गणपति पंडाल में छत्तीसगढ़ी त्योहारों की झलक, गांव की झोपड़ी और कमरछठ पूजा ने खींचा लोगों का ध्यान

विश्वनाथ देवांगन ,राजनांदगांव ।संस्कारधानी राजनांदगांव में गणपति बप्पा के आगमन के साथ शहर के अलग-अलग इलाकों में आकर्षक और अनोखी थीम पर गणपति पंडाल सजाए गए हैं। कहीं भव्य सजावट देखने को मिल रही है, तो कहीं सामाजिक और सांस्कृतिक संदेश देने वाली थीम लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है। इसी कड़ी में दीवानपारा स्थित फैंस क्लब बाल गणेश उत्सव समिति का गणपति पंडाल इन दिनों लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

इस पंडाल में आधुनिक सजावट और तेज-तर्रार साउंड सिस्टम के बजाय छत्तीसगढ़ की मिट्टी, संस्कृति और पारंपरिक जीवनशैली की झलक दिखाई गई है। समिति ने इस बार गांव की झोपड़ी की थीम पर पंडाल तैयार किया है। झोपड़ी के आसपास गांव के पारंपरिक वातावरण को दर्शाया गया है और गौ माता के लिए बनाए जाने वाले स्थान की झलक भी इस पंडाल में देखने को मिलती है।

पंडाल की खास बात यह है कि यहां छत्तीसगढ़ी पारंपरिक त्योहार कमरछठ की पूजा का दृश्य भी प्रस्तुत किया गया है। इस दृश्य के माध्यम से समिति ने नई पीढ़ी को छत्तीसगढ़ की लोकपरंपराओं और पारंपरिक त्योहारों से जोड़ने का प्रयास किया है। गणपति बप्पा के दर्शन के साथ लोगों को अपनी संस्कृति और गांव की पुरानी यादों की झलक भी देखने को मिल रही है।

समिति के सदस्यों के मुताबिक, हर साल उनके द्वारा छत्तीसगढ़ी संस्कृति और परंपराओं को केंद्र में रखते हुए बप्पा को विराजमान किया जाता है। इस बार भी इसी सोच के साथ पंडाल की थीम तैयार की गई है। खास बात यह है कि पंडाल में न तो अनावश्यक शोर-शराबा है और न ही बड़े साउंड सिस्टम का प्रदर्शन। शांत और पारंपरिक माहौल में श्रद्धालु बप्पा के दर्शन कर रहे हैं।

एक तरफ जहां आज का दौर आधुनिक तकनीक और AI के बढ़ते इस्तेमाल का है, वहीं दूसरी तरफ राजनांदगांव के इस गणपति पंडाल में छत्तीसगढ़ की पारंपरिक संस्कृति को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया है। यही वजह है कि पंडाल को देखने और गणपति बप्पा के दर्शन करने के लिए रोजाना सैकड़ों की संख्या में लोग पहुंच रहे हैं।

कुल मिलाकर, दीवानपारा का यह गणपति पंडाल सिर्फ धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ी संस्कृति, परंपरा और गांव के जीवन से जुड़ी यादों को सहेजने की एक खूबसूरत पहल के रूप में सामने आया है।

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