डेनमार्क से झिरका तक: दंतेवाड़ा का ग्रामीण पर्यटन बना “चेन्दरू पुरस्कार” की मिसाल

*AG खबर दंतेवाड़ा* *ब्रजेश पांडेय* दंतेवाड़ा।छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा *राज्योत्सव 2026* में शुरू किए जा रहे *‘‘चेन्दरू राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार’’* की असली झलक अब दंतेवाड़ा के झिरका गांव में दिखने लगी है।

झिरका गांव में पहली बार डेनमार्क से 4 विदेशी पर्यटक पहुंचे। स्थानीय पर्यटन समिति और ग्रामीणों ने उनका पारंपरिक बांस के मुकुट और गाजे-बाजे के साथ स्वागत किया। मेहमानों ने जंगल के बीच बांस-छप्पर से बने प्रवेश द्वार और हट को भी देखा, जिसे ग्रामीणों ने खुद तैयार किया है।

भ्रमण के दौरान विदेशी मेहमानों ने बस्तर की प्रसिद्ध *चापड़ा चटनी* पत्तों पर चखी और महुआ की परंपरा को समझा। आदिवासी वेशभूषा में ग्रामीणों के साथ उनकी तस्वीरें पर्यटन को नई पहचान दे रही हैं।

*”चेन्दरू पुरस्कार” का उद्देश्य*

राज्य सरकार ग्रामीण संस्कृति, कला, शिल्प और प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण में लगे लोगों को सम्मानित करेगी। झिरका जैसी पहल से होमस्टे संचालकों, लोक कलाकारों और सामुदायिक पर्यटन समितियों को सीधा प्रोत्साहन मिलेगा।

ग्रामीणों का कहना है कि इस पहल से न सिर्फ रोजगार बढ़ेगा, बल्कि दंतेवाड़ा, बस्तर की संस्कृति को *राष्ट्रीय एवं वैश्विक पहचान* भी मिलेगी।

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