मुलभुत सुविधाओं की आंसू रो रहा ग्राम पंचायत नरगोड़ा आजादी के बाद भी बेबस है ग्रामीण 

  • विकास गायब, जर्जर सड़क और अधूरी नालियों के भरोसे ग्रामवासी

  • जनप्रतिनिधि केवल चुनाव के समय ही आते है नजर

बिलासपुर/सीपत :- मस्तूरी विकास खंड के अंतर्गत सीपत एनटीपीसी के निकट ग्राम पंचायत नरगोड़ा में विकास कार्यों का हाल बेहाल है, यहा गाँव की सड़कों और नालियों की दुर्दशा देखकर साफ अंदाजा लगाया जा सकता है। गांव में मूलभूत सुविधाओं का ही इतना बुरा हाल है। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले 50 वर्षों में गाँव की स्थिति में कोई खास सुधार नहीं आया है, एक तरफ जहाँ 15वें वित्त और मनरेगा मद से पंचायतों में विकास के लिए लाखों करोड़ो रुपये के फंड आने का दावा किया जाता है, वहीं नरगोड़ा ग्राम पंचायत में ज़मीनी हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत है। स्थानीय जनप्रतिनिधि, और उच्च पद मे बैठे अधिकारीयो की बेरुखी और निष्क्रियता से ग्रामीणों का हाल बेहाल है। शासन के फंड का कोई हिसाब कहाँ है?ओ केवल कागजो मे तैर रहा है!

ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव जीतते ही जनप्रतिनिधि गाँव की सुध लेना ही भूल जाते हैं। गाँव में यहां तक एक पंचायत भवन तक का निर्माण अधूरा पड़ा है, जिससे पंचायत से जुड़े कामकाज के लिए ग्रामीणों को भटकना पड़ता है। सवाल यह उठ रहा है कि हर साल आने वाली विकास राशि और मनरेगा के बजट का आखिर उपयोग कहाँ हो रहा है? ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की मिलीभगत के कारण विकास केवल कागजों तक ही सीमित रह गया है।

2019 मे नाली निर्माण के लिए खुदे आज भी जस के तस पड़े हुए है,साथ ही ‘आवास पारा’ का जर्जर सड़क

पंचायत की उदासीनता का सबसे बड़ा प्रमाण है,’आवास पारा मार्ग’ जो पोड़ी और ठरकपुर को जोड़ने वाले इस मुख्य मार्ग पर मिट्टी डाल दिए जाने के कारण सड़क कीचड़ और दलदल में तब्दील हो चुकी है। आए दिन राहगीर और स्कूली बच्चे दुर्घटना के शिकार हो रहे हैं।स्थिति इतनी खराब है कि आपातकालीन वाहनों का पहुँचना भी मुश्किल हो जाता है। रोड मे कीचड होने के कारण दो दिन पूर्व एम्बुलेंस फस गया था जो ग्रामीणों के सहयोग से निकाला गया हद तो तब हो गई जब वर्ष 2019 से नाली निर्माण के नाम पर खुदाई करके काम को अधूरा छोड़ दिया गया है । सालों बीत जाने के बाद भी पंचायत व प्रशासन ने इस अधूरी नाली को पूरा कराने की ज़हमत नहीं उठाई है । परिणाम स्वरूप गंदा पानी सड़कों पर फैल रहा है और पीने के पानी की टंकी व किल्लत जैसी समस्याओं पर भी कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।

ग्रामीणों ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की कार्यशैली पर नाराजगी व्यक्त करते हुए जल्द से जल्द इन समस्याओं के निराकरण की माँग की है।

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