बिलासपुर में अपराधियों का ‘बीट चक्रव्यूह’ तैयार, 48 बाइक… 24 घंटे निगरानी…हर गली-मोहल्ले पर अब पुलिस की सीधी नजर का दावा

  • डीआईजी-एसएसपी रजनेश सिंह ने 48 हाई-विजिबिलिटी बीट मोटरसाइकिलों को दिखाई हरी झंडी, अपराध नियंत्रण की नई रणनीति लागू

बिलासपुर (कमलकांत पाटनवार) :-बिलासपुर में अपराधियों, हिस्ट्रीशीटरों, नशा कारोबारियों, जुआ-सट्टा संचालकों और चेन स्नेचरों के लिए अब हर सड़क, हर गली और हर मोहल्ला पहले जैसा आसान नहीं रहेगा। जिला पुलिस ने बेसिक पुलिसिंग को नई धार देते हुए पूरे जिले में 48 विशेष बीट मोटरसाइकिलों को मैदान में उतार दिया है। लाल-नीली बत्ती, वायरलेस और सायरन से लैस ये बाइक अब चौबीसों घंटे अलग-अलग बीट क्षेत्रों में लगातार गश्त करेंगी और हर गतिविधि पर नजर रखेंगी।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एवं पुलिस उप महानिरीक्षक रजनेश सिंह (आईपीएस) ने पुलिस लाइन से इन 48 बीट मोटरसाइकिलों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इसके साथ ही जिले में अपराध नियंत्रण, सूचना संकलन और सामुदायिक पुलिसिंग को मजबूत बनाने के उद्देश्य से नई बीट प्रणाली को प्रभावी रूप से लागू कर दिया गया।

यह व्यवस्था केवल गश्त तक सीमित नहीं है, बल्कि हर बीट प्रभारी को अपने क्षेत्र का जिम्मेदार अधिकारी बनाया गया है, जिसकी जवाबदेही सीधे तय होगी।

अब हर बीट का होगा अपना पुलिस अधिकारी, 24 घंटे रहेगी निगरानी

नई व्यवस्था के तहत जिले के सभी थाना और चौकी क्षेत्रों को अलग-अलग बीट में विभाजित किया गया है। उपलब्ध पुलिस बल के अनुपात में प्रत्येक बीट का प्रभारी नियुक्त किया गया है, जो थाना प्रभारी के सहयोगी के रूप में पूरे क्षेत्र की गतिविधियों की जिम्मेदारी संभालेगा।

बीट प्रभारी केवल अपराध होने का इंतजार नहीं करेगा, बल्कि अपराध होने से पहले उसकी सूचना जुटाना, संदिग्ध गतिविधियों की पहचान करना और लगातार निगरानी रखना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी होगी।

बीट प्रणाली को शिफ्ट वाइज 24 घंटे संचालित किया जाएगा।

सिर्फ अपराध नहीं… हर गतिविधि पर रहेगी पुलिस की नजर

नई बीट प्रणाली के तहत पुलिस केवल अपराधियों पर नहीं, बल्कि पूरे सामाजिक तंत्र पर नजर रखेगी।

बीट प्रभारी अपने क्षेत्र में—

  • आपराधिक गतिविधियां
  • सामाजिक गतिविधियां
  •  सांस्कृतिक कार्यक्रम
  • राजनीतिक गतिविधियां
  • सांप्रदायिक गतिविधियां
  • छात्र आंदोलन
  • श्रमिक गतिविधियां
  • नए लोगों की आवाजाही
  • किरायेदारों की जानकारी
  • संदिग्ध व्यक्तियों की गतिविधियां

जैसी प्रत्येक महत्वपूर्ण सूचना एकत्र करेंगे।

जुआ, सट्टा, नशा, चोरी और चेन स्नेचिंग पर रहेगा विशेष फोकस

एसएसपी ने बीट प्रभारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि नियमित भ्रमण के दौरान विशेष रूप से इन अपराधों पर निगरानी रखी जाए—

  • जुआ और सट्टा
  • नशे का कारोबार
  • मादक पदार्थों की तस्करी
  • चोरी और नकबजनी
  • लूटपाट
  • छेड़खानी
  • चेन स्नेचिंग
  • अड्डेबाजी
  • गुंडागर्दी
  • घुमंतू एवं संदिग्ध व्यक्तियों की गतिविधियां

संवेदनशील इलाकों, स्कूलों, बाजारों, धार्मिक स्थलों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में लगातार पुलिस की मौजूदगी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

हर बीट का तैयार होगा अपना ‘क्राइम मैप’

नई व्यवस्था में प्रत्येक बीट प्रभारी अपने क्षेत्र का विस्तृत आपराधिक रिकॉर्ड तैयार करेगा।

इसके लिए अनिवार्य रूप से संधारित किए जाएंगे—

  • बीट रजिस्टर
  • बीट डायरी
  • अपराधी एवं हिस्ट्रीशीटर सूची
  • गुंडा सूची
  • जनसंपर्क रजिस्टर
  • शिकायत एवं सूचना रजिस्टर
  • किरायेदार सत्यापन रजिस्टर
  • भूमि विवाद रजिस्टर

इन दस्तावेजों के आधार पर क्षेत्रवार अपराध का विश्लेषण और निगरानी की जाएगी।अच्छे काम पर पुरस्कार, लापरवाही पर कार्रवाई

एसएसपी रजनेश सिंह ने सभी बीट प्रभारियों की विशेष ब्रीफिंग करते हुए स्पष्ट किया कि बीट प्रणाली केवल औपचारिक व्यवस्था नहीं होगी।

जो अधिकारी और कर्मचारी बेहतर सूचना संकलन, अपराध नियंत्रण और जनसंपर्क में उत्कृष्ट कार्य करेंगे, उन्हें विभागीय पुरस्कार दिया जाएगा, जबकि लापरवाही बरतने वालों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई भी होगी।

तीन स्तर पर होगी निगरानी

बीट प्रणाली की प्रभावशीलता बनाए रखने के लिए नियमित समीक्षा का भी सिस्टम तैयार किया गया है।

  • थाना प्रभारी हर सप्ताह समीक्षा करेंगे।
  • सीएसपी/एसडीओपी प्रत्येक पखवाड़े निरीक्षण करेंगे।
  • अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रत्येक माह समीक्षा करेंगे।

पूरी व्यवस्था की मॉनिटरिंग स्वयं डीआईजी-एसएसपी रजनेश सिंह लगातार करेंगे।48 बाइक बनीं नई पुलिसिंग की पहचान

बत्ती, वायरलेस और सायरन से लैस 48 नई बीट मोटरसाइकिलें अब शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक लगातार सक्रिय रहेंगी। इनका उद्देश्य केवल गश्त बढ़ाना नहीं, बल्कि पुलिस की दृश्यता मजबूत करना, अपराधों की शुरुआती सूचना जुटाना, हिस्ट्रीशीटरों और असामाजिक तत्वों पर लगातार नजर रखना, नागरिकों के साथ समन्वय बढ़ाना और सामुदायिक पुलिसिंग को नई मजबूती देना है। नई व्यवस्था में आरक्षक स्तर के जवानों को भी स्पष्ट जिम्मेदारी और क्षेत्रीय पहचान दी गई है, जिससे पुलिसिंग की जवाबदेही जमीनी स्तर तक तय हो सके।

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