- पहली बार होगी धान खरीदी, न कार्यालय भवन न गोदाम; व्यवस्था पर उठे सवाल
घनश्याम साव ,डोंगरगांव।किसानों की सुविधा के लिए केशाल में नवीन धान खरीदी केंद्र तो शुरू किया जा रहा है, लेकिन खरीदी से पहले ही बुनियादी सुविधाओं और विद्युत लाइन शिफ्टिंग के खर्च को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित केशाल, पंजीयन क्रमांक 1250, पहले जोशीलमती सोसायटी के अंतर्गत संचालित थी। अब अलग समिति बनने के बाद इस वर्ष पहली बार केशाल में धान खरीदी होनी है। लेकिन समिति के पास अपना कार्यालय भवन और गोदाम तक नहीं है। वहीं, समिति परिसर के पास बिजली लाइन शिफ्टिंग के लिए छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी की ओर से ₹92,857 की मांग किए जाने से समिति पर अतिरिक्त वित्तीय भार का सवाल खड़ा हो गया है।
पंचायत के पुराने जर्जर भवन में चल रही समिति
केशाल में समिति के लिए अलग भवन उपलब्ध नहीं होने के कारण पंचायत के पुराने खाद्यान्न वितरण भवन का उपयोग किया जा रहा है। नया भवन बन जाने के बाद पुराना भवन अनुपयोगी पड़ा था। अब इसी जर्जर भवन में समिति का कामकाज संचालित हो रहा है। भवन की छत से बरसात का पानी टपकता है। इससे बचाव के लिए छत पर मुरुम डालकर और झिल्ली बिछाकर पानी रोकने का अस्थायी प्रयास किया गया है। यह व्यवस्था समस्या का स्थायी समाधान नहीं है।

जोशीलमती सोसायटी से अलग हुई नई समिति के पास अपने संसाधनों का भी अभाव है। फिलहाल टेबल-कुर्सी और अन्य जरूरी सामान जोशीलमती सोसायटी से लाकर काम चलाया जा रहा है। ऐसे में कार्यालय भवन, गोदाम और धान खरीदी के लिए आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था कैसे होगी, यह महत्वपूर्ण सवाल है।
बिजली लाइन शिफ्टिंग के लिए ₹92,857 की मांग..
धान खरीदी केंद्र परिसर के पास चार बिजली खंभे रास्ते में होने और बिजली के तार नीचे झूलने की समस्या सामने आई है। इससे धान से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और अन्य वाहनों की आवाजाही में परेशानी के साथ दुर्घटना की आशंका बनी हुई है। ग्रामीणों द्वारा समस्या की ओर ध्यान दिलाए जाने के बाद विद्युत विभाग ने हाल ही में मौके का सर्वे कराया था।
विद्युत विभाग के उपलब्ध बैंक संज्ञानापन प्रपत्र में 6 अक्टूबर 2026 की तारीख दर्ज है। इसमें आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित केशाल के नाम ₹92,857 की राशि दर्शाई गई है। प्रपत्र में बिजली प्रदाय के प्रभार का उल्लेख है, जबकि हस्तलिखित टिप्पणी में एलटी लाइन शिफ्टिंग की राशि का संकेत दिखाई देता है। भुगतान की अंतिम तिथि 30 अक्टूबर 2026 अंकित है।
जानकारी के अनुसार, हर्राटोला से केशाल के बीच मार्ग पर स्थित बिजली खंभों को हटाने की कार्रवाई अलग से की जानी है, जबकि समिति परिसर के पास स्थित खंभों की शिफ्टिंग के लिए यह राशि मांगी गई है। ऐसे में सवाल उठता है कि नई धान खरीदी व्यवस्था के लिए आवश्यक बिजली लाइन शिफ्टिंग का खर्च किस विभाग या संस्था को वहन करना चाहिए।
शासन की योजना, लेकिन संसाधनों की जिम्मेदारी किसकी?
जब शासन की पहल पर केशाल में नया धान खरीदी केंद्र शुरू किया जा रहा है, तो उसके लिए कार्यालय भवन, गोदाम, सुरक्षित पहुंच मार्ग और व्यवस्थित बिजली लाइन जैसी बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था पहले से क्यों नहीं की गई? समिति के पास अपना भवन और पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। ऐसे में बिजली लाइन शिफ्टिंग के लिए लगभग 93 हजार रुपये की मांग उसके सामने एक नई चुनौती बनकर आई है।
यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि पंचायत के पुराने खाद्यान्न भवन का उपयोग करने वाली समिति से बिजली लाइन शिफ्टिंग का खर्च किस आधार पर मांगा गया है। क्या इसके लिए संबंधित विभागों के बीच जिम्मेदारी तय की गई है? क्या शासन की धान खरीदी व्यवस्था के अंतर्गत इस खर्च के
लिए कोई बजट प्रावधान है? इन सवालों पर संबंधित विभागों का आधिकारिक पक्ष सामने आना जरूरी है।
धान खरीदी केवल केंद्र घोषित कर देने से सुचारु नहीं हो सकती। किसानों को अपना धान लाने और खरीदी के बाद परिवहन करने के लिए सुरक्षित मार्ग, व्यवस्थित विद्युत लाइन, कार्यालय और भंडारण की समुचित व्यवस्था भी आवश्यक है। केशाल में पहली बार धान खरीदी शुरू होने से पहले इन समस्याओं का स्थायी समाधान जरूरी है।
- अब देखना होगा कि शासन-प्रशासन और संबंधित विभाग नई समिति को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा बिजली लाइन शिफ्टिंग के खर्च को लेकर क्या निर्णय लेते हैं। किसानों की सुविधा के लिए शुरू किए जा रहे केंद्र में व्यवस्था की कमी और अतिरिक्त खर्च का बोझ अंततः किस पर पड़ेगा, इसका जवाब मिलना बाकी है।






