राजकुमार अग्रवाल ,कटंगतराई /पिथौरा:- ग्राम पंचायत कटंगतराई में शासकीय राशि के उपयोग को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत प्राप्त दस्तावेजों में ऐसे कई बिल सामने आए हैं, जिनके आधार पर पंचायत द्वारा शासकीय राशि का आहरण किए जाने का दावा किया गया है। हालांकि, जिन दुकानों के नाम से ये बिल दर्शाए गए हैं, उनमें से कई दुकानदारों का कहना है कि उन्हें ऐसे किसी बिल की जानकारी नहीं है और उन्होंने पंचायत के नाम से संबंधित सामग्री की आपूर्ति नहीं की।
आरटीआई से प्राप्त जानकारी के अनुसार, पंचायत के विभिन्न विकास कार्यों एवं सामग्री क्रय के नाम पर कई बिल प्रस्तुत कर भुगतान किया गया। दस्तावेजों की पड़ताल के दौरान जब संबंधित दुकानदारों से संपर्क किया गया, तो कुछ दुकानदारों ने स्पष्ट रूप से बताया कि उनके प्रतिष्ठान से ऐसे बिल जारी नहीं किए गए। उनका कहना है कि न तो उन्होंने संबंधित सामग्री बेची और न ही उनके द्वारा ऐसे किसी बिल पर हस्ताक्षर या मुहर लगाई गई। यदि दुकानदारों के दावे सही पाए जाते हैं, तो मामला केवल वित्तीय अनियमितता तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि शासकीय अभिलेखों में कथित फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत कर सरकारी धन निकालने जैसे गंभीर आरोप भी सामने आ सकते हैं। ऐसे मामलों में दस्तावेजों की सत्यता, भुगतान प्रक्रिया और संबंधित अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आएगी। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत में लंबे समय से वित्तीय पारदर्शिता का अभाव है। उनका कहना है कि विकास कार्यों के नाम पर राशि तो निकाली गई, लेकिन कई कार्य या तो धरातल पर दिखाई नहीं देते या उनकी गुणवत्ता संदेह के घेरे में है। आरटीआई से मिले दस्तावेजों के बाद ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की है।
जानकारों का मानना है कि यदि किसी दुकान के नाम से उसकी जानकारी या सहमति के बिना बिल तैयार कर भुगतान प्राप्त किया गया है, तो यह सरकारी धन के दुरुपयोग का गंभीर मामला हो सकता है। ऐसे मामलों में संबंधित बिल, भुगतान वाउचर, बैंक लेन-देन, जीएसटी विवरण (यदि लागू हो) तथा सामग्री की वास्तविक आपूर्ति की विस्तृत जांच आवश्यक होती है।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, जनपद पंचायत और संबंधित विभागों से मांग की है कि पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही जिन अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध हो, उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए ताकि पंचायत व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहे और शासकीय धन का दुरुपयोग रोका जा सके। अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि आरटीआई से प्राप्त दस्तावेजों और दुकानदारों के बयानों की पुष्टि जांच में हो जाती है, तो ग्राम पंचायत कटंगतराई में करोड़ों नहीं तो लाखों रुपये के शासकीय व्यय की जांच का दायरा और भी व्यापक हो सकता है। फिलहाल मामले की आधिकारिक जांच और प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार है।






