भोपाल/रायपुर:मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में कार्यरत लाखों शिक्षकों के लिए इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। स्कूल शिक्षा विभाग में अब प्रमोशन पाने के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पास करना अनिवार्य किया जा सकता है। मध्य प्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम-2025 के तहत विभाग द्वारा उठाए गए एक कदम ने पूरे प्रदेश के शिक्षकों में हड़कंप मचा दिया है। इस नियम का असर अब पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ पर भी पड़ना तय माना जा रहा है।
मध्य प्रदेश में क्या है पूरा विवाद?
जानकारी तलब: लोक शिक्षण संचालनालय की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के बाद भोपाल संभाग के संयुक्त संचालक ने सभी DEOs को टेट उत्तीर्ण शिक्षकों की जानकारी प्रमोशन के लिए मंगाई है।
TET का ब्यौरा: इस पत्र में कार्यरत उन सहायक और प्राथमिक शिक्षकों की सूची मांगी गई है जो TET उत्तीर्ण हैं।
शिक्षकों में भ्रम: आदेश के बाद से लगभग 1.5 लाख शिक्षकों में यह डर बैठ गया है कि बिना TET के उनका प्रमोशन रोक दिया जाएगा।
संगठनों का विरोध: शासकीय शिक्षक संगठनों का कहना है कि पुरानी भर्ती वाले शिक्षकों पर प्रमोशन के समय यह शर्त थोपना पूरी तरह से अव्यवहारिक और अन्यायपूर्ण है।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश और सरकार का रुख
ऐतिहासिक फैसला: सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक आदेश में स्पष्ट किया था कि शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए सेवारत शिक्षकों को भी TET पास करना होगा।समय सीमा: कोर्ट ने इसके लिए अगस्त 2028 तक का समय दिया है।
सरकार की याचिका: मध्य प्रदेश का स्कूल शिक्षा विभाग करीब 70 हजार पुराने शिक्षकों को इससे राहत दिलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दाखिल करने की तैयारी भी कर रहा है।
- छत्तीसगढ़ में भी मचेगी हलचल; क्यों पड़ेगा सीधा असर?
मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक नियम काफी हद तक एक-दूसरे से प्रभावित रहते हैं। छत्तीसगढ़ के शिक्षक भी इस नए घटनाक्रम को लेकर चिंतित हैं क्योंकि:
समान नीति: यदि मध्य प्रदेश में प्रमोशन के लिए TET को पूरी तरह अनिवार्य विधिक अमलीजामा पहनाया जाता है, तो छत्तीसगढ़ में भी इसे लागू करने का दबाव बढ़ेगा
प्रमोशन पर ब्रेक: छत्तीसगढ़ में भी हजारों सहायक शिक्षक ऐसे हैं जिन्होंने पात्रता परीक्षा लागू होने से पहले नौकरी पाई थी। नियम लागू होने पर उनके प्रमोशन रुक सकते हैं।
नियमों में बदलाव की सुगबुगाहट: छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग भी राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) और सुप्रीम कोर्ट के गाइडलाइंस के तहत प्रमोशन नियमों की समीक्षा कर सकता है।
शिक्षक संगठनों की मांग
शिक्षक संघों ने कड़ा रुख अपनाते हुए मांग की है कि विभाग तुरंत इस पर अपनी स्थिति स्पष्ट करे। उनका कहना है कि जो शिक्षक 20-25 सालों से सेवाएं दे रहे हैं, उन्हें इस उम्र में दोबारा परीक्षा के दलदल में धकेलना उनके मानसिक स्वास्थ्य और करियर के साथ खिलवाड़ है।






