- डेढ़ साल पुराने मामले में फैसला, पीड़िता को 6 लाख मुआवजा; वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर दोष सिद्ध
रायगढ़(दीपक अवस्थी)। तमनार थाना क्षेत्र में डेढ़ वर्ष पहले नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में विशेष पॉक्सो न्यायालय ने आरोपी को कठोरतम सजा सुनाई है। विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो) शहाबुद्दीन कुरैशी ने आरोपी त्रिभुवन अगरिया को शेष प्राकृतिक जीवनकाल तक आजीवन कारावास की सजा सुनाते हुए 5 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया है। न्यायालय ने पीड़िता को पीड़ित प्रतिकर योजना के तहत 6 लाख रुपए की क्षतिपूर्ति देने के भी निर्देश दिए हैं।
अभियोजन के अनुसार, आरोपी ने बीमार नाबालिग बालिका को इलाज कराने का झांसा देकर अपने साथ ले गया। इसके बाद उसे सुनसान स्थान पर झाड़ियों में ले जाकर दुष्कर्म किया। घटना के बाद तमनार थाना में अपराध दर्ज कर पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू की।
मामले की विवेचना तत्कालीन थाना प्रभारी एवं निरीक्षक आशीर्वाद रहटगांवकर ने की। जांच के दौरान पुलिस ने पीड़िता के बयान, चिकित्सकीय परीक्षण और अन्य वैज्ञानिक व तकनीकी साक्ष्य जुटाकर न्यायालय में मजबूत तरीके से प्रस्तुत किए। इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर अभियोजन आरोपी के खिलाफ अपराध सिद्ध करने में सफल रहा।
सुनवाई पूरी होने के बाद न्यायालय ने आरोपी को पॉक्सो अधिनियम की धारा 4(2) के तहत दोषी ठहराया और उसे शेष प्राकृतिक जीवनकाल तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 5 हजार रुपए का अर्थदंड लगाया। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि पीड़िता को हुई मानसिक, शारीरिक और सामाजिक क्षति को देखते हुए उसे पीड़ित प्रतिकर योजना के तहत 6 लाख रुपए की सहायता राशि प्रदान की जाए।
उल्लेखनीय है कि इस मामले की विवेचना करने वाले तत्कालीन थाना प्रभारी निरीक्षक आशीर्वाद रहटगांवकर उत्कृष्ट अनुसंधान के लिए पूर्व में केंद्रीय गृह मंत्री पदक से सम्मानित हो चुके हैं। इस प्रकरण में भी उनके द्वारा जुटाए गए वैज्ञानिक साक्ष्य और निष्पक्ष विवेचना ने आरोपी को सजा दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
यह फैसला न केवल पीड़िता को न्याय दिलाने वाला है, बल्कि महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध अपराध करने वालों के लिए भी स्पष्ट संदेश है कि ऐसे जघन्य अपराधों में दोषियों को कानून के तहत कठोर सजा से बचना संभव नहीं है।






