- बलौदाबाजार में हुए चाकूबाजी के मामले में कोर्ट ने आरोपी को सात साल की सख्त सजा सुनाई है.
- चाकूबाजी के मामले में बड़ा फैसला
बलौदाबाजार : कसडोल थाना क्षेत्र में वर्ष 2024 में हुई चाकूबाजी की सनसनीखेज घटना में न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया है. तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश विवेक गर्ग की अदालत ने हत्या के प्रयास के मामले में आरोपी किशन साहू को दोषी करार देते हुए सात वर्ष के कठोर कारावास और एक हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है. इसके अलावा मारपीट के मामले में एक वर्ष के कारावास और एक हजार रुपए के अतिरिक्त अर्थदंड से भी दंडित किया गया है.शासन की ओर से मामले की पैरवी लोक अभियोजक थानेश्वर वर्मा ने की.
मोबाइल कॉल के बाद शुरू हुआ विवाद
अभियोजन के अनुसार यह घटना 30 दिसंबर 2024 की रात की है. उस दिन हिमांशु साहू अपने दोस्तों के साथ कसडोल की इंदिरा कॉलोनी में मौजूद था.इसी दौरान उसके साथी रौनक साहू के मोबाइल पर आरोपी किशन साहू का फोन आया.आरोपी ने रौनक को स्टेडियम गार्डन के पास बुलाया.रौनक अपने साथियों के साथ निर्धारित स्थान पर पहुंचा, जहां आरोपी और उसके साथी पहले से मौजूद थे. वहां पहुंचते ही दोनों पक्षों के बीच विवाद शुरू हो गया.आरोप है कि आरोपी पक्ष ने रौनक साहू के साथ अश्लील गाली-गलौज करते हुए मारपीट शुरू कर दी.
चाकूबाजी के मामले में बड़ा फैसला
सीने और पेट पर किया चाकू से हमला
अभियोजन के अनुसार विवाद के दौरान आरोपी किशन साहू ने अपने पास रखे चाकू से रौनक साहू के सीने और पेट पर वार किया.आरोप है कि वार इतने गंभीर थे कि उनका उद्देश्य जान लेना था. जब हिमांशु साहू और अन्य लोग बीच-बचाव के लिए पहुंचे तो आरोपी ने हिमांशु के पेट में भी चाकू मार दिया. वहीं बीच-बचाव कर रहे दिवाकर साहू पर भी चाकू से हमला किया गया, जिससे उसके हाथ में गंभीर चोट आई. घटना में घायल हिमांशु साहू बेहोश हो गया था और तत्काल उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया.
पुलिस ने चाकू किया बरामद
घटना की रिपोर्ट कसडोल थाने में दर्ज होने के बाद पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू की. जांच के दौरान मुख्य आरोपी किशन साहू, हिमाचल साहू और तीन अपचारी बालकों को गिरफ्तार किया गया. पुलिस ने आरोपी किशन साहू की निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त चाकू भी बरामद किया, जिसे पंच गवाहों की उपस्थिति में जब्त किया गया. जांच पूरी होने के बाद अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया.
अभियोजन पक्ष ने न्यायालय के समक्ष मजबूत साक्ष्य और गवाह प्रस्तुत किए. मेडिकल रिपोर्ट और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों से यह प्रमाणित हुआ कि आरोपियों ने घायलों पर जानलेवा हमला किया था. इन्हीं तथ्यों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषी मानते हुए सात वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। इस फैसले को कसडोल क्षेत्र में हुई गंभीर हिंसक घटनाओं के मामलों में एक महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णय माना जा रहा है-थानेश्वर वर्मा, लोक अभियोजक
18 गवाहों के बयान बने अहम साक्ष्य
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल 18 गवाहों के बयान दर्ज कराए.न्यायालय के समक्ष मेडिकल लीगल रिपोर्ट (एमएलसी), अस्पताल के उपचार संबंधी दस्तावेज और अन्य साक्ष्य भी प्रस्तुत किए गए. लोक अभियोजक थानेश्वर वर्मा ने अदालत में तर्क रखा कि आरोपी ने जान से मारने की नीयत से प्राणघातक हमला किया था.यदि घायलों को समय पर उपचार नहीं मिलता तो उनकी जान भी जा सकती थी. अदालत ने अभियोजन के साक्ष्यों और गवाहों के बयानों को विश्वसनीय मानते हुए आरोपी को हत्या के प्रयास का दोषी ठहराया.
अदालत ने सुनाई सजा
तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश विवेक गर्ग ने आरोपी किशन साहू को भारतीय न्याय संहिता की धारा 109 के तहत सात वर्ष के कठोर कारावास और एक हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया. इसके अलावा धारा 115(2) के तहत एक वर्ष के कारावास और एक हजार रुपये के अर्थदंड की सजा भी सुनाई गई.






