रायपुर- आज शिक्षक समुदाय के बीच सबसे ज्यादा चर्चा का अगर कोई विषय है तो वह है पदोन्नति किस आधार पर होगी? कभी शिक्षक संवर्ग के बीच प्रथम नियुक्ति तिथि, क्रमोन्नति, पूर्व सेवा गणना इत्यादि मुद्दे आपसी चर्चा के विषय रहते थे अब उसकी जगह टेट ने ले ली है । टेट के सामने बाकी भी मुद्दे नगण्य हो गये हैं। अगर बीच रास्ते कोई दो शिक्षक साथी की मुलाकात हो भी जाए तो प्रथम प्रश्न यही उठता है कि पदोन्नति किस आधार पर होगी। टेट के आधार पर या फिर वरिष्ठता के आधार पर।
पदोन्नति का आधार- शिक्षकों के बीच सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न
इस संबंध में हमारे द्वारा माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश तथा विभिन्न राज्यो द्वारा आज पर्यंत तक जारी दिशा निर्देश और अनेक शिक्षाविदों से बातचीत के आधार पर किस पद के लिए पदोन्नति का आधार क्या होगा यह जानने का प्रयास किया है।
- मिडिल स्कूल शिक्षक से व्याख्याता– मिडिल स्कूल शिक्षक से व्याख्याता पद में पदोन्नति के लिए माध्यमिक टेट, स्नातकोत्तर तथा बीएड की डिग्री अनिवार्य है।
- मिडिल स्कूल शिक्षक से मिडिल स्कूल प्रधानपाठक– मिडिल स्कूल शिक्षक से मिडिल स्कूल प्रधानपाठक के लिए माध्यमिक टेट, स्नातक तथा डीएड या बीएड अनिवार्य है।
- सहायक शिक्षक से प्राथमिक प्रधान पाठक– सहायक शिक्षक से प्राथमिक प्रधान पाठक के लिए प्राथमिक टेट और डीएड अनिवार्य है।
- सहायक शिक्षक से मिडिल स्कूल शिक्षक– सबसे ज्यादा उत्सुकता शिक्षकों के बीच इसी पदोन्नति को लेकर है ।सहायक शिक्षक से मिडिल स्कूल शिक्षक के लिए प्राथमिक और माध्यमिक दोनों टेट उत्तीर्ण होने के साथ साथ स्नातक तथा डीएड या बीएड की डिग्री होना आवश्यक है । जिस प्रकार से माध्यमिक शिक्षक से व्याख्याता में पदोन्नति के लिए आप जिस स्तर पर है उसकी शिक्षक पात्रता उत्तीर्ण होना जरूरी है ठीक उसी प्रकार से प्राथमिक टेट उत्तीर्ण सहायक शिक्षक जो माध्यमिक टेट भी उत्तीर्ण हो वही पदोन्नति के लिए पात्र होगा। क्योकि न्यायालय के आदेशानुसार सबसे पहले तो जिस स्तर मे है उस स्तर का टेट उत्तीर्ण कर स्थायी होना होगा तत्पश्चात जिस स्तर हेतु पदोन्नति होनी है उस स्तर की पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण हो तभी तो पदोन्नति पर विचार किया जाना संभव होगा।
उक्त जानकारियां न्यायालयीन आदेश व विभिन्न राज्यों द्वारा जारी किए गए दिशा निर्देशों व शिक्षाविदों से बातचीत पर आधारित है। अंतिम निर्णय और दिशा निर्देश जब तक राज्य शासन द्वारा जारी किया नहीं किया जाएगा तब तक पदोन्नति हेतु सही आधार और स्पष्टता का अभाव बना रहेगा।






