मुंगेली : पक्की सड़क, न नाली; ‘सड़क में नाली है या नाली में सड़क’ समझना मुश्किल

मुंगेली(संदीप यादव)। जिला बनने के बाद मुंगेली शहर का विस्तार तो तेजी से हुआ, लेकिन बुनियादी सुविधाओं के नाम पर लोगों को सिर्फ धोखा मिला है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण शहर की ‘सोनकर सेल्स मुंगेली कॉलोनी’ और ‘सोनकर सिटी’ हैं। आज इन कॉलोनियों के हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि यहाँ रहने वाले लोग खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। कॉलोनी में बुनियादी ढांचे का इस कदर अभाव है कि यह अंतर कर पाना मुश्किल हो गया है कि यहाँ सड़क में नाली बनी है या नाली में ही सड़क बना दी गई है।


  • बड़े वादे, खोखली हकीकत

लगभग 10 से 12 साल पहले, जब इन कॉलोनियों को काटा जा रहा था, तब जमीन विक्रेताओं और कॉलोनाइजर्स ने खरीदारों को सुनहरे सपने दिखाए थे। ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए चौड़ी पक्की सड़कें, शानदार ड्रेनेज सिस्टम और पानी निकासी की मुकम्मल व्यवस्था करने के बड़े-बड़े वादे किए गए थे। इन वादों के झांसे में आकर लोगों ने अपनी जिंदगी भर की गाढ़ी कमाई यहाँ आशियाना बनाने में लगा दी। लेकिन कॉलोनी बसने के इतने सालों बाद भी न तो यहाँ पक्की नाली बनी और न ही पक्की सड़क का निर्माण हुआ।


  • जलभराव और ड्रेनेज सिस्टम फेल

कॉलोनियों में पानी निकासी (ड्रेनेज) की कोई व्यवस्था नहीं है। मामूली सी बारिश होते ही पूरी कॉलोनी जलमग्न हो जाती है। सड़कों पर घुटनों तक पानी भर जाता है, जिससे यह पूरा इलाका एक तालाब की शक्ल अख्तियार कर लेता है। गंदा पानी लोगों के घरों के सामने जमा रहता है, जिससे संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा लगातार बना हुआ है। बच्चे और बुजुर्गों का पैदल चलना भी दूभर हो चुका है।


  • 14 साल बाद भी विकास से कोसों दूर

गौरतलब है कि 12 जनवरी 2012 को मुंगेली को जिला का दर्जा मिला था। आज जिला बने 14 वर्ष का लंबा समय बीत चुका है। जिला बनने के बाद शहर में तेजी से अवैध और अर्ध-विकसित कॉलोनियां काटी गईं, जिनमें से ये कॉलोनियां भी एक हैं।

इन कॉलोनियों को अस्तित्व में आए भी 10 से 12 साल से ज्यादा का समय हो गया है, लेकिन आज भी यहाँ की स्थिति जस की तस बनी हुई है।

प्रशासन और कॉलोनाइजर की लापरवाही का खामियाजा यहाँ के सैकड़ों परिवार भुगत रहे हैं। स्थानीय निवासियों ने कई बार इसकी शिकायत की, लेकिन आज तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

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