नई दिल्ली।आठवें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर दिल्ली में हुई अहम बैठक में ऑल इंडिया NPS एम्प्लॉइज फेडरेशन (AINPSEF) ने केंद्रीय शिक्षकों की तरफ से सरकार के सामने बड़ा प्रपोजल रख दिया है। इसमें सबसे बड़ी मांग रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाकर 65 साल करने और पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली है। अगर वेतन आयोग इन सिफारिशों को हरी झंडी देता है तो देशभर के लाखों सरकारी शिक्षकों की सैलरी, भत्ते और सेवा शर्तों में हिस्टोरिकल बदलाव देखने को मिलेगा।
रिटायरमेंट की उम्र 65 साल और OPS बहाली पर जोर
नई दिल्ली में हुई इस बैठक में AINPSEF के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनजीत सिंह पटेल सहित केंद्रीय और नवोदय विद्यालयों के कई प्रतिनिधि मौजूद रहे। संगठन का तर्क है कि अनुभवी शिक्षकों की सेवाएं लंबे समय तक छात्रों को मिलनी चाहिए इसलिए रिटायरमेंट की उम्र मौजूदा सीमा से बढ़ाकर 65 वर्ष की जानी चाहिए। इसके साथ ही 1 जनवरी 2004 के बाद नियुक्त हुए शिक्षकों के लिए NPS या UPS के बजाय सीधे पुरानी पेंशन योजना (OPS) लागू करने की पुरजोर वकालत की गई है। देशभर में केंद्र सरकार के सभी शिक्षकों के लिए एक समान वेतन और सेवा शर्तें लागू करने का दबाव भी बढ़ाया गया है।
प्रमोशन और छुट्टियों को लेकर क्या हैं नई शर्तें?
सिर्फ पेंशन नहीं बल्कि प्रमोशन स्ट्रक्चर में भी बड़े बदलाव की मांग उठाई गई है। प्रस्ताव के मुताबिक प्रिंसिपल के 50 फीसद पद विभागीय प्रमोशन के जरिए भरे जाएं, जबकि 25 प्रतिशत पद परीक्षा कोटा से हों। साथ ही 5,400 रुपये के ग्रेड पे के साथ “हेड ऑफ सब्जेक्ट” नाम का नया पद सृजित किया जाए। वाइस प्रिंसिपल का ग्रेड पे 6,600 रुपये करने और दिल्ली सरकार के स्कूलों में वाइस प्रिंसिपल पद पर 100 प्रतिशत प्रमोशनल कोटा देने की मांग है। छुट्टियों के मोर्चे पर शिक्षकों ने साल में 14 कैजुअल लीव (CL), 30 अर्न्ड लीव (EL) और 20 मेडिकल लीव मांगी हैं। सबसे दिलचस्प मांग यह है कि अगर परिवार में केवल पुरुष शिक्षक ही नौकरी में है तो उसे भी महिलाओं की तरह चाइल्ड केयर लीव (CCL) मिलनी चाहिए।
कैशलेस मेडिकल सुविधा और आयोग का अगला कदम
स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर शिक्षकों ने सर्विस के दौरान पूरी तरह कैशलेस मेडिकल सुविधा की मांग की है। रिटायरमेंट के समय दिल्ली सरकार के शिक्षकों को अपनी सुविधानुसार DGEHS या CGHS चुनने का विकल्प देने को कहा गया है ताकि वे अपने गृह नगर में भी इलाज करा सकें। 8वें वेतन आयोग की कंसल्टेशन प्रक्रिया अभी जारी रहेगी। आयोग आने वाले दिनों में चेन्नई, चंडीगढ़, पुडुचेरी और जयपुर (31 अगस्त और 1 सितंबर) में अलग-अलग कर्मचारी संगठनों से मिलेगा। हालांकि, फिटमेंट फैक्टर को लेकर सरकार ने अभी पत्ते नहीं खोले हैं और यह तय करने की जिम्मेदारी सीधे आयोग पर छोड़ दी है।
वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने में अभी वक्त है, लेकिन केंद्रीय कर्मचारियों के बीच सबसे बड़ी चर्चा ‘फिटमेंट फैक्टर’ (Fitment Factor) को लेकर है। आखिर यह फिटमेंट फैक्टर क्या है और इससे आपकी बेसिक सैलरी में सीधा कितना उछाल आ सकता है?
फिटमेंट फैक्टर क्या है?
फिटमेंट फैक्टर वह फॉर्मूला है जिसके आधार पर केंद्रीय कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी तय की जाती है। 7वें वेतन आयोग में इसे 2.57 गुना रखा गया था, जिससे न्यूनतम सैलरी 18,000 रुपये हो गई थी। अब 8वें वेतन आयोग में कर्मचारी इसे बढ़ाकर 3.68 गुना करने की मांग कर रहे हैं। अगर सरकार इस पर सहमत होती है, तो एंट्री लेवल के कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी सीधे 26,000 रुपये पहुंच जाएगी।






