सिलयारी कुरूद अखरा पारा स्कूल में बिछा चिकनी मिट्टी का दलदल

  •  फिसलकर चोटिल हो रहे नौनिहाल

धरसींवा( विद्याभूषण वर्मा धरसींवा )। मानसून की शुरुआत के साथ ही क्षेत्र के कई सरकारी स्कूलों की व्यवस्था की पोल खुलने लगी है। भारी बारिश के चलते कई जगह परिसरों में जलभराव और कीचड़ की स्थिति बन गई है, जिससे सबसे ज्यादा परेशानी नन्हे-मुन्ने बच्चों को उठानी पड़ रही है। इस समस्या से जूझ रहे स्कूलों में सबसे खराब स्थिति धरसींवा ब्लॉक के नवीन पूर्व माध्यमिक विद्यालय अखरा पारा कुरूद-सिलयारी की सामने आई है, जहां जिम्मेदारों की घोर लापरवाही के कारण बच्चों और शिक्षकों का रोजाना स्कूल आना-जाना किसी आफत से कम नहीं रहा है। अखरा पारा स्थित इस स्कूल के मुख्य गेट के बाहर ही बदहाली का नजारा साफ देखा जा सकता है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार स्कूल परिसर के प्रवेश द्वार पर गड्ढों और जलभराव की समस्या को दूर करने के नाम पर मुरम डाली जानी थी, लेकिन जिम्मेदारों ने मुरम की जगह भारी मात्रा में चिकनी मिट्टी डंप करवा दी। लगातार हो रही बारिश के कारण यह मिट्टी अब खतरनाक कीचड़ और दलदल में तब्दील हो चुकी है। सुबह जब छोटे-छोटे नौनिहाल पढ़ाई के लिए स्कूल पहुंचते हैं, तो उन्हें गेट पर ही इस गंभीर मुसीबत का सामना करना पड़ता है। मुख्य द्वार पर बिछी इस चिकनी मिट्टी के कारण आए दिन बच्चे फिसलकर गिर रहे हैं और कई बच्चे हादसों का शिकार होकर चोटिल भी हो चुके हैं। फिसलन इतनी अधिक है कि रास्ते से गुजरते ही बच्चों की स्कूल ड्रेस और बैग पूरी तरह कीचड़ में सन जाते हैं, जिसके चलते उन्हें उसी गंदे कपड़ों में दिनभर पढ़ाई करने पर मजबूर होना पड़ता है। कई बार तो बच्चे गिरने और घायल होने के बाद रोते हुए वापस अपने घर लौटने को विवश हो जाते हैं।

इस पूरी समस्या पर स्कूल के प्रधान पाठक ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि रास्ते में फैली चिकनी मिट्टी की वजह से सिर्फ बच्चे ही नहीं, बल्कि स्कूल के शिक्षक भी बेहद परेशान हैं। दोपहिया वाहनों से आने वाले अध्यापकों के लिए भी गेट पार करना किसी खतरे से खाली नहीं रहता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस संबंध में संबंधित अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों को कई बार अवगत कराया जा चुका है, लेकिन इसके बावजूद अब तक स्थिति को सुधारने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

इधर, स्थानीय निवासियों और अभिभावकों ने प्रशासन की इस घोर उदासीनता पर भारी नाराजगी जताई है। लोगों का कहना है कि जब शिक्षा के मंदिर तक पहुंचने का रास्ता ही इतना बदहाल और जानलेवा रहेगा, तो बच्चे कैसे पढ़ाई करेंगे। अभिभावकों ने पुरजोर मांग की है कि स्कूल के मुख्य गेट और परिसर से तत्काल इस चिकनी मिट्टी को हटवाया जाए तथा वहां ढलान और मुरम की उचित व्यवस्था की जाए, ताकि बच्चों को रोज-रोज की इस मुसीबत और हादसों से जल्द से जल्द राहत मिल सके।

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