिय
निम्हा–दमाउकुंड के जंगल में मिला कोयले का बड़ा भंडार, बाइकर्स गैंग का बताकर कार्रवाई की बात; बड़े वाहनों के पहियों के निशान ने खड़े किए कई सवाल
आखिर शासन की जमीन पर किसने जमा किया कोयला? कहां से आया और कहां खपाने की थी तैयारी, पुलिस और प्रशासन की जांच पर टिकी निगाहें
सरगुजा जिले में कोयले के अवैध कारोबार का मामला एक बार फिर चर्चा में है। शासन की जमीन और जंगलों का इस्तेमाल कर बड़े पैमाने पर कोयले का भंडारण किए जाने का मामला लखनपुर विकासखंड एवं उदयपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत निम्हा–दमाउकुंड जंगल से सामने आया है। जंगल के बीच शासकीय भूमि पर भारी मात्रा में कोयला डंप किए जाने से कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि यह कोयला अवैध रूप से परिवहन और भंडारण किया गया है, तो इससे शासन को लाखों रुपये के राजस्व नुकसान की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर जंगल के बीच इतनी बड़ी मात्रा में कोयला किसने जमा किया? यह कोयला कहां से लाया गया था और इसे आगे कहां भेजने की तैयारी थी? क्या इस पूरे कारोबार के पीछे कोई संगठित नेटवर्क काम कर रहा है? फिलहाल इन सवालों का जवाब सामने नहीं आया है।
मामले को लेकर वन विकास निगम के अधिकारी से चर्चा करने पर बताया गया कि यह कोयला बाइकर्स गैंग द्वारा जमा किया गया है तथा इसे जब्त कर ले जाने की कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, मौके पर बड़े वाहनों के पहियों के निशान मिलने से इस पूरे मामले की कहानी पर सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि कोयला बाइकर्स गैंग द्वारा जमा किया गया था, तो जंगल के भीतर बड़े वाहनों की आवाजाही किस उद्देश्य से हुई? क्या रात के अंधेरे में बड़े वाहनों के जरिए कोयले का परिवहन किया जा रहा था? इन पहलुओं की जांच जरूरी है।
बताया जा रहा है कि मामले की सूचना पुलिस थाना और तहसील कार्यालय लखनपुर को भी दी जा चुकी है। इसके बावजूद अब तक इस बात का स्पष्ट खुलासा नहीं हो पाया है कि कोयले का वास्तविक मालिक कौन है और इसे किसके संरक्षण में जंगल के भीतर जमा किया गया था।
गौरतलब है कि सरगुजा में कोयला कारोबार से शासन को बड़े पैमाने पर राजस्व प्राप्त होता है। ऐसे में यदि कोयले का अवैध उत्खनन, परिवहन या भंडारण किया जा रहा है, तो यह न केवल राजस्व को नुकसान पहुंचाने का मामला है, बल्कि सरकारी भूमि के दुरुपयोग और वन क्षेत्र की सुरक्षा से भी जुड़ा गंभीर विषय है।
ठंड का मौसम शुरू होते ही क्षेत्र में एक बार फिर कथित बाइकर्स गैंग और कोयले के अवैध कारोबार से जुड़े लोगों की गतिविधियों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। जंगल के बीच भारी मात्रा में कोयले का भंडारण और बड़े वाहनों के निशान किसी बड़े नेटवर्क की आशंका को जन्म दे रहे हैं। हालांकि, इस आशंका की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
अब कार्रवाई पर टिकी निगाहें
सबसे अहम सवाल यह है कि क्या पुलिस, राजस्व विभाग और वन विकास निगम संयुक्त रूप से मामले की जांच कर कोयले के स्रोत, वास्तविक मालिक और परिवहन में शामिल लोगों का पता लगाएंगे? क्या इस मामले में सिर्फ कोयला जब्त कर औपचारिकता पूरी होगी या फिर इस अवैध कारोबार के पीछे जुड़े लोगों तक भी जांच पहुंचेगी?
फिलहाल निम्हा–दमाउकुंड जंगल में मिला कोयले का भंडार प्रशासनिक कार्रवाई और जवाबदेही की प्रतीक्षा कर रहा है। अब देखना होगा कि शासन की जमीन पर जमा इस कोयले के मामले में जिम्मेदारों की पहचान होती है या फिर जंगल के भीतर चल रहे इस कथित काले कारोबार पर सवाल यूं ही बने रहेंगे।









