
- छत से टपकता पानी, एंबुलेंस और लैब तकनीशियन की कमी; सफाई से लेकर स्टाफ के आवास तक की समस्या
राजकुमार अग्रवाल,सलडीही। ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित आयुष्मान आरोग्य मंदिर सलडीही में बुनियादी सुविधाओं की कमी सामने आ रही है। करीब 30 गांवों के लोगों की स्वास्थ्य सेवाओं का जिम्मा संभालने वाले इस अस्पताल में भवन की मरम्मत से लेकर आवश्यक कर्मचारियों और संसाधनों की व्यवस्था तक कई चुनौतियां हैं। अस्पताल की छत से पानी टपकने के कारण मरम्मत कार्य की अत्यंत आवश्यकता है। वहीं, बाथरूम के दरवाजों पर दीमक लगने से भवन की स्थिति भी चिंता का विषय बनी हुई है।
छत से टपकता पानी, मरम्मत की दरकार
अस्पताल भवन की छत से पानी टपकने की समस्या के चलते मरम्मत कार्य की जरूरत है। इसके अलावा बाथरूम के दरवाजों पर दीमक लग रही है। अस्पताल में स्टोर रूम और अतिरिक्त भवन की व्यवस्था भी नहीं है, जिससे आवश्यक सामग्री के व्यवस्थित रखरखाव में परेशानी हो सकती है।
सफाई व्यवस्था प्रभावित, स्टाफ पर अतिरिक्त जिम्मेदारी
अस्पताल में नियमित सफाई कर्मचारी उपलब्ध नहीं हैं। सफाई कर्मचारी पार्ट टाइम आते हैं, जिसके कारण कई बार अस्पताल के स्टाफ को ही सफाई करनी पड़ती है। अस्पताल में स्वीपर, भृत्य और वार्ड बॉय की व्यवस्था भी नहीं है। इससे स्वास्थ्यकर्मियों पर अतिरिक्त जिम्मेदारी पड़ती है। अस्पताल में नियमित सफाई और सहायक कर्मचारियों की व्यवस्था जरूरी है, ताकि स्वास्थ्य सेवाओं के साथ स्वच्छता पर भी पर्याप्त ध्यान दिया जा सके।
स्टाफ क्वार्टर नहीं, बाउंड्रीवॉल का भी अभाव
अस्पताल में कार्यरत कर्मचारियों के लिए आवासीय क्वार्टर नहीं हैं, जबकि परिसर के पीछे पर्याप्त जगह उपलब्ध बताई जा रही है, जहां क्वार्टर का निर्माण किया जा सकता है। इसके साथ ही अस्पताल परिसर में बाउंड्रीवॉल नहीं होने से जमीन पर अवैध कब्जे की आशंका बनी हुई है। परिसर की सुरक्षा के लिए बाउंड्रीवॉल निर्माण की आवश्यकता है।
30 गांवों की जिम्मेदारी, फिर भी संसाधनों की कमी
आयुष्मान आरोग्य मंदिर छह बिस्तरों वाला अस्पताल है, जहां प्रतिमाह लगभग 5 से 10 प्रसव होने की जानकारी दी गई है। इसके बावजूद अस्पताल में एंबुलेंस की व्यवस्था नहीं है। आपातकालीन स्थिति में मरीजों को समय पर दूसरे अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस की उपलब्धता महत्वपूर्ण है। वहीं, लैब तकनीकी विशेषज्ञ नहीं होने से जांच संबंधी सुविधाओं के संचालन में भी कमी बनी हुई है।
सात कर्मचारियों के भरोसे स्वास्थ्य सेवाएं
अस्पताल में आरएमए मनीष भारद्वाज के अनुसार कुल सात कर्मचारी कार्यरत हैं, जिनमें चार नियमित और तीन एनएचएम के कर्मचारी शामिल हैं। इसके अतिरिक्त जीवनदीप समिति के माध्यम से भी कुछ कर्मचारी सेवाएं दे रहे हैं। सीमित संसाधनों के बीच अस्पताल को आसपास के करीब 30 गांवों के लोगों की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों का ध्यान रखना पड़ता है।
इन सुविधाओं की जरूरत
अस्पताल की व्यवस्था बेहतर बनाने के लिए भवन की मरम्मत, नियमित सफाई कर्मचारी, स्वीपर, भृत्य और वार्ड बॉय की नियुक्ति, लैब तकनीकी विशेषज्ञ, एंबुलेंस, स्टोर रूम, अतिरिक्त भवन, स्टाफ क्वार्टर तथा बाउंड्रीवॉल निर्माण की आवश्यकता है। इन व्यवस्थाओं से अस्पताल में कार्यरत कर्मचारियों को राहत मिलने के साथ ग्रामीणों को भी बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।
इस विषय पर संज्ञान में लिया जाएगा और स्थल का निरीक्षण किया जाएगा उसके उपरांत पूरी कोशिश की जाएगी कि उचित व्यवस्था हो सके
तारा अग्रवाल (बी एम ओ पिथौरा)






